)
Delhi News: दिल्ली-NCR में रोज सफर करने वाले लोगों के लिए बारापुला फेज-3 कॉरिडोर शुरू होना राहत की खबर है. एलिवेटेड कॉरिडोर के खुलने से नोएडा, गाजियाबाद और पूर्वी दिल्ली से साउथ दिल्ली की तरफ आने-जाने वाले गाड़ी चालकों को एक नया रास्ता मिल गया है. इस तरफ से आने वाली कई गाड़ियां सराय काले खां और रिंग रोड के ट्रैफिक में जाने के बजाय बारापुला कॉरिडोर का इस्तेमाल कर सकेंगे. ऐसे में सराय काले खां का जाम कम हो सकता है.
सराय काले खां के जाम से मिलेगा निजात
अभी नोएडा और गाजियाबाद से साउथ दिल्ली की तरफ जाने वाली कई गाड़ियां DND, रिंग रोड और सराय काले खां के आसपास के रास्तों से जाते हैं. यही कारण है कि इन रास्तों पर दिन के समय ज्यादातर गाड़ियों का दबाव बना रहता है. इसमें सराय काले खां ऐसा रास्ता है जहां कई दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक एक साथ जुड़ता है.
बारापुला फेज-3 शुरू होने के बाद अब लोगों के पास यमुना पार करने के लिए एक और रास्ता होगा. इसका मतलब ये नहीं है कि रिंग रोड पर ट्रैफिक पूरी तरह खत्म हो जाएगा, बल्कि ट्रैफिक का का दबाव एक तरफ से दूसरे तरफ डायवर्ट हो जाएगा. साथ ही पुराने रास्ते पर दबाव कम भी हो सकता है.
रोजाना दिल्ली में आते हैं लाखों वाहन
नेशनल कैपिटल रीजन से हर रोज गाड़ियां दिल्ली में एंट्री करती हैं. बता दें कि हर रोज लगभग 11 लाख गाड़ियां एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली आते हैं. इसमें से 5 लाख के आस-पास वाहन नोएडा और गाजियाबाद की तरफ जाते हैं.
इसमें से बड़ी संख्या में गाड़ियां दक्षिण दिल्ली या मध्य दिल्ली की तरफ जाने के लिए पूर्वी दिल्ली के मेन रास्तों का उपयोग करते हैं. DND, एनएच-9/एनएच-24 और अक्षरधाम से रिंग रोड की तरफ जाने वाला नेटवर्क इस ट्रैफिक के लिए जरूरी रास्ता है. ऐसे में बारापुल्ला फेज-3 से उम्मीद है कि इन वाहनों में से कुछ को नया ऑप्शन मिलेगा. साथ ही उन्हें सराय काले खां की तरफ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
INA से मयूर विहार तक सफर में भी फायदा
इस कॉरिडोर का फायदा केवल नोएडा और गाजियाबाद से साउथ दिल्ली की तरफ आने वाले लोगों को नहीं मिलेगा. INA, साउथ दिल्ली और आसपास के इलाके से मयूर विहार, नोएडा या गाजियाबाद की तरफ जाने वाली गाड़ियां भी इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकती है.
ट्रैफिक अधिकारियों के अनुसार, ऐसे गाड़ियों से पहले सराय काले खां और DND रोड की तरफ जाने के बजाय बारापुला फेज-3 कॉरिडोर के जरिए यमुना पार कर सकते हैं. इसी तरह नोएडा, गाजियाबाद, मयूर विहार और अक्षरधाम से साउथ दिल्ली की तरफ आने वाले वाहन भी अपनी सफर के कुछ हिस्से के लिए इस नए रास्ते का इस्तेमाल कर सकेंगे. इसमें खास तौर पर उन लोगों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें सराय काले खां के रास्ते से गुजरने की जरूरत नहीं है. मौजूदा सड़क नेटवर्क के कारण उन्हें इसी तरफ जाना पड़ता है.
रिंग रोड पर क्यों रहता है ज्यादा दबाव?
दिल्ली का रिंग रोड शहर के सबसे जरूरी और व्यस्त रास्तों में से एक है. इससे कई बड़े रास्ते जुड़ते हैं. यही कारण है कि ट्रैफिक केवल सुबह और शाम के पीक आवर में नहीं रहता है, बल्कि दिन में भी ज्यादातर समय गाड़ियों का दबाव बना रहता है. सराय काले खां के पास रिंग रोड का एक हिस्सा 4 लेन का है. दूसरी तरफ DND 6 लेन का मेन रास्ते है. इसके जरिए ही नोएडा से आने वाले ट्रैफिक दिल्ली में आते हैं. अक्षरधाम की ओर से आने वाला ट्रैफिक भी इसी बड़े नेटवर्क से जुड़ता है. जब अलग-अलग दिशाओं से आने वाली गाड़ियां एक ही जगह पर पहुंचती हैं, तो सड़क पर दबाव बढ़ जाता है. इसलिए समस्या केवल सड़क की चौड़ाई या लेन की नहीं है, बल्कि ट्रैफिक के एक ही जगह मिलने से लगने वाले जाम की भी है.
जाम खत्म नहीं, दबाव कम करना है मकसद
बारापुल्ला फेज-3 के शुरू होने से इसकी उम्मीद नहीं की जा रही कि सराय काले खां या रिंग रोड पर जाम पूरी तरह खत्म हो जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक को एक अतिरिक्त विकल्प देना है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डीके गुप्ता के अनुसार, ये परियोजना केवल एक और सड़क जोड़ने तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य उन गाड़ियों के लिए ऑप्शनल रास्ते उपलब्ध कराना है जो अभी रिंग रोड का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होते हैं. अगर नोएडा या गाजियाबाद से आने वाली किसी गाड़ी को सराय काले खां की तरफ जाने की जरूरत नहीं है, तो उसके पास दूसरे रास्ते से जाने का भी ऑप्शन होगा. इससे रिंग रोड पर गाड़ियों की संख्या में कुछ कमी आ सकती है. 
अलग-अलग रास्तों पर जाएगा ट्रैफिक
बारापुला फेज-3 का सबसे बड़ा फायदा ट्रैफिक को अलग-अलग रास्तों पर भेजने से देखा जा रहा है. अभी कई गाड़ियां एक ही रास्ते से आती जाती हैं. नए कॉरिडोर से कुछ ट्रैफिक दूसरी रास्ते से जा सकेगा. नोएडा और गाजियाबाद से साउथ दिल्ली जाने वाले लोगों के लिए इसका मतलब ये हो सकता है कि उन्हें हर बार DND-रिंग रोड-सराय काले खां वाले रास्ते से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा. इसी तरह साउथ दिल्ली से पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद की ओर जाने वाले वाहनों को भी एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा.