महानदी जल विवाद: क्या है छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच 44 साल पुराना पानी का झगड़ा? अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री की बड़ी बैठक
नई दिल्ली में आज महानदी जल विवाद को लेकर अहम बैठक होगी. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जल बंटवारे, पानी के प्रबंधन और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से जारी महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल की है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है. ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने इस संबंध में जानकारी दी. बैठक में दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद पर चर्चा होने की उम्मीद है.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और तकनीकी समितियों के सदस्यों इस बैठक में शामिल होंगे. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी इस अहम बैठक में हिस्सा लेंगे, जिससे दोनों राज्यों के बीच महानदी के जल बंटवारे, पानी के बेहतर प्रबंधन और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की जाएगी.
क्या है महानदी जल विवाद?
महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच एक दशक से ज्यादा समय से विवाद चल रहा है. ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने महानदी के ऊपरी हिस्से में औद्योगिक इस्तेमाल के लिए कई बैराज बनाए हैं, जिससे नीचे की तरफ पानी के बहाव पर असर पड़ता है. जिस वजह से ओडिशा को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, खासकर कम बारिश और सूखे के समय. 2016 में ओडिशा ने छत्तीसगढ़ में बन रहे छह बैराजों को लेकर तत्कालीन जल संसाधन मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया.
महानदी क्यों है दोनों राज्यों के लिए अहम?
महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि राज्य की लगभग 78 प्रतिशत आबादी इसके बेसिन क्षेत्र में रहती है. हालांकि राज्य में गोदावरी, गंगा, ब्राह्मणी और नर्मदा जैसी नदियों के बेसिन भी मौजूद हैं, लेकिन सामाजिक-आर्थिक नजरिए से महानदी सबसे महत्वपूर्ण है. वहीं ओडिशा के तटीय जिलों में खेती और पीने के पानी की आपूर्ति भी इसी नदी पर निर्भर करती है. नई दिल्ली में होने वाली प्रस्तावित बैठक दोनों राज्यों के बीच भरोसा कायम करने और कोई स्थायी समाधान खोजने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है.
20 सितंबर को हुई थी दोनों मुख्यमंत्री की मुलाकात
20 सितंबर को ओडिशा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी. मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम ने कहा कि महानदी विवाद के समाधान को लेकर एक सकारात्मक माहौल बना है. दोनों राज्यों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपसी बातचीत से समाधान की दिशा में प्रगति की जा सकती है.