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कौन सा इलाका डूबेगा, जमीन कहां धंसेगी? IIT दिल्ली का GeoTwin पहले बताएगा खतरा

Delhi News: अब बारिश के बाद जलभराव का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि पहले ही पता लगाया जा सकेगा कि शहर के किन इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है. साथ ही जमीन धंसने, ट्रैफिक और प्रदूषण में होने वाले बदलावों की भी एक ही प्लेटफॉर्म से निगरानी की जा सकेगी.

Written By Akanchha Singh
Published: Sep 16, 2026, 10:14 AM IST | Updated: Sep 16, 2026, 10:17 AM IST
Image Credit: IIT_Delhi
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Delhi News: अब बारिश के बाद सड़कें डूबने या जलभराव होने का इंतजार नहीं करना होगा, क्योंकि अब पहले ही पता चल जएगा कि शहर के किन इलाकों में बाढ़ का खतरा हो सकता है. इसके साथ ही जमीन के धंसने, ट्रैफिक और प्रदूषण में होने वाले बदलावों पर भी एक ही प्लेटफॉर्म से नजर रखी जा सकेगी. IIT दिल्ली के FITT में इनक्यूबेटेड जियोस्पेशियल AI स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स ने GeoTwin नाम से 4-D डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म तैयार किया है.

पहले ये तकनीक किसी शहर की डिजिटल कॉपी तैयार करेगी. इसके बाद इसमें शहर में समय के साथ होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड किया जाएगा. अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित जोखिमों का पहले से अनुमान लगाने में मदद मिलेगी. इसका इस्तेमाल शहरी बाढ़, जमीन धंसाव, भूस्खलन, ट्रैफिक और प्रदूषण की निगरानी के लिए किया जा सकेगा.

कई स्रोतों से जुटाया जाएगा डेटा
GeoTwin में ड्रोन और हवाई LiDAR सर्वे, सैटेलाइट फोटो और InSAR सैटेलाइट माप से मिलने वाले डेटा को जोड़ा जाएगा. इसके अलावा मौसम और बारिश का पूर्वानुमान, ट्रैफिक फीड और जमीन पर लगे IoT सेंसर से मिलने वाली जानकारी भी सिस्टम में शामिल होगी. इससे शहर के अलग-अलग विभागों से आने वाले डेटा को एक साथ देखा और समझा जा सकेगा.

बारिश से पहले बाढ़ का अनुमान
इतना ही नहीं प्लेटफॉर्म में मौसम और बारिश के पूर्वानुमान को शहर की भौगोलिक जानकारी के साथ जोड़ा जाएगा. ऐसे में बारिश से पहले उन इलाकों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां बाढ़ या जलभराव का खतरा ज्यादा है. InSAR तकनीक के जरिए जमीन के धीरे-धीरे धंसने की निगरानी भी की जा सकेगी.

किसके पास रहेगा डेटा
GeoTwin की खास बात ये है कि नगर निकाय और दूसरे संस्थान अपने डेटा का स्वामित्व अपने पास रख सकेंगे. जरूरत पड़ने पर प्लेटफॉर्म को संस्थान के अपने परिसर में भी चलाया जा सकेगा. इसके नतीजों को मौजूदा शहरी योजना और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से Open API के जरिए जोड़ा जा सकता है.

अर्थसेंस के सह-संस्थापक और CEO डॉ. निर्देष कुमार शर्मा के अनुसार, शहर लगातार बदलते रहते हैं. ऐसे में जियोस्पेशियल AI और वैज्ञानिक मॉडलिंग को शहरी प्रशासन के रोजमर्रा के फैसलों से जोड़ना जरूरी है. फिलहाल अर्थसेंस लैब्स नगर निगमों, शहरी विकास प्राधिकरणों और यूटिलिटी संस्थानों के साथ इस प्लेटफॉर्म की तैनाती को लेकर बातचीत कर रहा है. इसे हाल ही में FITT Forward 2026 में भी प्रदर्शित किया गया था

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About the Author

जी-न्यूज में ट्रेनी सब एडिटर. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर हरियाणा डिजिटल टीम में दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा की राजनीति, हाइपर लोकल, क्राइम की खबरों पर नजर. यूटिलीटी की खबरों में दिलचस्पी है. 2023 में संस्थान से जुड़े. माखन लाल चतुर्वेदी भोपाल से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की.
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