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बस्तर में घटा कुपोषण का आंकड़ा, 13,700 बच्चे अभी भी शिकार, जानिए जमीनी हकीकत?

छत्तीसगढ़ के बस्तर में कुपोषण को लेकर अभी भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. बीते सालों के मुकाबले कुपोषण की दर में थोड़ी सी कमाई आई है. लेकिन अभी भी लगभग 13,700 से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. आइए जानते हैं, इनके लिए क्या-क्या तैयारियां की गई हैं.

Written By Manish Kushawah
Published: Sep 14, 2026, 07:18 PM IST | Updated: Sep 14, 2026, 07:23 PM IST
Image Credit: ZEE MEDIA
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बस्तर जिले में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई जारी है. बीते वर्षों के मुकाबले कुपोषण की दर में जरूर कमी आई है, लेकिन अब भी बस्तर जिले में 13,700 से अधिक बच्चे कुपोषित हैं. ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर कुपोषण को जड़ से खत्म करने के प्रयास जमीनी स्तर पर क्यों नजर नहीं आते? सर्वाधिक कुपोषित बच्चों की संख्या वाले जिलों में बस्तर भी शामिल है. जिले के 2 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में 81 हजार बच्चे पंजीकृत हैं, इनमें से 13,700 से अधिक बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं.

कुपोषण को लेकर कम वजन, दुबलापन और बौनापन के अलावा अति गंभीर कुपोषित श्रेणी में भी बच्चों की गणना की जाती है. इस मामले में छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है. महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य गठन के दौरान बस्तर में कुपोषण की दर 52 प्रतिशत थी, जबकि मार्च 2024 के आंकड़ों के अनुसार यह 22.43 प्रतिशत थी. वहीं, इस साल यह आंकड़ा घटकर 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है. जिले के बस्तानार, दरभा और बकावंड जैसे ब्लॉकों में कुपोषण बाकी विकासखंडों की तुलना में ज्यादा है.

पहले कितना था कुपोषण 
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज सिन्हा का कहना है कि जब राज्य नया बना था, उस समय बस्तर में कुपोषण की दर 52 प्रतिशत थी. इसके बाद अब यह घटकर 17 प्रतिशत हो गई है. मार्च 2024 में यह दर 22.43 प्रतिशत थी. उन्होंने कहा कि कुपोषण के मामले में काफी अच्छी प्रगति हुई है और विभाग की टीम ने लगातार मेहनत की है. शासन की ओर से इम्यूनाइजेशन, अंडरवेट बच्चों की पहचान, पोषण आहार वितरण और जागरूकता अभियान पर काम किया जा रहा है.

कितनी है कुपोषण की दर
उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए NRC की मदद ली जा रही है. इसके साथ ही डॉक्टरों की मदद से हेल्थ कैंप लगाए जाते हैं और जरूरत के मुताबिक अस्पताल की दवाइयां और विभाग की ओर से उपलब्ध दवाइयां भी दी जाती हैं. अधिकारी के मुताबिक, मार्च 2024 में कुपोषण की दर 22.43 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 17 प्रतिशत रह गई है. विभाग का कहना है कि कुपोषण कम करने के लिए कई स्तरों पर लगातार काम किया जा रहा है.

कुपोषण के कितने कारण?
मनोज सिन्हा ने कहा कि कुपोषण के कई कारण होते हैं और इसमें मेडिकल पहलू भी शामिल हैं. बस्तर में मलेरिया जैसी स्थानीय बीमारी के प्रकोप का असर महिलाओं और बच्चों पर भी पड़ता है. मलेरिया के कारण ब्लड काउंट कम होने से शरीर कमजोर हो सकता है, जिससे कुपोषण की स्थिति भी प्रभावित होती है. ऐसे में मेडिकल हेल्प, इलाज, NRC और हेल्थ कैंप के जरिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. अधिकारी ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ उनकी पूरी टीम मेहनत कर रही है और जितनी जल्दी सफलता मिलेगी, उतना ही उन्हें गर्व महसूस होगा.

(रिपोर्टः अनूप अवस्थी, जगदलपुर)

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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