SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

इसमें तेरा घाटा, अपना थोड़ा जाता: अगर नहीं हुई भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील, तो किसे ज्यादा नुकसान?

US-India Trade: अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील फंसती दिख रही है. अगर ये डील नहीं हुई, तो किसे सबसे ज्यादा नुकसान होगा ? कैसे ट्रंप अपनी मनमानी से अमेरिका का नुकसान करवा बैठेंगे ?

Written By Bavita Jha
Published: Oct 12, 2026, 11:21 AM IST | Updated: Oct 12, 2026, 11:34 AM IST
Join

India US TRADE Deal: भारत अमेरिका ट्रेड डील अटकती दिख रही है. दोनों देशों के बीच ट्रेड डील का खाका फरवरी 2026 में तैयार हो गया था, लेकिन आज तक ये डील अपने फाइनल स्टेज में नहीं पहुंच सकी है. अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कह रही हैं कि समझौता ठहराव की स्थिति में पहुंच चुका है, जहां बहुत अधिक गुंजाइश नहीं बची है.  दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर की टिप्पणी है कि कोई डील 'जल्द होने वाली' नहीं है. अब सवाल है कि क्या ये डील हो पाएंगी ? अगर नहीं हुई, तो किसका नुकसान ज्यादा है ?  


क्यों अटक गई भारत अमेरिका की डील

भारत और अमेरिका के बीच डील अटकने की सबसे बड़ी वजह है कि अमेरिका डील में अपने लिए फायदे तलाश रहा है. ट्रंप रूसी तेल की खरीद से लेकर टैरिफ, 500 अरब डॉलर की अमेरिका से खरीदारी और कृषि क्षेत्र में एंट्री चाहते हैं, जिसके लिए भारत कभी नहीं तैयार होगा. भारत साफ कह चुका है कि वो सिर्फ वहीं डील करेगा, जिसमें उसके किसानों और पशुपालकों के हित हो.


अगर ट्रेड डील नहीं हुई तो क्या होगा ?  

अगर भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील नहीं हुई, तो दोनों देशों के बीच व्यापार में बाधा आ सकती है. अमेरिका फिर से भारतीय निर्यात पर टैरिफ लगा सकता है. भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराने लगेगा, जिसका असर आखिरी में देश की अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है.

भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दबाव में है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से अगस्त के बीच भारत ने अमेरिका को करीब 42.79 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया, जो पिछले साल 40.39 अरब डॉलर के करीब था. आंकड़े बताते हैं कि भारत का अमेरिका के लिए एक्सपोर्ट मजबूत हुआ है. अगर ये डील नहीं हुई , तो इस एक्सपोर्ट पर खतरा मंडराने लगेगा.  टैरिफ बढ़ता है, तो भारतीय सामान की कीमत अमेरिकी बाजार में बढ़ जाएगी.  

भारतीय रुपये पर दबाव

अगर ट्रेड डील में इसी तरह से देरी होती रही, तो रुपये पर प्रेशर बढ़ता चला जाएगा. एक्सपोर्ट पर दबाव का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है. वित्त वर्ष 2025-26 के मुताबिक भारत का अमेरिका के साथ करीब 34 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस था, अगर ये ट्रेड डील अटकी, तो अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगा सकता है. बढ़या टैरिफ भारतीय एक्सपोर्ट्स की मुश्किल बढ़ाएगा. कंपनियां का गिरता एक्सपोर्ट भारतीय खजाने में विदेशी मुद्रा की आमद कम करेगी, जिसके रुपये पर दबाव बढ़ता चला जाएगा.

भारत की तैयारी

भारत ने बीते कुछ सालों नें 9 से ज्यादा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किए हैं, यूरोपीय यूनियन के साथ 'मदर ऑफ ऑल डील' पूरा किया है. कनाडा, ब्रिटेन जैसे करीब 38 से ज्यादा देश भारत के साथ फ्री ट्रेड कर रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए अमेरिका का विकल्प तैयार करना बहुत बड़ी चुनौती नहीं होगी. 

ट्रेड डील नहीं हुई, तो अमेरिका को कितना नुकसान  

ऐसा नहीं है कि सिर्फ नुकसान भारत का है. अगर दोनों देशों के बीच ये ट्रेड अटकी, तो अमेरिका को भी बड़ा घाटा होने वाला है. अमेरिका पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है. अमेरिका में अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 3.4% पर पहुंच चुका है. भारत से डील नहीं होने पर ये और बढ़ेगी. भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ा, तो अमेरिकी बाजारों में भारतीय सामान और महंगे हो जाएगा.  भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स जैसे सामान अमेरिकियों के लिए महंगे हो जाएंगे. भारत की जेनरिक दवाओं की अमेरिका में भारी डिमांड है.

सिर्फ इतना ही नहीं अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारतीय बाजार की उपलब्धता घट जाएगी. भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था और 140 करोड़ की आबादी वाला विशाल बाजार है, जिससे दूर होना अमेरिका को झटका दे सकता है.  

ट्रंप खुद अपना नुकसान करवाएंगे

अमेरिका भारत के साथ अपना व्यापार घाटा कम करना चाहता है. वित्त वर्ष 2026 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 140.79 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें ट्रेड सरप्लस भारत के पक्ष में करीब 38.82 अरब डॉलर के करीब है. अमेरिका इसे ही कम करना चाहता है, लेकिन अगर ये डील नहीं हुई, तो ये ट्रेड सरप्लस कम करना ट्रंप के लिए चुनौती होगी . 

 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES