छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं. जिला मुख्यालय से सिर्फ 12 किलोमीटर दूर स्थित राहुद प्राथमिक स्कूल की तस्वीरों में छोटे बच्चे किताबें पकड़ने के बजाय स्कूल परिसर में बर्तन धोते हुए दिख रहे हैं. इससे साफ पता चलता है कि बच्चों से पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय काम करवाया जा रहा है. प्राइमरी स्कूल की इन तस्वीरों ने शिक्षा विभाग के कामकाज पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है.
कैसी शिक्षा व्यवस्था?
इससे पहले खाम्ही स्कूल में भी बच्चों से पानी भरवाने और बर्तन धुलवाने की तस्वीरें आई थीं, फिर भी प्रशासन की लापरवाही के कारण सिस्टम में कोई सुधार नहीं किया गया. इस पूरी घटना के दौरान संकुल प्रभारी का रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा. उनका कहना था कि बच्चे स्कूल के समय (सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक) से पहले आ जाते हैं, इसलिए उस समय के दौरान उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है. ऐसे बयानों से यह सवाल उठता है कि, क्या शिक्षक सचमुच स्कूल परिसर में मौजूद बच्चों की सुरक्षा और भलाई की अनदेखी कर सकते हैं?
किताबों की जगह हाथों में बर्तन
अब जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित राहुद प्राथमिक स्कूल में भी ऐसी ही घटना सामने आई है. यहां भी जिन बच्चों हाथों में किताबें, नोटबुक और पेंसिलें होनी चाहिए थीं, वे स्कूल के बर्तन धोते हुए देखे गए. बच्चों को मिड-डे मील (दोपहर का भोजन) तैयार होने से पहले बर्तन धोते हुए देखा गया. यानी, स्कूल पहुंचते ही पढ़ाई शुरू होने से पहले ही बच्चों के जिम्मे सफाई का काम आ जाता था. सबसे गंभीर बात सिर्फ यह नहीं है कि बच्चे बर्तन धो रहे थे, बल्कि उस सिस्टम की हालत है जिसमें स्कूल परिसर में ऐसी गतिविधियां होती रहीं और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी.
जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के आदेश
इस घटना पर संकुल प्रभारी की प्रतिक्रिया ने भी सबका ध्यान खींचा है. उन्होंने कहा कि बच्चे स्कूल समय से पहले आ जाते हैं और सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक की जिम्मेदारी ही उनकी है. अब सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ इसलिए जिम्मेदारी खत्म हो जाती है कि बच्चे तय समय से पहले स्कूल पहुंच जाते हैं? इसके अलावा, अगर बच्चे स्कूल खुलने से पहले ही सफाई या दूसरे काम करने लगते हैं, तो उन्हें रोकने वाला कौन है? खाम्ही और राहुद जैसी जगहों पर हुई घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की असलियत को सामने ला रही हैं. मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी रूपेंद्र कुमार देवांगन ने जांच के आदेश दिए हैं और सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे बच्चों से ऐसे काम न करवाएं.