गोल्ड के मुकाबले तीन गुना तेजी से क्यों गिर रही है चांदी? धनतेरस पर खरीदारी करने वालों के लिए क्या है संकेत
इस महीने चांदी की कीमत में 11.8% की गिरावट आई है, जबकि सोने की कीमत 4.2% फिसली है. महंगा कच्चा तेल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और औद्योगिक मांग पर चांदी की निर्भरता, दोनों की कीमतों में गिरावट के इस अंतर की प्रमुख वजहें हैं.
Gold-Silver Price : देश में त्योहारी सीजन चल रहा है. दिवाली आने वाली है. ऐसे में लोग सोना-चांदी खरीदते हैं. इस साल धनतेरस 6 नवंबर यानी शुक्रवार को है और भारतीय घरों में लोग एक बार फिर सोना-चांदी खरीदने निकलेंगे. इस साल, इन दोनों धातुओं की स्थिति काफी अलग है. जनवरी के अपने रिकॉर्ड स्तर से डॉलर के हिसाब से चांदी की कीमत लगभग आधी से भी कम हो गई है. भारत में पिछले हफ्ते इसकी कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गई है. सोने की कीमत में भी गिरावट आई है. आइए जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण हैं.
क्या कहते हैं आंकड़े?
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के क्लोजिंग रेट्स के मुताबिक, सोमवार, 26 अक्टूबर को चांदी 999 की कीमत 1,94,479 रुपये प्रति किलोग्राम रही. यह 30 सितंबर के 2,20,435 रुपये के क्लोजिंग रेट से 11.8% कम है. इसी दौरान, सोना 999 की कीमत 1,47,888 रुपये से 4.2% गिरकर 1,41,710 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है. आसान शब्दों में कहें तो इस महीने सोने के मुकाबले चांदी की कीमत में लगभग तीन गुना ज्यादा गिरावट आई है.
इसी अवधि में गोल्ड 999 की कीमत 4.2% गिरकर 1,47,888 रुपये से 1,41,710 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं हैं. इस महीने चांदी में सोने के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा गिरावट आई है.
अक्टूबर में चांदी बनाम सोना
22 अक्टूबर को चांदी में 3.4% की गिरावट आई, जबकि सोने में लगभग 1% की कमी देखी गई थी. इस साल पहली बार चांदी की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गई है.
दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट क्यों आ रही है?
इसकी शुरुआत तेल से होती है. मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. ये एक साल पहले की तुलना में लगभग 80% अधिक है. ईंधन महंगा होने के कारण दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कीमतें बढ़ रही हैं.
ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने 14 अक्टूबर को बताया था कि अमेरिका में उपभोक्ता महंगाई दर अगस्त के 3.4% से बढ़कर सितंबर में 3.7% हो गई है. इस महीने गैसोलीन की कीमतों में 9.1% का उछाल आया, ये कुल महंगाई वृद्धि में आधे से अधिक का कारण बना.
इस वजह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख सख्त हो गया है. 16 सितंबर को फेड ने अपनी पॉलिसी दरों में 0.25% (एक चौथाई अंक) की बढ़ोतरी करके उन्हें 3.75–4% कर दिया, क्योंकि महंगाई दर अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. फेड के कैलेंडर के मुताबिक, उनका अगला फैसला 27-28 अक्टूबर को होने वाली दो दिवसीय बैठक के अंत में आएगा.
महंगाई के आंकड़े आने के बाद, CME ग्रुप के 'फेडवॉच' टूल ने इस हफ्ते होने वाली बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को 53.7% बताया, ये आंकड़े जारी होने से पहले लगभग 22% थी.
ब्याज दरें बढ़ने से दोनों धातुओं को नुकसान होता है, क्योंकि इनमें से किसी पर भी ब्याज नहीं मिलता है. जब अमेरिकी सरकार के सुरक्षित बॉन्ड पर अधिक रिटर्न मिलता है, तो सोना-चांदी अपने पास रखने की 'लागत' बढ़ जाती है, क्योंकि निवेशक को मिलने वाली संभावित कमाई का नुकसान होता है.
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अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार यानी 27 अक्टूबर को 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5% पर थी. इसके अलावा, डॉलर के मजबूत होने से भी दबाव बढ़ता है, क्योंकि इससे डॉलर में कीमत तय होने वाली धातुएं बाकी सभी के लिए और महंगी हो जाती हैं.
चांदी में ज्यादा बड़ी गिरावट क्यों आ रही है?
