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दिल्ली के लुटियंस जोन की दो व्यस्त और ऐतिहासिक इमारतें शास्त्री भवन और कृषि भवन अब कुछ ही दिनों की मेहमान हैं. केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी सीपीडब्ल्यूडी ने इन्हें 30 सितंबर तक पूरी तरह खाली करने का आदेश दिया है. हाल ही में सीपीडब्ल्यूडी ने एक पत्र जारी किया है. इसमें कहा गया है कि निर्माण एजेंसी को समय पर जगह सौंपने और तय समय के अनुसार काम शुरू करने के लिए ऐसा करना जरूरी है. इसी के साथ सेंट्रल विंस्टा प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
असल में इन दोनों इमारतों की जगह अब 'कर्तव्य भवन 4' और 'कर्तव्य भवन 5' बनाए जाएंगे. ये दोनों भवन 'सेंट्रल विस्टा' योजना का अगला बड़ा हिस्सा हैं. सीपीडब्ल्यूडी इनके लिए टेंडर पहले ही जारी कर चुका है. नई इमारतें नई दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित प्लॉट संख्या 120 पर बनेंगी. यानी ये उसी जगह बनेंगी, जहां अभी शास्त्री भवन और कृषि भवन मौजूद हैं.
दोनों इमारतों का निर्माण 1956 से 1968 के बीच हुआ था. यानी दोनों करीब 60-70 साल पुरानी हैं. शास्त्री भवन का नाम देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखा गया था. यह सात मंजिला इमारत है और आजादी के बाद से ही केंद्र सरकार के प्रशासनिक कामकाज का एक अहम केंद्र रही है.
शास्त्री भवन में लंबे समय तक शिक्षा मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के दफ्तर रहे. इसके अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के दफ्तर भी यहां चलते रहे. वहीं कृषि भवन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय जैसे बड़े मंत्रालयों के दफ्तर रहे हैं.
पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रालय और विभाग इन दोनों इमारतों को छोड़ना शुरू कर चुके हैं. इनमें से कई दफ्तर सेंट्रल विस्टा के हाई सिक्योरिटी वाले इलाके में हाल ही में तैयार हुए नए कर्तव्य भवनों में शिफ्ट हो चुके हैं. यह काम पहले से ही चरणबद्ध तरीके से चल रहा था. अब सीपीडब्ल्यूडी ने 30 सितंबर की डेडलाइन देकर इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है.
सरकारी रिपोर्ट्स के अनुमान के मुताबिक इन दोनों नई इमारतों के निर्माण पर करीब 3,155 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. इसमें सिर्फ निर्माण का खर्च शामिल नहीं है. इस रकम में इमारतें बनने के बाद अगले पांच साल तक उनके रखरखाव और संचालन का खर्च भी शामिल है. इनके निर्माण में करीब 24 महीने यानी दो साल लगने का अनुमान है.

इस पूरी परियोजना की शुरुआत सितंबर 2019 में हुई थी. सीपीडब्ल्यूडी ने इलाके को नए तरीके से विकसित करने के लिए आर्किटेक्ट्स से प्रस्ताव मांगे थे. इसके बाद नया संसद भवन, कर्तव्य पथ यानी पुराने राजपथ का कायाकल्प और उपराष्ट्रपति एन्क्लेव जैसे तीन बड़े चरण पूरे हो चुके हैं. नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के दफ्तर भी दूसरी जगह भेजे जा चुके हैं. इन्हें 'युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय' में बदलने का प्रस्ताव है.
अब कर्तव्य भवन 4 और कर्तव्य भवन 5 अगला चरण हैं. सरकार की योजना के मुताबिक पूरी परियोजना के तहत कुल 10 कर्तव्य भवन बनाए जाने प्रस्तावित हैं. अभी काफी काम बाकी है और पूरी परियोजना तैयार होने में अभी और समय लगेगा.
सेंट्रल विस्टा परियोजना 2019 में घोषित हुई थी. नए संसद भवन का शिलान्यास 10 दिसंबर 2020 को हुआ. हालांकि इससे तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ शिलान्यास समारोह की इजाजत दी थी और निर्माण पर याचिकाओं के निपटारे तक रोक बरकरार रखी थी. कोर्ट ने यह रोक 5 जनवरी 2021 को हटाई. इसके बाद 28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया. इसे बनाने में करीब 971 करोड़ रुपये खर्च हुए. इसके साथ पुराने राजपथ का कायाकल्प कर उसे 'कर्तव्य पथ' बनाया गया और उपराष्ट्रपति एन्क्लेव भी पूरा हो चुका है.
कॉमन केंद्रीय सचिवालय की पहली इमारत कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन 6 अगस्त 2025 को हुआ. इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, MSME मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और पेट्रोलियम मंत्रालय जैसे दफ्तर शिफ्ट हुए.
इसके बाद 13 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ को नए 'सेवा तीर्थ' परिसर में शिफ्ट किया गया. आजादी के बाद पीएमओ का यह पहला रिलोकेशन है. इससे पहले पीएमओ दक्षिण ब्लॉक में था. इसी दिन कर्तव्य भवन-1 और 2 का भी उद्घाटन हुआ. इनमें वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना-प्रसारण, कृषि, रसायन-उर्वरक, जनजातीय मामले और कॉरपोरेट अफेयर्स जैसे मंत्रालय पहुंचे.
