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आस्था + विकास का संगम: उत्तराखंड की तर्ज पर 1000 KM लंबा 'आस्था पथ', 5 शक्तिपीठों से कैसे बदलेगी छत्तीसगढ़ की आर्थिक तस्वीर?

उत्तराखंड की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी पांच शक्तिपीठों की तस्वीर बदलने की तैयारी चल रही है. इसके लिए सरकार की तरफ से एक योजना बनाई जा रही है, जिसके तहत इन पांचों जगहों को एक पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा. आइए जानते हैं, कि इससे क्या-क्या फायदे होने वाले हैं.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 16, 2026, 11:00 PM IST | Updated: Oct 16, 2026, 11:05 PM IST
Image Credit: ZEE CREATIVE
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अगर छत्तीसगढ़ में कोई भी मां बम्लेश्वरी के दर्शन करने के लिए आता है, तो उसे डोंगरगढ़ जाना पड़ता है. उसके बाद फिर मां महामाया, मां चंद्रहासिनी, मां बागेश्वरी और मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए अलग-अलग रास्तों से होकर यात्रा करनी पड़ती है. लेकिन आने वाले समय में यह सफर बहुत ही आसान होने वाला है. क्योंकि प्रदेश में लगभग 1000 किमी लंबे आस्था पथ की योजना बनाई जा रही है, जिसके जरिए पांच प्रमुख शक्तिपीठों को एक धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी चल रही है. 

जैसे उत्तराखंड में चारधाम यात्रा होती है, उसी के तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी योजना बनाई जा रही है. इस योजना का मकसद सिर्फ मंदिरों तक पहुंचना ही नहीं, बल्कि इसके जरिए सड़क, पार्किंग, पेयजल, सफाई, सुरक्षा समेत वहां ठहरने जैसी सुविधाओं के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी है. इस योजना से लोकल दुकानदार, होटल संचालकों, वाहन चालकों और हस्थशिल्प से जुड़े लोगों को काम के नए अवसर भी मिलेंगे.

क्या है छत्तीसगढ़ का आस्था पथ?
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार प्रदेश के पांच प्रमुख शक्तिपीठों को जोड़कर लगभग 1000 किमी लंबा धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है. इसका संभावित रूट मैप जारी किया गया है. इस योजना पर डीपीआर तैयार की जाएगी, जिसमें सड़क, निर्माण कार्य, जरूरी सुविधाओं से लेकर अन्य खर्चों पर भी विस्तार से तय किया जाएगा.

पथ योजना के लिए 5 करोड़ रुपए
बता दें कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में आस्था पथ योजना के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया जा चुका है. लेकिन इस रकम को पूरे कॉरिडोर के निर्माण के लिए सही नहीं होगा. फिलहाल इस राशि को योजना के तहत श्रद्धालुओं को दर्शन कराने की व्यवस्था से जुड़ी है. पूरे मार्ग को विकसित करने में कितना खर्चा आएगा और निर्माण कब से शुरू होगा. फिलहाल इस पर अभी  कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है.

कौन-कौन से शक्तिपीठ जोड़े जाएंगे
1. मां बम्लेश्वरी मंदिर
मां बम्लेश्वरी मंदिर, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित है. इस मंदिर को प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

2. मां महामाया मंदिर
मां महामाया मंदिर, बिलासपुर के रतनपुर में स्थित है. यह प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है. इस मंदिर को श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र के रूप में जाना जाता है. इसके विकास के लिए अलग से 200 करोड़ रुपए के बजट की कार्ययोजना तैयार की गई है.

3. मां दंतेश्वरी मंदिर
मां दंतेश्वरी मंदिर, बस्तर इलाके के दंतेवाड़ा में मौजूद है. इस मंदिर को आस्था के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी माना जाता है. यहां पर काफी दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं.

4. मां बागेश्वरी धाम
मां बागेश्वरी धाम, सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ धाम में स्थित है. यहां पर स्थानीय से लेकर दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए काफी अहम धार्मिक स्थल माना जाता है.

5. मां चंद्रहासिनी मंदिर
मां चंद्रहासिनी मंदिर, सक्ती जिले के चंद्रपुर में स्थित है. यह मंदिर महानदी के आसपास के धार्मिक और सांस्कृतिक इलाके का सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है.

बताया जा रहा है, कि इन पांचों मंदिरों को एक सर्किट के तहत जोड़ने पर विचार किया जा रहा है. ताकि श्रद्धालुओं को अलग-अलग धामों तक पहुंचने और यात्रा की योजना बनाने में आसानी हो सके. हालांकि, अभी सिर्फ योजना पर पर तैयारी चल रही है. इस योजना से जुड़ी सुविधाओं की तस्वीर डीपीआर तैयार होने के बाद ही साफ होगी.

आस्था पथ की बड़ी योजना के साथ रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के विकास का प्रस्ताव भी अहम माना जाता है. मंदिर परिसर और उससे जुड़ी सुविधाओं के समग्र विकास के लिए करीब 200 करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को भेजी गई है. यह प्रस्ताव केंद्र की PRASHAD योजना के तहत भेजा गया है.

PRASHAD योजना क्या है?
PRASHAD योजना का पूरा नाम Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive है. इस योजना के तहत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित करने में सहायता दी जाती है. रतनपुर की कार्ययोजना को मंजूरी मिलने के बाद काम करने वाली एजेंसी तय की जाएगी. फिर निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा. फिलहाल मंजूरी और काम के शुरू होने की तारीख घोषित नहीं की गई है.

श्रद्धालुओं को क्या-क्या सुविधाएं
1. यात्रा के दौरान पानी, शौचालय, आराम और सुरक्षा की व्यवस्था
2. कनेक्टिविटी, पेयजल, रोशनी और साफ-सफाई की व्यवस्था
3. व्यवस्थित पार्किंग और हवन-पूजन के लिए सुविधाएं 
4. CCTV कैमरे, पर्यटक सहायता केंद्र, गार्डन और होम स्टे जैसी सुविधाएं

स्थानीय लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?
1. आस्था पथ का असर सिर्फ मंदिरों तक ही सीमित नहीं रहेगा. अगर यात्रा व्यवस्थित होती है और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ती है, तो रास्ते में पड़ने वाले कस्बों और गांवों में भी कारोबार के अवसर प्राप्त होंगे.

2. मंदिर के आसपास चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाले, स्थानीय वाहन चालक, छोटे होटल, भोजनालय, फूल-प्रसाद बेचने वाले और होम स्टे संचालकों को भी काफी फायदा होगा.

3. इसके अलावा, स्थानीय हस्तशिल्प को भी पर्यटकों तक पहुंचाने का मौका मिलेगा. छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क, ढोकरा धातु शिल्प और बस्तर कला जैसे उत्पादों को बड़े-बड़े बाजार मिलेंगे.

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About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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