13 साल बाद इंसाफ: झीरम कांड के गुनहगारों को सजा-ए-मौत, NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा
झीरम घाटी हत्याकांड मामले में 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है. NIA की विशेष अदालत ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए नक्सली हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी.
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया है. कांग्रेस नेताओं समेत 27 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. मृत्युदंड की सजा के खिलाफ दोषियों को 30 दिन के भीतर हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है. ऐसे में विशेष NIA अदालत के फैसले के बाद मामले की अगली कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट में हो सकती है. इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था.
5 सितंबर 2026 को विशेष NIA (National Investigation Agency) अदालत ने मामले के सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था. अभियोजन पक्ष की ओर से ट्रायल के दौरान 294 सुनवाई और 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे. हालांकि, उस दिन अदालत ने सजा का ऐलान नहीं किया था. दोषियों की सजा पर फैसला 16 सितंबर के लिए सुरक्षित रखा गया था. इससे पहले, आखिरी बहस पूरी होने के बाद फैसले की तारीख दो बार बदली गई थी. फैसला पहले 31 अगस्त को सुनाया जाना था, लेकिन बाद में तारीख बदलकर 5 सितंबर कर दी गई थी.
झीरम कांड के आरोप
इस मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई. इसके बाद अदालत ने जगदलपुर जेल में बंद बाकी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था. दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम, सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मांडवी, कोसा कवासी, अयात मरकाम, मदकामी देवा, जोगा मदकामी, बंजामी अन्ना और महादेव नाग शामिल हैं.
25 मई को क्या हुआ था?
25 मई 2013 को कांग्रेस छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी. जब नेताओं का काफिला झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी घात लगाकर बैठे सैकड़ों माओवादियों ने उनपर चारों तरफ से अंधाधुंध गोलियां चलाईं. इस हमले में कुल 32 लोगों की मौत हुई और 38 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. हालांकि NIA ने अपनी चार्जशीट में मरने वालों की संख्या आधिकारिक तौर पर 27 बताई.
13 साल बाद सुनाई गई सजा
इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की जान गई थी, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल, तत्कालीन राज्य कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल, बस्तर के प्रभावशाली नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे. राजनीतिक बयानों, जांच आयोगों, NIA की विस्तृत जांच और लंबी कानूनी कार्रवाई के बाद 5 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया गया. इसके बाद लगभग 13 साल बाद 16 सितंबर को दोषियों को उनके अपराध के लिए सजा दी गई.