बस्तर में BJP-कांग्रेस के 116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती, 9 की Z+ से Z हुई सिक्योरिटी...कई बड़े नाम शामिल
बस्तर क्षेत्र में सशस्त्र नक्सलवाद के प्रभाव में आई कमी को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस के 116 नेताओं को दी गई सुरक्षा कम कर दी गई है. उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस बारे में जानकारी दी है.
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गृह विभाग ने एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक फैसला लिया है. बस्तर में सशस्त्र नक्सलवाद में लगातार आई कमी और कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार को देखते हुए वहां के प्रमुख राजनीतिक नेताओं को दी जाने वाली सुरक्षा में कटौती की गई है. उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह कदम लगातार निगरानी के आधार पर उठाया गया है और हर छह महीने में इसकी समीक्षा की जाएगी. इस सूची में मंत्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, कांग्रेस नेता दीपक बैज और कवासी लखमा समेत अन्य लोग शामिल हैं.
बस्तर में BJP-कांग्रेस के 116 नेताओं की सुरक्षा में कटौती
इसके तहत भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों दलों के कुल 116 नेताओं की सुरक्षा घटाई गई है. विशेष रूप से 9 हाई-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा को Z+ श्रेणी से घटाकर Z श्रेणी में कर दिया गया है, जिनमें राज्य के कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप और नक्सल प्रभावित कर्मा परिवार के सदस्य भी शामिल हैं. इसके अलावा बस्तर क्षेत्र के सांसदों (MPs), विधायकों (MLAs) और पूर्व मंत्रियों को दी जाने वाली सुरक्षा में भी कुछ कटौती की गई है. जिन नेताओं के पास पहले Z श्रेणी की सुरक्षा थी, उन्हें Y+ श्रेणी में डाल दिया गया है, जबकि Y+ सुरक्षा वाले नेताओं को Y श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया गया है.
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कई बड़े नाम शामिल
गृह विभाग जल्द ही इस पर आदेश जारी करेगा. आदेश आने के बाद ही पता चलेगा कि किस नेता को कौन सी सुरक्षा मिलेगी और बदलाव कब से लागू होगा. लिस्ट में मंत्री केदार कश्यप के अलावा पूर्व मंत्री महेश गागड़ा और कांग्रेस के दीपक बैज और कवासी लखमा की भी सुरक्षा घटाई जाएगी.
लगातार मॉनिटरिंग के बाद घटाई सुरक्षा
बस्तर के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की भी सुरक्षा घटाई गई है. बताया जा रहा है कि नक्सलवाद कम होने और सुरक्षा का नया आकलन करने के बाद यह फैसला लिया गया है. नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा के बाद यह बदलाव किया गया है. हालांकि अभी तक इसका पूरा सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है.
हर छह महीने में की जाएगी समीक्षा
बस्तर में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा में की गई यह कटौती इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस क्षेत्र में नक्सलवाद अब कमजोर पड़ गया है और कानून-व्यवस्था की स्थिति में काफी सुधार आया है. हालांकि, गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा का उचित संतुलन बनाए रखने के लिए हर छह महीने में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी.