अगर ये 5 काम किए तो नहीं होगा दिल्ली के बाजारों को नुकसान, प्रदर्शन-व्यापार के बीच बनेगा संतुलन; CAIT ने LG को दिया यह सुझाव
दिल्ली में बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से व्यापार और जनजीवन पर पड़ रहे असर को देखते हुए CAIT ने LG तरनजीत सिंह संधू से राजधानी के बाहरी इलाकों में प्रदर्शन के लिए स्थायी जगहें तय करने. इसके साथ ही 5 उपाय लागू करने की अपील की है.
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) से आग्रह किया है कि वे राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाकों में विरोध-प्रदर्शनों के लिए आधिकारिक जगह तय करें, क्योंकि इनके बार-बार होने से व्यावसायिक गतिविधियों, लोगों की आजीविका और आम जनजीवन पर बुरा असर पड़ता है.
CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने उपराज्यपाल को लिखे पत्र में दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण बार-बार होने वाली बाधाओं का जिक्र किया.
दिल्ली के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनस्थल बनाने की अपील
इसमें LG से हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों, जनसभाओं, प्रदर्शनों और राजनीतिक आयोजनों के लिए उपयुक्त जगहों की पहचान करें और उन्हें अधिसूचित करें.
प्रदर्शनों से बाधित हो रहा व्यापार
व्यापारी संगठन ने कहा कि पिछले एक महीने से भी अधिक समय से दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण रुक-रुक कर, लेकिन लगातार व्यवधान आ रहे हैं, जिससे बाजार, कारोबार और नागरिकों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है.
पत्र में कहा गया है, हालांकि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे लोकतांत्रिक ढांचे का एक अहम हिस्सा है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि इस अधिकार का इस्तेमाल करते समय दूसरे नागरिकों के अधिकारों और उनकी आजीविका का हनन न हो.
लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करें, लेकिन व्यापार करने के अधिकार की बलि नहीं
पत्र में कहा गया है कि विरोध करने का अधिकार शहर को ठप करने का अधिकार नहीं बन सकता, ठीक वैसे ही जैसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते समय व्यापार करने के अधिकार की बलि नहीं दी जा सकती.
दिल्ली भारत के सबसे बड़े व्यापारिक, थोक और वितरण केंद्रों में से एक
CAIT ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली भारत के सबसे बड़े व्यापारिक, थोक और वितरण केंद्रों में से एक है, जहां हजारों बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान लाखों लोगों की आजीविका का जरिया हैं. इसमें कहा गया है कि बार-बार होने वाली रुकावटों से न केवल व्यापारी और दुकानदार प्रभावित हुए हैं, बल्कि रेहड़ी-पटरी वाले, फेरीवाले, दिहाड़ी मजदूर, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, कर्मचारी, डिलीवरी करने वाले लोग और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठान भी प्रभावित हुए हैं.
व्यापारियों और कारोबारियों का दिल्ली में आना-जाना हुआ कम
संगठन ने बताया कि ट्रैफिक डायवर्जन, सड़कों की नाकेबंदी और व्यावसायिक इलाकों तक पहुंच सीमित होने के कारण देश के अन्य हिस्सों से आने वाले व्यापारियों और कारोबारियों ने दिल्ली आना कम कर दिया है. इसका असर व्यापारिक लेन-देन पर पड़ा है और सप्लाई चेन भी बाधित हुई है.
CAIT ने सुझाए 5 उपाय
एक स्थायी समाधान की मांग करते हुए CAIT ने पांच उपाय सुझाए हैं:
- विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहें घोषित करना
- व्यावसायिक और बाजार क्षेत्रों की सुरक्षा
- लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाना
- लोगों की रोजी-रोटी की सुरक्षा करना
- सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना शामिल है.
संगठन ने सुझाव दिया कि दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि विरोध-प्रदर्शन इस तरह से हों कि आम जनता को कोई परेशानी न हो और आर्थिक गतिविधियां भी न रुकें.
कैट ने स्पष्ट किया कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित नहीं करना चाहते, बल्कि उनकी चिंता यह है कि विरोध-प्रदर्शनों की वजह से राष्ट्रीय राजधानी का आर्थिक जीवन पूरी तरह ठप न हो जाए.
पत्र में कहा गया है, संविधान शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने की आजादी देता है. साथ ही यह किसी भी पेशे को अपनाने या व्यापार करने का अधिकार भी देता है, जिस पर जनहित में उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. इन दोनों सिद्धांतों की सुरक्षा इस तरह से की जानी चाहिए कि दोनों के बीच संतुलन बना रहे.
विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहें होने से समाधान मिलेगा
व्यापारी संगठन का कहना है कि विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहें होने से एक संस्थागत समाधान मिलेगा, जिससे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और आर्थिक गतिविधियों को चलाने, दोनों काम बिना किसी टकराव के साथ-साथ हो सकेंगे.
इस प्रस्ताव पर प्राथमिकता के साथ विचार करने की अपील
उन्होंने उपराज्यपाल से आग्रह किया कि वे इस प्रस्ताव पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करें और दिल्ली के बाहरी इलाकों में विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त जगहें तय करने की प्रक्रिया शुरू करें. CAIT ने उपराज्यपाल से मुलाकात करने की इच्छा भी जताई है, ताकि वे शहर के व्यापारी समुदाय की चिंताओं और सुझावों को विस्तार से उनके सामने रख सकें.
(Input: IANS)