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सुपर रैली के बाद क्रैश हुआ अमेरिकी बाजार, Nasdaq में गिरावट के 3 बड़े कारण; भारतीय मार्केट पर क्या होगा असर?

यदि आप भी ऐसा सोच रहे थे कि अमेरिकी शेयर बाजार में बंपर रैली जारी रहने वाली है. गुरुवार का दिन वॉल स्ट्रीट के निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा. एक दिन पहले मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद बाजार में खुशी का माहौल था. लेकिन अब यही बाजार धड़ाम हो गया.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Nov 06, 2026, 08:42 AM IST | Updated: Nov 06, 2026, 08:51 AM IST
Image Credit: (File Pic) साल 2020 की कोरोना महामारी के बाद Nasdaq में कल सबसे बड़ी गिरावट देखी गई.
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अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप को झटका लगा तो यूएस शेयर मार्केट में जबरदस्त रैली देखी गई. इस रैली को देखकर यदि आप यह सोच रहे थे कि यह लंबे समय तक चलने वाली है तो संभल जाइए. वॉल स्ट्रीट के निवेशकों के लिए गुरुवार का दिन किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ. एक ही दिन पहले मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद जिस बाजार में ढोल-नगाड़े बजाकर स्वागत हो रहा था, वहीं बाजार अचानक भर-भराकर गिर गया. एक ही दिन में टेक हैवी नैस्डैक कम्पोजिट  5 प्रतिशत से भी ज्यादा टूटकर 24,315 अंक पर पहुंच गया. इसके अलावा S&P 500 में 4 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई और डाउ जोंस भी टूट गया. कारोबारी सत्र के दौरान एक समय तो नैस्डैक 6.4 फीसदी तक गिर गया था. साल 2020 की कोरोना महामारी के बाद Nasdaq में आई यह सबसे बड़ी गिरावट है.

अमेरिकी शेयर बाजार में देखी जा रही इस बड़ी गिरावट से निवेशकों के 2.5 ट्रिलियन डॉलर खाक (2.35 लाख करोड़ रुपये) हो गए. कारोबारी सत्र के अंत में Nasdaq 5.54 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ. अमेरिकी बाजार में गिरावट का असर ग्लोबल मार्केट पर भी देखा गया. साउथ कोरिया का बाजार खुलने के तुरंत बाद 9 फीसदी गिर गया और कोस्पी इंडेक्स पर 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी. भारतीय शेयर बाजार का संकेत देने वाले गिफ्ट निफ्टी में भी गिरावट देखी जा रही है. लेकिन वॉल स्ट्रीट पर आई इस गिरावट को देखकर यह सवाल किया जा रहा है कि दो दिन पहले जिस रैली को देखकर लोग खुशी से झूम रहे थे, वो अचानक लाल निशान में क्यों ट्रेड कर रहा है? आइए जानते हैं वो 3 कारण, जिनकी वजह से मार्केट का पूरा सीन पलट गया.

सेमीकंडक्टर और चिप स्टॉक्स में बड़ी गिरावट

अमेरिकी शेयर बाजार में देखी जा रही गिरावट का विलेन कोई और नहीं बल्कि सेमीकंडक्शन सेक्टर यानी चिप बनाने वाली कंपनियां रहीं. पिछले काफी दिनों से एआई (AI) और डेटा सेंटर्स की तेजी के दम पर ऊपर की तरफ से भाग रहे इन शेयरों को गुरुवार को तगड़ा झटका लगा. बिकवाली इतनी ज्यादा रही कि लगातार दूसरे दिन प्रोसेसर और इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयर भी धड़ाम हो गए. आंकड़ों पर गौर करें तो AMD का शेयर करीब 11% टूट गया. वहीं SK Hynix में 8%, Micron Technology में 6.5% और Intel में 6% की भारी गिरावट देखने को मिली. निवेशकों की पसंदीदा कंपनियां Broadcom और Nvidia भी इस सुनामी में खुद को नहीं बचा पाईं और उनके शेयर भी 5 प्रतिशत तक टूट गए. इसके पीछे अहम कारण यूएस मिडटर्म इलेक्शन रहे. चुनावों में डेमोक्रेट्स को उन राज्यों में बहुमत मिल गया जहां बड़े AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का विरोध किया जा रहा था. ऐसे में निवेशकों को डर है कि नई सरकार में डेटा सेंटर के एक्सपेंशन को लेकर कड़े नियम जारी कर सकती है.

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सुपर रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग पर फोकस

अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट की दूसरी सबसे बड़ी वजह रही प्रॉफिट बुकिंग. बुधवार को मिडटर्म चुनाव के नतीजों के तुरंत बाद अमेरिकी बाजारों ने एक ऐतिहासिक उछाल देखा था. डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नतीजों को स्वीकार किए जाने से बाजार में खुशी की लहर दौड़ गई थी. बुधवार सुबह बेल बजते ही डाव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1,000 अंक से ज्यादा की ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली थी. गुरुवार को जैसे ही बाजार हरे निशान में खुला तो ट्रेडर्स और निवेशकों ने तुरंत मुनाफा वसूलना शुरू कर दी. जिन निवेशकों ने पिछले कुछ हफ्तों में निचले लेवल पर खरीदारी की थी, उन्होंने एक दिन की रिकॉर्ड तेजी के बाद अपना प्रॉफिट लॉक करना सही समझा.

कच्चे तेल में फिर से उबाल

अमेरिकी बाजार में गिरावट तीसरा कारण इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम अचानक बाउंस बैक होना रहा. बुधवार को क्रूड ऑयल के दाम में 9% की भारी गिरावट आई थी. इससे निवेशकों को लगा कि महंगाई का भूत अब शांत हो जाएगा. मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में तेल टैंकरों पर हुए ड्रोन हमलों ने क्रूड ऑयल में फिर से आग लगा दी. ब्रेंट क्रूड दिन के कारोबार के दौरान 3% से ज्यादा उछलकर 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा सा मतलब है कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ना, ट्रांसपोर्टेशन महंगा होना और महंगाई का फिर से ऊपर जाना. यदि महंगाई बढ़ेगी तो फेड रिजर्व ब्याज दरें घटानी मुश्किल हो जाएंगी. ब्याज दर ऊंची रहने का डर हमेशा शेयर बाजार के लिए बड़ा खतरा रहा है.

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भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिका के वॉल स्ट्रीट में होने वाली हलचल का असर दुनियाभर के बाजार पर देखा जाता है. Nasdaq और S&P 500 में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी देखा जा रहा है. भारतीय शेयर बाजार के Sensex और निफ्टी में गिरावट देखने को मिलने की उम्मीद है. भारतीय आईटी सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखने को मिल सकती है. दरअसल, भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा अमेरिकी टेक कंपनियों और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही आता है. ऐसे में भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए यही सलाह है कि फिलहाल जल्दबाजी में किसी तरह का बड़ा दांव नहीं लगाएं.

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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