Delhi में हर साल 5.75 लाख लोग बन रहे कुत्तों का शिकार, स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े
Delhi Dog Bite Cases: नई स्टडी के मुताबिक दिल्ली में हर साल करीब 5.75 लाख लोग कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं, जिनमें 75.5% मामले आवारा कुत्तों से जुड़े हैं और गंभीर मामलों में 73.1% पीड़ितों को RIG इंजेक्शन नहीं मिला.
Delhi News: दिल्ली में कुत्तों के काटने की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं. एक नई रिसर्च के मुताबिक, राजधानी में हर साल हर 1,000 लोगों में से लगभग 25.5 लोगों को कुत्ते काटते हैं. इसके आधार पर यह अनुमान है कि दिल्ली में हर साल लगभग 5.75 लाख लोगों को कुत्ते काटते हैं. यह आंकड़ा नेशनल एवरेज से ज्यादा है.
बता दें कि हम हर साल 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज डे मनाया जाता है, ताकि रेबीज से बचाव के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके. ऐसे में दिल्ली में कुत्ते काटने के मामलों पर नजर ड़ालते है और ताजा रिसर्च इसको लेकर क्या कहती है.
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) और यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (UCMS) के डॉक्टरों द्वारा की गई इस रिसर्च में नॉर्थ और साउथ शाहदरा जोन के 800 परिवारों के लगभग 4,000 लोग शामिल थे. यह स्टडी BMC पब्लिक हेल्थ जर्नल में पब्लिश हुई है.
ज्यादा खतरा पैदा करते हैं आवारा कुत्ते
रिसर्च के मुताबिक, कुत्तों के काटने के लगभग 75.5% मामले सड़कों और गलियों में घूमने वाले आवारा कुत्तों की वजह से हुए, जबकि बाकी मामले पालतू कुत्तों की वजह से हुए. कुत्तों के काटने के मामले झुग्गी-झोपड़ियों, पुनर्वास कॉलोनियों, अवैध बस्तियों और प्लान्ड इलाकों में भी रिपोर्ट किए गए.
शाम को सबसे ज्यादा मामले
स्टडी से पता चला है कि कुत्तों के काटने के मामले दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा आते हैं. इस दौरान 39.2% लोगों पर कुत्तों ने हमला किया. 33.3% मामले सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच रिपोर्ट किए गए. महिलाओं की तुलना में पुरुषों में पीड़ितों की संख्या काफी ज्यादा थी. स्टडी के अनुसार, 71.6% पीड़ित पुरुष थे और 28.4% महिलाएं थीं.
रेबीज से बचाव को लेकर चिंताएं
स्टडी में कुत्तों के काटने के बाद इलाज को लेकर भी गंभीर स्थिति का पता चला. लगभग 25.5% पीड़ितों को एंटी-रेबीज वैक्सीन की पूरी डोज नहीं मिली. इनमें से 2% को एक भी डोज नहीं मिली, जबकि 8.8% को सिर्फ एक डोज मिली और 15.7% को दो या तीन डोज मिलीं. लगभग 75.5% लोगों ने वैक्सीनेशन का पूरा कोर्स पूरा किया.
गंभीर रूप से काटने के मामलों में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) का इस्तेमाल भी कम पाया गया. स्टडी के मुताबिक, ऐसे लगभग 73.1% पीड़ितों को RIG इंजेक्शन नहीं मिला.
कई मरीजों को 24 घंटे के अंदर वैक्सीन नहीं मिल पाती
RML अस्पताल से जुड़ी एक और स्टडी में पाया गया कि कुत्ते के काटने के लगभग 15.7% पीड़ितों को 24 घंटे के अंदर एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं मिल पाती. अस्पताल ने इस साल अब तक कुत्ते और दूसरे जानवरों के काटने के 38,727 मामले रिपोर्ट किए हैं.
इस बीच, सफदरजंग अस्पताल में इस साल जून तक कुत्ते और दूसरे जानवरों के काटने के 53,815 मामले दर्ज किए गए थे. ये आंकड़े राजधानी में कुत्ते के काटने की समस्या के पैमाने को दिखाते हैं.