भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /छत्तीसगढ़
  • /7 महीने की गर्भवती सरपंच को हटाने की थी तैयारी…फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सुनाया बड़ा फैसला

7 महीने की गर्भवती सरपंच को हटाने की थी तैयारी…फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सुनाया बड़ा फैसला

सक्ती जिले में 7 महीने की गर्भवती सरपंच को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने गर्भावस्था को अहम मानते हुए अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाही पर रोक लगा दी है. इसके अलावा, कोर्ट ने क्या कहा है. आइए आपको विस्तार से बताते हैं.

Written ByManish Kushawah
Published: Oct 06, 2026, 07:26 PM IST|Updated: Oct 06, 2026, 07:29 PM IST
joinshare
7 महीने की गर्भवती सरपंच को हटाने की थी तैयारी…फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सुनाया बड़ा फैसला
Image Credit: ZEE NEWS

About the Author

Manish Kushawah

Manish Kushawah

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

2

अतीक अहमद के अवैध साम्राज्य पर फिर चला पुलिस का डंडा; मदनलाल के नाम दर्ज 30 करोड़ की 14 बेनामी संपत्तियां कुर्क

3

जान से खिलवाड़? घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली 108 एंबुलेंस, मालवाहक में ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर मरीज पहुंचे अस्पताल

4

'गुस्सा और बेबसी महसूस हुई', शिल्पा राव का शो बीच में रोके जाने पर भड़के पति; बोले-हम नहीं भूलेंगे

5

'मौत को छूकर टक से वापस आ गया': UK में तूफान बोएलो का खौफनाक मंजर; प्लेन की ऐसी लैंडिंग देख कांप उठी रूह

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

छत्तीसगढ़ में एक सात महीने की गर्भवती ग्राम पंचायत की निर्वाचित सरपंच को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सरपंच के खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाही पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत के पंचों को सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का कानूनी अधिकार है.

दरअसल, यह मामला सक्ती जिले की सिरियागढ़ ग्राम पंचायत की सरपंच मनीषा राज चौहान का है. सरपंच मनीषा चौहान के खिलाफ पंचायत के नौ पंचों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की थी. यह मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पर रोक लगा दी.

मामला क्या है?
मिली जानकारी के मुताबिक, 17 सितंबर को ग्राम पंचायत के 9 पंचों ने आवेदन दिया था. उन्होंने उसमें कहा कि उनका विश्वास सरपंच मनीषा राज चौहान पर नहीं रहा है. उन्होंने 7 महीने की गर्भवती मनीषा चौहान को सरपंच पद से हटाने की मांग की थी. इसके बाद जब 21 सितंबर को अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने का नोटिस जारी किया गया. यह बैठक 1 अक्टूबर को दोपहर पंचायत भवन में रखी गई थी. लेकिन यह नोटिस सरपंच के पास 24 सितंबर को पहुंचा तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई.

हाईकोर्ट में दायर की याचिका
इसके बाद सरपंच मनीषा राज चौहान ने हाईकोर्ट में अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ एक याचिका दायर की. उनका कहना था कि अविश्वास प्रस्ताव के पीछे जिन बातों का जिक्र किया गया, उसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई. ऐसे में अपने खिलाफ लगे आरोपों के जवाब देना मुश्किल था. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बैठक की तैयारी के लिए स्पष्ट समय भी नहीं मिल पाया. इसके अलावा, उन्होंने कोर्ट को बताया कि वह लगभग 7 महीने की गर्भवती हैं. उन्होंने अपनी गर्भावस्था से जुड़े दस्तावेजों को कोर्ट में पेश किया.

वित्तीय गड़बड़ी का आरोप
इतना ही नहीं पंचों ने सरपंच मनीषा राज चौहान पर चार अलग-अलग मामलों में कुल 12,92,914 रुपये की वित्तीय गड़बड़ी के आरोप भी लगाए थे. पंचों का कहना था कि इन पैसों से जुड़े काम भी पूरे नहीं हुए. इस पर राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया कि संबंधित अधिकारियों ने इन आरोपों की बारीकी से जांच की. इसकी जांच के बाद अविश्वास प्रस्ताव शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार भी बताया.

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड मंगवाने और रिकॉर्ड मिलने से पहले ही नोटिस जारी कर देने से पूरी कार्यवाही अपने आप अवैध नहीं हो जाती. यह भी देखना जरूरी होता है कि क्या किसी अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है. या फिर इससे सरपंच को कोई नुकसान हुआ है. हालांकि, हाईकोर्ट ने सरपंच मनीषा राज चौहान की उस आपत्ति को अहम माना, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जिन दस्तावेजों और सामग्री का इस्तेमाल किया गया, वह उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई.

नोटिस पर कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए सरपंच को उनके खिलाफ इस्तेमाल किए गए दस्तावेज और सामग्री की जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वह आरोपों का सही जवाब दे सकें. कोर्ट ने नोटिस की अवधि पर भी कहा कि सात दिन की गणना नोटिस जारी होने की तारीख से नहीं, बल्कि उसके मिलने की तारीख से की जानी चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने नोटिस को सीधे तौर पर अवैध नहीं माना. संबंधित अधिकारी को सरपंच की आपत्ति पर फैसला करने का निर्देश दिया.

गर्भावस्था को माना अहम
कोर्ट ने सरपंच की 7 महीने की गर्भावस्था को भी अहम माना है. कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है. पंचों को अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार है, लेकिन सरपंच को स्वास्थ्य और अजन्मे बच्चे से समझौता किए बिना अपना पक्ष रखने का उचित मौका मिलना चाहिए. फिलहाल, कोर्ट ने सरपंच मनीषा राज चौहान को बड़ा राहत दी है. लेकिन अविश्वास प्रस्ताव अभी खत्म नहीं हुआ है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
Chhattisgarh News