700 मनोकामना ज्योतियां, 250 साल पुराना इतिहास और बिना बीज उगते करेले का रहस्य…जानिए खैरागढ़ के इस सिद्ध पीठ की महिमा
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में स्थित मां करेला भवानी मंदिर नवरात्रि में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहां 700 मनोकामना ज्योतियां प्रज्वलित की गई हैं. भक्त माता से परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में मैकाल पर्वत की वादियों के बीच स्थित मां करेला भवानी का सिद्धपीठ नवरात्रि में आस्था का केंद्र बना हुआ है. माता के जयकारों से गूंजते इस दरबार में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंच रहे हैं. खैरागढ़-डोंगरगढ़ मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर ग्राम करेला में मां करेला भवानी का प्रसिद्ध मंदिर है. नवरात्रि में यहां 700 मनोकामना ज्योतियां प्रज्वलित की गई हैं. ज्योतियों की रोशनी के बीच श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं. हर ज्योति किसी भक्त की उम्मीद और माता पर अटूट विश्वास की कहानी कहती है.
मंदिर का इतिहास करीब 250 साल पुराना माना जाता है. जनश्रुति के अनुसार, एक दिन 13 साल की बालिका गांव के जमींदार दाऊ उमेंद सिंह कंवर के पास पहुंची और रहने के लिए जगह मांगी. जमींदार ने उसे आश्रय देने की बात स्वीकार की, लेकिन कुछ ही देर बाद बालिका अचानक गायब हो गई. ग्रामीणों ने पहाड़ी और आसपास के क्षेत्र में दिनभर तलाश की, मगर उसका कोई सुराग नहीं मिला. कहा जाता है कि उसी रात बालिका जमींदार के सपने में आई और पहाड़ पर मंदिर बनवाने का आदेश दिया.
मंदिर से जुड़ी मान्यता
अगले दिन ग्रामीणों को पहाड़ी पर प्राकृतिक पाषाण प्रतिमा मिली. मान्यता है कि बालिका स्वयं मां भवानी का स्वरूप थीं. इसके बाद यहां मंदिर बना और यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र बन गया. इस धाम की सबसे अनोखी मान्यता है कि पहाड़ी की मिट्टी में बिना बीज बोए करेले के पौधे उगते हैं. इसी वजह से माता को मां करेला भवानी कहा जाता है. माता के दो स्वरूप हैं एक तलहटी में और दूसरा चोटी पर स्थित मुख्य मंदिर में. श्रद्धालु सीढ़ियां चढ़कर दर्शन करते हैं.
खैरागढ़ से 20 किलोमीटर दूर स्थित है मंदिर
मां करेला भवानी मंदिर डोंगरगढ़ और खैरागढ़ दोनों से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है. मंदिर के दर्शन के बाद पर्यटक 5 किलोमीटर दूर स्थित डंगबोरा जलाशय में पिकनिक मनाने जा सकते हैं. इसके अलावा मंदिर से लगभग 8 किलोमीटर दूर कोपे नवागांव में स्थित मां विंध्यवासिनी पहाड़ी भी घूमने के लिए एक अच्छी जगह है.
(हेमंत कुमार पाल की रिपोर्ट)