कुत्ते ने काटा तो झोलाछाप ने लगाए टांके, एंटी रेबीज इंजेक्शन भी नहीं दिया... सूरजपुर में मासूम की मौत
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में झोलाछाप डॉक्टर की बड़ी लापरवाही के चलते एक तीन साल के मासूम की मौत हो गई है. मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
सूरजपुर में झोलाछाप डॉक्टर की कथित लापरवाही ने साढ़े तीन साल के मासूम की जान ले ली. आरोप है कि कुत्ते के काटने के बाद परिजन बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. लेकिन परिजनों को भरोसे में लेकर एक झोलाछाप डॉक्टर बच्चे का इलाज करता रहा.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुत्ते के काटने से हुए घाव पर टांके लगा दिए गए. जबकि ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह के बिना घाव को बंद करना संक्रमण और रेबीज का खतरा बढ़ा सकता है. आरोप है कि बच्चे को जरूरी एंटी रेबीज उपचार भी नहीं दिया गया. आखिरकार 17 अक्टूबर को मासूम की मौत हो गई. मामले की जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए पुलिस को रिपोर्ट भेज दी है.
स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल
दरअसल, यह मामला सूरजपुर जिले के मोहरसोप क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां एक मासूम की मौत ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और झोलाछाप डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शिकायत के मुताबिक, एक अक्टूबर 2026 को साढ़े तीन साल के बच्चे को कुत्ते ने चेहरे और पैरों में काट लिया था. परिजन आनन-फानन में बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहरसोप लेकर पहुंचे, जहां से उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल सूरजपुर रेफर कर दिया गया.
बच्चे के घाव पर टांके क्यों लगाए?
आरोप है कि इसके बाद भी झोलाछाप डॉक्टर रामानुज विश्वकर्मा ने परिजनों को बच्चे का इलाज करने का भरोसा दिया. जागरूकता के अभाव में परिजन उसके भरोसे इलाज कराते रहे. आरोप है कि डॉक्टर ने बच्चे के घाव पर टांके लगा दिए, जबकि डॉग बाइट के मामलों में घाव को सामान्य चोट समझकर टांके लगाना उचित नहीं है. ऐसे घावों का उपचार विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए.
स्वास्थ्य विभाग टीम जांच कर रही
इसके अलावा, बच्चे को एंटी रेबीज इंजेक्शन भी नहीं लगाया गया. इसके बाद 17 अक्टूबर को बच्चे की मौत हो गई. मासूम की मौत से परिवार में मातम पसरा है. शिकायत सामने आने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहरसोप के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने 26 अक्टूबर को जांच और उचित कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की जिला स्तरीय टीम ने मामले की जांच की.
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स्वास्थ्य विभाग की लोगों से अपील
सीएमएचओ प्रशांत कुमार ने बताया कि जांच में संबंधित झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही सामने आई है. विभाग ने उसके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर FIR दर्ज करने के लिए संबंधित थाने भेज दी है. वहीं परिजनों ने भी डाक्टर पर करवाई की मांग की है. इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते के काटने को मामूली चोट समझकर नजरअंदाज न करें. जिले के शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रेबीज इंजेक्शन मुफ्त उपलब्ध हैं. कुत्ते के काटने तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें. डॉक्टर की सलाह के मुताबिक, एंटी रेबीज वैक्सीन का पूरा उपचार लें. झोलाछाप के भरोसे इलाज कराने की गलती न करें. क्योंकि, रेबीज से बचाव में जरा सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है.