SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

दिवाली से पहले महंगाई ने निकाला दिवाला, रिटेल के बाद अब थोक ने टेंशन बढ़ाई...क्यों बेकाबू हो रहीं कीमतें ?

Inflation: सिर्फ तेल और गैस सिलेंडर की कीमत नहीं बढ़ती है. बीते 9 महीनों में देश में महंगाई का ग्राफ सबसे हाई पर पहुंच गया है. रिटेल के बाद अब थोक महंगाई दर भी परेशान करने वाला है.

Written By Bavita Jha
Published: Oct 14, 2026, 02:45 PM IST | Updated: Oct 14, 2026, 03:10 PM IST
Join

Inflation: फेस्टिव सीजन में शॉपिंग कैसे करें? पर्स भरकर पैसे ले जाओ तो भी थैला भरकर सामान नहीं आ पाता? सैलरी बढ़ी नहीं, लेकिन महंगाई ने मिडिल क्लास को निचोड़ लिया है...ये दास्ता किसी एक की नहीं बल्कि आज घर-घर का कहानी बन चुकी है. महंगाई का मानो विस्फोट हो चुका है.

आलू, प्याज, टमाटर के साथ खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं. लगातार 11 महीनों से रिटेल महंगाई दर बढ़कर सितंबर में 5.54% पर पहुंच गई है. खुदरा महंगाई दर के बाद अब थोक महंगाई दर के आंकड़े भी परेशान करने वाले आए हैं.  

थोक महंगाई में भी तेजी

सितंबर में थोक महंगाई बढ़कर 11.39% पर पहुंच चुकी है, जो अगस्त में 9.92% थी.  बीते तीन महीने में थोक महंगाई में सबसे बड़ी बढ़त देखने को मिली है. तेल, गैस, पावर, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ी है. थोक महंगाई का आंकड़ा 11.39 फीसदी पहुंचने का मतलब है कि जो सामान पिछले साल 100 रुपये में बिक रही थी, उसकी कीमत इस साल 111.39 रुपये पर पहुंच चुकी है.  

साल 2026 में महंगाई की मार

साल 2026 में रिटेल और थोक दोनों ही महंगाई के आंकड़ों ने परेशान किया है. महीने-दर महीना के हिसाब से देखें तो थोक और रिटेल महंगाई के आंकड़े कुछ इस तरह से है

महीनाथोक महंगाई दररिटेल महंगाई दर
जनवरी    1.8%  2.74%
फरवरी 2.13%3.21%
मार्च      3.88  % 3.40%
अप्रैल      8.26%3.48%
मई      9.68   %3.93
जून 9.87% 4.38%
जुलाई 9.78 % 4.45%
अगस्त9.92 % 4.82%
सितंबर 11.39  % 5.54%

 
क्यों बढ़ रही है महंगाई ? 

खाड़ी युद्ध और होर्मुज का रास्ता बंद होने से तेल सप्लाई अटक गई है.कच्चे तेल का दाम चढ़ता दी जा रहा है और बीते कई महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. तेल की बढ़ती महंगाई माल ढुलाई की लागत बढ़ाती है, परिवहन महंगा होने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती है, कंपनियों की लागत बढ़ने लगती है,ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ जाता है, मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ती है और महंगाई का ग्राफ चढ़ने लगता है.  इसके अलावा देश में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा पड़ रहा है. अलनीनो का असर खाद्य महंगाई को बढ़ा रहा है.  

रिटेल और थोक महंगाई दर में क्या अंतर है ?  

भारत में दो तरह की महंगाई होती है. रिटेल और थोक महंगाई. रिटेल का सीधा जुड़ाव आम लोगों से होता है. जबकि थोक महंगाई दर वो कीमत होती है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी को सामान बेचने के लिए वसूलता है.

पहले खुदरा महंगाई दर को समझते हैं. ये आपके रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली वस्तुओं और सर्विसेस की कीमतों में तेजी या गिरावट को बताता है. रिटेल महंगाई दर में खाना, कपड़े, ईंधन, घर, ईलाज  आदि को शामिल किया जाता है.

रिटेल महंगाई दर क्यों जरूरी है?  

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रिटेल महंगाई दर के आधार पर अपने रेपो रेट की दर को तय करता है. 
सरकार भी बजट, सब्सिडी और अपनी आर्थिक नीतियों को रिटेल महंगाई दर को ध्यान में रखकर तय करती है. 
सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते, पेंशन आदि में बदलाव भी इसी को ध्यान में रखकर किया जाता है.  
रिटेल महंगाई दर देश की अर्थव्यवस्था की सेहत को बताता है.  

थोक महंगाई का असर

थोक महंगाई का कनेक्शन थोक बाजार से है, लेकिन ये धीरे-धीरे आम लोगों पर असर डालता है. अगर ये महंगाई ज्यादा दिनों तक हाई पर बनी रहती है, तो प्रोड्यूसर इसका बोझ आम ग्राहकों पर डालना शुरू कर देता है.  महंगाई की ये दर सिर्फ आंकड़े नहीं है, बल्कि आपकी जेब की हालत बयां करते हैं. कम महंगाई में लोगों की खरीदारी क्षमता बढ़ती है. महंगाई बढ़ने पर लोग शॉपिंग करने से बचते हैं, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.


 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES