क्या है 'ग्राहम एक्ट'? अगर ट्रंप छूट नहीं देते तो भारत को कितने लाख करोड़ का नुकसान होता
ग्राहम एक्ट को लागू किये जाने से एक दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ऐसा आदेश दिया गया, जिससे भारत और चीन दोनों ने बड़ी राहत महसूस की है. इस एक्ट के तहत भारतीय निर्यात पर 100 फीसदी तक का टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया था. आइए जानते हैं विस्तार से-
भारत अपनी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में रूस से तेल का आयात करता है. रूस से क्रूड लेने वाले देशों से अमेरिकी राष्ट्रपति की नाराजगी जग जाहिर है. उनका कहना है कि रूस से तेल का आयात बढ़ाने वाले देश यूक्रेन के खिलाफ जंग में उसकी मदद कर रहे हैं. रूस से तेल का इम्पोर्ट करने पर ट्रंप ने पिछले दिनों कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने का भी ऐलान कियाा. हद तो तब हो गई जब सितंबर में अमेरिकी संसद ने ग्राहम एक्ट को मंजूरी दे दी. इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों के आयात पर 100% तक का टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान था.
अमेरिकी कानून का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ ही रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खोलना था. लेकिन शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से लिये गए फैसले के बाद इस कानून को वापस ले लिया गया है. यानी अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों के निर्यात पर 100 फीसदी तक का टैरिफ नहीं लगाया जाएगा. ट्रंप के इस फैसले से भारत समेत कई देशों को राहत मिलेगी.
दरअसल, अमेरिका में यदि कोई भारतीय कंपनी कपड़े, दवाएं, मोबाइल पुर्जे या रत्न-आभूषण आदि की बिक्री करती है तो उसके लिए अमेरिका महज एक विदेशी बाजार नहीं, बल्कि इनकम का बड़ा जरिया है. इसी सामान की बिक्री करके भारतीय कंपनियां अमेरिका से करोड़ों डॉलर का मुनाफा कमाती हैं. लेकिन यदि उस पर 100% तक का टैरिफ लगाने का रास्ता खुल जाए तो क्या होगा? इसका असर यह होगा कि अमेरिका में बेचा जाने वाला सामान महंगा होगा और ऑर्डर घट सकते हैं. इसका सीधा असर यह होगा कि कंपनियों के प्रॉफिट पर इसका असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-
क्या है ग्राहम एक्ट?
ग्राहम एक्ट का नाम अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ओ ग्राहम के नाम पर रखा गया. इसका पूरा नाम Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 है. इस अमेरिकी कानून का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ ही रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई करना था. अमेरिकी कांग्रेस के सीनेट ने 7 अगस्त 2026 को इसे मंजूरी दी. इसके बाद प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को इसे पारित किया. डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को इस पर साइन कर दिये. 30 दिन के अंदर इसे लागू करने के लिए 30 दिन की मियाद रखी थी. अमेरिका का तर्क रहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव डालकर रूस की कमाई पर असर डाला जा सकता है. यही कारण है कि ट्रंप ने कुछ निर्धारित परिस्थितियों में रूस से तेल या गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने को मंजूरी दे दी.
ग्राहम एक्ट के तहत भारत पर 100% टैरिफ लगा?
नहीं. इस कानून में रूस से तेल आयात करने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ का मतलब यह नहीं था कि भारत के हर प्रोडक्ट पर 100% टैरिफ लग जाता. उदाहरण के तौर पर यदि किसी भारतीय कंपनी का सामान अमेरिका में 100 डॉलर का बिकता और उस पर 100% टैरिफ लगाया जाता तो आयात शुल्क के 100 डॉलर और जुड़ सकते थे. दूसरे खर्चों को छोड़कर आयात की लागत 200 डॉलर हो सकती है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बाजार में सामान की अंतिम कीमत ठीक दोगुनी हो जाती. लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि टैरिफ का बोझ अमेरिकी आयातक, भारतीय निर्यातक और खरीदार में कौन कितना उठाता है.
भारत और अमेरिका के बीच कितना कारोबार?
भारत के लिए अमेरिका सबसे अहम एक्सपोर्ट मार्केट में से एक है. भारतीय कंपनियों की तरफ से अमेरिकी बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाओं, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट, कपड़े, जेम्स-ज्वैलरी और पेट्रोलियम प्रोडक्ट का निर्यात किया जाता है. फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत की तरफ से अमेरिका को किया जाना वाला निर्यात 87.31 अरब डॉलर (करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये) का रहा. अगर अमेरिका की तरफ से ग्राहम एक्ट को लागू कर दिया जाता तो भारतीय कंपनियों को इस कारोबार में नुकसान जरूरी होता.
छूट नहीं मिलने पर भारत को कितना नुकसान होता?
यदि अमेरिका की तरफ से ग्राहम एक्ट के तहत 100% टैरिफ को लागू कर दिया जाता तो भारतीय एक्सपोर्ट पर बड़ा असर पड़ सकता था. यदि भारतीय प्रोडक्ट पर 100% टैरिफ लगता तो अमेरिका में भारतीय सामान महंगा हो जाता. इससे अमेरिकी खरीदार भारतीय कंपनियों से सामान खरीदना कम कर देते. इसका नुकसान सीधे तौर पर निर्यातकों को होता, जो कि लाखों करोड़ किा हो सकता था. दूसरा यह कि भारत अपनी जरूरत का कारीब 35%-40% क्रूड ऑयल रूस से सस्ते दाम पर खरीदता है. यदि अमेरिका के दबाव से भारत को रूसी तेल से दूरी बनानी पड़ती तो भारत को खाड़ी देशों या अमेरिका से महंगा क्रूड ऑयल खरीदना पड़ता. जानकारों का कहना है, सस्ता रूसी तेल नहीं मिलने पर भारत के आयात बिल में सालाना 20 से 25 बिलियन डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये ) की बढ़ोतरी हो सकती थी.
इन सेक्टर पर पड़ता सबसे ज्यादा असर!
- टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट
- दवाएं और फार्मास्युटिकल्स
- जेम्स एंड ज्वैलरी
- ऑटो पार्ट और इंजीनियरिंग प्रोडक्ट
ट्रंप के हालिया आदेश से क्या बदलेगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अक्टूबर को एक एग्जक्यूटिव ऑर्डर जारी किया, जिसे 17 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया. इस आदेश में ट्रंप ने ग्राहम एक्ट के तहत तय 100% तक के टैरिफ से फिलहाल छूट देने का फैसला किया है. आदेश में इस छूट को अमेरिका के हित में बताया गया है. इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि ग्राहम एक्ट के तहत टैरिफ लगाने की शक्ति होने के बावजूद ट्रंप ने फिलहाल टैरिफ को लागू करने से राहत दी है.