सोने और चांदी, दोनों पर ही ब्याज दरों का दबाव है, लेकिन तीन ऐसी वजहें हैं जिनकी वजह से चांदी को ज्यादा बड़ा झटका लग रहा है. चांदी का आधा इस्तेमाल औद्योगिक धातु के तौर पर होता है. 'सिल्वर इंस्टीट्यूट' के 'वर्ल्ड सिल्वर सर्वे 2026' के मुताबिक, 2025 में उद्योगों ने 657.4 मिलियन औंस चांदी का इस्तेमाल किया है.
जब ऊंची ब्याज दरों की वजह से औद्योगिक मांग पर असर पड़ता है, तो चांदी को दोहरा नुकसान होता है. एक कीमती धातु के रूप में भी और एक औद्योगिक कच्चे माल के रूप में भी.
सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां लागत कम करने के लिए हर पैनल में चांदी का इस्तेमाल घटा रही हैं. इस प्रक्रिया को इंडस्ट्री की भाषा में 'थ्रिफ्टिंग' (thrifting) कहा जाता है. 'सिल्वर इंस्टीट्यूट' का अनुमान है कि इस साल औद्योगिक मांग में 3% की गिरावट आएगी. इसका मुख्य कारण सोलर सेक्टर से चांदी की मांग में कमी आना है. पहले इसमें तेजी ज्यादा आई थी. इसलिए अब गिरावट भी ज्यादा आ रही है.
सोने की तुलना में चांदी का बाजार छोटा है और इसमें उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) ज्यादा होता है. 'सिल्वर इंस्टीट्यूट' के मुताबिक, 29 जनवरी 2026 को चांदी की कीमत 121 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. अब ये 54 डॉलर के आस-पास कारोबार कर रही है. ये अपने उच्चतम स्तर से लगभग 56% कम है. वहीं, सोना अभी करीब 4,025 डॉलर पर है, जो अपने 5,608 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 28% नीचे है.
सोने के पास सुरक्षा कवच
सोने के पास एक ऐसा सुरक्षा कवच है जो चांदी के पास नहीं है. दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (सेंट्रल बैंक) अपने भंडार में सोना रखते हैं. इससे बाजार में भारी बिकवाली के दौरान भी सोने के लिए एक पक्का खरीदार मौजूद रहता है. चांदी के मामले में ऐसा कोई खरीदार नहीं होता.
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इस बढ़ते अंतर को 'गोल्ड-सिल्वर रेशियो' (सोने-चांदी के अनुपात) से समझा जा सकता है. ये अनुपात बताता है कि एक निश्चित वजन के सोने की कीमत के बराबर मूल्य की चांदी कितनी होगी. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, ये अनुपात 30 सितंबर को 67.1 था, जो 26 अक्टूबर को बढ़कर 72.9 हो गया. इस अनुपात के बढ़ने का मतलब है कि सोने के मुकाबले चांदी सस्ती हो गई है.
धनतेरस पर खरीदारी करने वालों के लिए इसका क्या मतलब है?
त्योहार से पहले एक बड़ी परीक्षा होने वाली है. बुधवार को अमेरिकी समयानुसार दोपहर 2 बजे (भारत में रात 11:30 बजे) अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपना फैसला सुनाएगा. ब्याज दरों में बढ़ोतरी या आगे और बढ़ोतरी के संकेत मिलने पर सोने की तुलना में चांदी पर ज्यादा बुरा असर पड़ सकता है. वहीं, अगर दरों में कोई बदलाव न हो और नरम रुख अपनाया जाए, तो इससे थोड़ी राहत मिल सकती है.
खरीदारों के लिए स्थिति साफ है. जनवरी के मुकाबले चांदी अभी काफी सस्ती है. इसलिए तय त्योहारी बजट में पहले से अधिक चांदी खरीदी जा सकती है. लेकिन, चांदी में उतार-चढ़ाव भी बहुत ज्यादा होता है और मौजूदा आंकड़ों से ऐसा कहीं नहीं लगता कि कीमतों में गिरावट का दौर खत्म हो गया है.
जो लोग परंपरा के तौर पर चांदी (जैसे सिक्के या बर्तन) खरीद रहे हैं. उन्हें शायद आने वाले कुछ हफ्तों में कीमतों में होने वाले बदलावों से ज्यादा फर्क न पड़े. लेकिन, जो लोग इसे निवेश के तौर पर खरीद रहे हैं. उनके सामने एक अलग सवाल है. क्या वे कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव के दौरान भी अपनी चांदी को अपने पास बनाए रख पाएंगे? कुछ खरीदार इस जोखिम को कम करने के लिए एक ही दिन में सारी खरीदारी करने के बजाय कई हफ्तों में थोड़ा-थोड़ा करके चांदी खरीदते हैं.