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पति की उम्र 57 साल, शादी को हो गए 22 साल: अब IVF से माता-पिता बनेगा कपल, ART एक्ट से रुकावट नहीं; छत्तीसगढ़ HC का ऐतिहासिक फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक दंपत्ति को बड़ी राहत दी है. कोर्ट 22 साल से संतान की आस लगाए दंपति को IVF इलाज कराने की अनुमति दे दी है.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 08, 2026, 11:06 PM IST | Updated: Oct 08, 2026, 11:08 PM IST
Image Credit: ZEE CREATIVE
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हर कोई चाहता है कि घर में बच्चों की गूंज सुनाई दे और आंगन किलकारियों से भर जाए. छत्तीसगढ़ में एक दंपति ने शादी के 22 साल बाद भी इन्हीं उम्मीदों को दिल में जिंदा रखा. उन्होंने संतान की चाह में कई बार इलाज कराया. एक बार गर्भ तो ठहरा लेकिन करीब 4 महीने बाद ही गर्भपात हो गया. इसके बाद उन्होंने IVF इलाज कराने के लिए डॉक्टरों से संपर्क किया. लेकिन डॉक्टरों ने पति की उम्र 57 साल होने के चलते उनका इलाज करने से इनकार कर दिया. जबकि पत्नी की उम्र तय सीमा के अंदर ही थी.

दरअसल, यह मामला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के एक दंपति से जुड़ा है. इन दोनों की शादी करीब 22 साल पहले हुई थी. इनमें अब पति की उम्र 57 वर्ष और पत्नी की उम्र 47 साल है. पत्नी की उम्र IVF इलाज के लिए योग्य है. लेकिन पति की उम्र तय सीमा के मुताबिक 2 साल ज्यादा है. इसलिए कानूनी सीमा में अड़चन बनने लगी. जब यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने पत्नी को योग्य मानते हुए ART Act के तहत IVF इलाज कराने की मंजूरी दे दी. कोर्ट ने कहा कि पति की उम्र 55 साल से ज्यादा होने से पत्नी अपने इलाज के अधिकार से वंचित नहीं हो सकती है.

उम्र पर क्या कहा?
इस पर न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कानून में महिला और पुरुष के लिए उम्र की सीमा अलग-अलग दी गई है. इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, कि एक पार्टनर की उम्र सीमा पार होते ही दूसरा अपने आप इलाज के लिए अयोग्य हो जाए. कोर्ट ने कहा कि पति की उम्र को पत्नी के IVF इलाज में पूरी तरह बाधा मानना कानून में ऐसी उम्र सीमा जोड़ने जैसा होगा. जिसका ART Act में उल्लेख नहीं है. कोर्ट ने इस मामले को संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़कर माना कि प्रजनन से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वंत्रता के अधिकार का हिस्सा है.

कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे में उम्र की शर्तों की ऐसी सख्त व्याख्या नहीं की जा सकती है, जिससे एक योग्य महिला सिर्फ अपने पति की उम्र के चलते मां बनने से बंचित हो सके. हालांकि, कोर्ट ने मामले में यह भी साफ कर दिया कि उपचार के दौरानन सभी जरूरी मेडिकल जांच, डॉक्टरों की परामर्श, नैतिक नियम और ART Act से जुड़ी सभी शर्तों का पालन करना जरूरी होगा. इसके बाद हाईकोर्ट ने IVF की अनुमति नहीं देने वाले आदेश को रद्द कर दिया. अधिकारियों और ART क्लिनिक को दंपति का IVF/ART उपचार जारी रखने का निर्देश दिया.

क्या है ART Act ?
ART यानी Assisted Reproductive Technology से जुड़ी सेवाओं और क्लीनिकों के लिए ART Act 2021 बनाया गया है. इसमें IVF, IUI, स्पर्म और एग डोनेशन के साथ एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल के लिए नियम तय किए गए हैं. यह कानून दिसंबर 2021 में संसद से पारित हुआ था. इसके तहत IVF/ART उपचार के लिए महिला की उम्र 21 से 50 साल और पुरुष की उम्र 21 से 55 साल के बीच होनी चाहिए.

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About the Author

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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