आगे क्या बनना बाकी है?
कर्तव्य भवन-10 का निर्माण अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था. इसके अलावा कर्तव्य भवन 6 और 7 पर भी काम चल रहा है. हालांकि इनकी सटीक संख्या को लेकर स्रोतों में थोड़ा अंतर है. ज्यादातर जगह 10 भवनों की बात है, जबकि जनवरी 2026 की एक रिपोर्ट में मंत्रालयों के लिए 8 कर्तव्य भवन प्रस्तावित बताए गए हैं. पीएमओ का 'सेवा तीर्थ' परिसर इनसे अलग है. शास्त्री भवन और कृषि भवन की जगह बनने वाले कर्तव्य भवन 4 और 5 इसी सिलसिले का अगला हिस्सा हैं, जिनका टेंडर पहले ही दिया जा चुका है.
साझा केंद्रीय सचिवालय के तहत कुल 51 केंद्रीय मंत्रालयों को इन भवनों में स्थापित करने की योजना है. इसका उद्देश्य मंत्रालयों के बीच समन्वय और प्रशासनिक तालमेल को बेहतर करना है.
सेंट्रल विस्टा पर कुल कितना खर्च हो रहा है
इसको लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े हैं. कुछ रिपोर्टों में पूरी परियोजना की लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि कुछ में चार वर्षों के लिए करीब 13,450 करोड़ रुपये का अनुमान दिया गया है. अलग-अलग हिस्सों की बात करें तो नए संसद भवन पर करीब 971 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. कुछ रिपोर्टों में यह रकम 1,200 करोड़ रुपये तक बताई गई है. कर्तव्य भवन-3 का ठेका लार्सन एंड टुब्रो ने करीब 3,142 करोड़ रुपये में जीता था.
कर्तव्य भवन 4 और 5 पर अलग से करीब 3,155 करोड़ रुपये खर्च होने हैं, जिसमें पांच साल का रखरखाव भी शामिल है. प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त 2025 में कहा था कि सभी 10 कर्तव्य भवन बनने के बाद सरकार को हर साल करीब 1,500 करोड़ रुपये किराए की बचत होगी. फिलहाल सेंट्रल विस्टा के बाहर किराए पर चल रहे मंत्रालयों और विभागों पर सरकार हर साल करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च करती है.
विपक्ष और सिविल सोसाइटी ने क्या सवाल उठाए
सेंट्रल विस्टा री-डेवलपमेंट में शास्त्री भवन, उद्योग भवन, कृषि भवन, विज्ञान भवन, उपराष्ट्रपति निवास और लोक नायक भवन सहित करीब 10 इमारतों को गिराया जाना शामिल है. इसको लेकर शुरू से सवाल उठते रहे हैं. कोविड की दूसरी लहर के दौरान इतिहासकार सोहेल हाशमी और अनुवादक अन्या मल्होत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निर्माण रोकने की मांग की थी. कोर्ट ने 31 मई 2021 को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.
इस फैसले को चुनौती देने वाली एक अलग अपील को सुप्रीम कोर्ट ने भी 29 जून 2021 को खारिज कर दिया. पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी लगातार उठता रहा है. सरकार ने लोकसभा में अप्रैल 2026 में स्वीकार किया कि प्रोजेक्ट के तहत ट्रांसप्लांट किए गए 3,609 पेड़ों में से 1,545 यानी 43% जीवित नहीं बच सके.
हालांकि इसकी भरपाई के लिए बदरपुर के एनटीपीसी इको पार्क और घिटोरनी में बड़े स्तर पर पेड़ भी लगाए गए. पर्यावरणविदों और हेरिटेज प्रेमियों ने महामारी के दौरान भारी खर्च, हेरिटेज इमारतों को गिराने और पारदर्शिता की कमी को लेकर भी सवाल उठाए. नए संसद भवन के उद्घाटन 28 मई 2023 का 20 विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था. उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कार्यक्रम में दरकिनार किया.
कर्मचारियों की शिफ्टिंग कैसे हो रही है
शिफ्टिंग चरणबद्ध तरीके से हो रही है. जैसे-जैसे नए भवन तैयार होते गए, मंत्रालय वहां शिफ्ट होते गए. कर्तव्य भवन-3 तैयार होने के बाद गृह, विदेश, ग्रामीण विकास, MSME और पेट्रोलियम मंत्रालय वहां पहुंचे. कर्तव्य भवन 1-2 और सेवा तीर्थ तैयार होने के बाद वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा मंत्रालय और खुद पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय भी शिफ्ट हो गए. इसी क्रम में अब शास्त्री भवन और कृषि भवन के दफ्तरों को भी नए भवनों में भेजा जा रहा है ताकि 30 सितंबर तक दोनों पुरानी इमारतें खाली हो जाएं.
पूरा प्रोजेक्ट कब तक तैयार होगा?
इसकी कोई एक पक्की और आधिकारिक तारीख नहीं है. मगर सरकार का एक बयान जरूर है. सरकार की तरफ से राज्यसभा में मार्च 2026 में जानकारी दी गई थी कि कॉमन सेंट्रल सचिवालय के बचे हुए अन्य भवनों का निर्माण कार्य अप्रैल 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा.