500 अरब डॉलर या रूसी तेल ? भारत के साथ ट्रेड के लिए कौन-सा रास्ता चुनेंगे ट्रंप? रिपोर्ट का इशारा समझिए
US-India Trade Deal: अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील में रूसी तेल एक बड़ा फैक्टर बना हुआ है. अब रिपोर्ट आई है कि अगर ट्रंप रूसी तेल को टैरिफ से बाहर रखने है, तो इसका फायदा भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड पर होगा.
India-US Trade: अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील अटकी हुई है. कई दौर की बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक डील फाइनल स्टेज तक नहीं पहुंच पाई है. इस डील के बीच रूसी तेल एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर टैरिफ भी लगाया है. हालांकि फिलहाल रूस और अमेरिका के बीच डीजल डील के चलते रूस के तेल निर्यात पर अस्थायी छूट दी गई है. अब रिपोर्ट आई है कि अगर रूसी तेल पर अमेरिका टैरिफ में छूट जारी रखता है, तो इसका फायदा भारत-अमेरिका ट्रेड को मिलेगा.
रूसी तेल का भारत-अमेरिका ट्रेड पर असर
अमेरिका के रूस से जुड़े टैरिफ और प्रतिबंधों पर मिली छूट से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. इससे दोनों देशों के बीच कारोबारी विश्वास बहाल होगा और द्विपक्षीय व्यापार को गति देने में मदद मिलेगी. टाइम्स कुवैत की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल ही में साइन किए गए कार्यकारी आदेश से द्विपक्षीय व्यापार को गति मिल सकती है. दोनों देशों के बीच रोजगार को समर्थन मिल सकता है. साल 2030 तक भारत-अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है.
100 फीसदी टैरिफ का खतरा कम
ट्रंप के इस आदेश से रूस से ऊर्जा खरीद से जुड़े भारतीय निर्यात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का तत्काल खतरा कम हुआ है, जिससे कारोबारियों के बीच अनिश्चितता घटी है. इससे कंपनियों को शिपमेंट की योजना बनाने, अनुबंधों पर बातचीत करने और अधिक विश्वास के साथ निवेश संबंधी फैसले लेने की बेहतर गुंजाइश मिलेगी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी आयातक अब भारतीय कंपनियों से खरीद के विकल्पों का आकलन पहले जैसी तत्काल चिंता के बिना कर सकते हैं. इससे दोनों देशों के कारोबारियों को लगातार बदलती नीतिगत अनिश्चितताओं से निपटने के बजाय व्यावसायिक अवसरों के विस्तार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी.
चुनौती पूरी तरह से खत्म नहीं
इस छूट से टैरिफ से जुड़ी हर चुनौती खत्म नहीं होती, लेकिन इससे व्यापारिक तनाव और बढ़ने का जोखिम कम होता है. साथ ही, भारत के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजारों में से एक में व्यापार की गति फिर से बढ़ाने का अवसर मिलता है. अमेरिका भारत के वस्तुओं के निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है . जिसमें विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि शामिल है.
भारत-अमेरिका के बीच कितना बड़ा व्यापार
वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका को भारत का वस्तुओं का निर्यात लगभग 86.5 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 87.3 अरब डॉलर हो गया. इस दौरान टैरिफ संबंधी उपायों के बावजूद निर्यात में लगभग 0.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. सितंबर 2026 में अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़कर 8.02 अरब डॉलर हो गया, जो सितंबर 2025 के 5.42 अरब डॉलर के मुकाबले 48 प्रतिशत अधिक है.
इनपुट-आईएएनएस