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Xi Jinping US Visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका दौरे पर पहुंचे हैं. व्हाइट हाउस के बंद कमरे में दो ताकतवर नेताओं के बीच आज होने वाली मीटिंग पर दुनियाभर की निगाहें टिकी है. शी के इस दौरे के लिए अमेरिका कितना बेताब था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रोटोकॉल तोड़ते हुए चीनी राष्ट्रपति को रिसीव करने खुद एयरपोर्ट पहुंच गए. शी के स्वागत में 100 फीट लंबा रेड कार्पेट बिछाया गया, 21 तोपों की सलामी भी दी गई, B-1 बॉम्बर विमानों ने फ्लाईपास्ट कर सलामी दी. ये सिर्फ स्वागत नहीं, बल्कि दो महाशक्तियों के बीच होने वाली मीटिंग की गंभीरता को दिखाता है. शी जिनपिंग के अमेरिकी जमीं पर पैर रखने ही ट्रंप की ओर से बड़ा ऐलान या यूं कहें कि शी जिनपिंग को लुभाने की कोशिश भी हुई.
व्हाइट हाउस में मीटिंग से पहले ठंडी हो रही ट्रेड वॉर की आग
इधर शी जिनपिंग अमेरिका पहुंचे, उधर अमेरिका-चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर की आग ठंडी होने लगी. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ऐलान किया कि अमेरिका-चीन के बीच मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम 10 जनवरी 2027 तक के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है. 10 नवंबर को दोनों के बीच ये डील खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसे अगले 2 महीनों के लिए बढ़ा दिया गया है.
21 तोपों की सलामी के साथ ट्रेड वॉर पर तोहफे का ऐलान
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले साल दक्षिण कोरिया में हुई बैठक के दौरान ट्रेड वॉर पर युद्धविराम का समझौता हुआ था, जिसकी डेडलाइन नवंबर 2026 में खत्म हो रही थी. इस समझौते के तहत अमेरिका ने चीनी सामानों पर टैरिफ को 145% से घटाकर 30% कर दिया था, जबकि चीन ने अमेरिकी सामानों पर लेवी 125% से घटाकर 10% कर दिया था. शी जिनपिंग और ट्रंप के बीच व्हाइट हाउस में होने वाली क्लोज मीटिंग में इस पर स्थायी समाधान निकालने की कोशिश होगी.
अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड और टैरिफ की टशन
अमेरिका जानता है कि उसे चीन से बराबर टक्कर मिलती रही है. ट्रंप टैरिफ लगाते हैं और शी जिनपिंग रेयर अर्थ की सप्लाई रोककर अमेरिका की अर्थव्यवस्था को हिलाने लगते हैं. चीन की बराबरी वाली टक्कर के बाद ट्रंप को हर बार झुकना पड़ा है.

शी जिनपिंग के आगे ट्रंप क्यों दिख रहे हैं कमजोर
इस बार ट्रंप और बैकफुट पर हैं, क्योंकि ईरान युद्ध और ग्लोबल ऑयल प्राइस में तेजी की वजह से अमेरिका में महंगाई अनुमान (2%) से ज्यादा 3.4% बढ़ रही है. ट्रंप बार-बार खाड़ी युद्ध से निकलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान उन्हें निकलने वहीं दे रहा है. ऐसे में ट्रंप चीन की मदद से इस युद्ध से बाहर आने की कोशिश करेंगे. चीन ताइवान के साथ ईरान वाली डील कर सकता है. शी जिनपिंग की कोशिश होगी कि वो अमेरिका को ताइवान से दूर रखें.
विरोधी, लेकिन पक्के व्यापारी
अमेरिका फिलहाल चीन से टकराने के बजाए डील के फेवर में है. भले ही रूस-ईरान से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का बिल पास हुआ हो, लेकिन ट्रंप ये गलती नहीं करेंगे. अगर उन्होंने चीन पर ये टैरिफ लगाया, तो अमेरिकी बाजारों में चीनी सामान और महंगा हो जाएगा, जो इन्फ्लेशन के ग्राफ को और बढ़ा देगा. चीन के रेयर अर्थ को लेकर भी ट्रंप की लालसा बढ़ी हुई है. अमेरिका जानता है कि चीन रेयर अर्थ का इस्तेमाल उसे रोकने के लिए करता है, रेयर अर्थ पर उसकी पूरी सेमीकंडक्टर,चिप, ईवी इंडस्ट्री की है, जो US की इकोनॉमी की रीढ़ है. ऐसे में ट्रंप की कोशिश होगी कि वो इस पर चीन के साथ रेयर अर्थ पर ठोस समझौता कर सके.

व्हाइट हाउस में बंद दरवाजे के पीछे क्या होगा?
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड और टैरिफ का वॉर चलता रहा है, लेकिन इस बार दोनों देशों के बीच इसे तनाव को कम करने की कोशिश होगी. व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर के बाद दोनों राष्ट्रपतियों के बीच क्लोज डोर मीटिंग होगी, जिसें उम्मीद की जा रही है कि व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान पर चर्चा हो सकती है. दोनों की कोशिश इस बार ट्रेड वॉर को कम करने की होगी. करीब 30-30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ घटाने पर बात बन सकती है.
अमेरिका-चीन के बीच बनी बात,तो क्या कुछ बदलेगा?
अमेरिकी टैरिफ की वजह से चीन के कारोबारियों को नुकसान हो रहा है. चीन की फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन कम हो गया है. जिसका नुकसान चीनी अर्थव्यवस्था को हो रहा है. टैरिफ की अनिश्चितता व्यापार और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है. चीन अमेरिका के साथ डील कर इसका स्थायी हल करना चाहता है . अगर दोनों देशों के बीच ट्रेड डील हो जाती है, तो दोनों का व्यापार बढ़ेगा, दोनों देशों की कंपनियों , दोनों की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.
दोनों ही देश ये जानते हैं कि वैश्विक मंच पर भले ही दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी हो, लेकिन व्यापारिक मंच पर मजबूत साझेदार हैं. दोनों देशों के बीच खुद को सुपरपावर साबित करने की होड़ तो मची रही है, लेकिन इस टशन की आंच उनके बीच 500 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार तक नहीं पहुंचती है. अमेरिका चीन की जरूरत और उसके महत्व को समझता है, इसलिए ट्रंप चीन से भिड़ने की गलती नहीं करते हैं. वहीं चीन भी ये जानता है कि अमेरिका से टकराने की हैसियत रखने वाला वो अकेला देश है, जिसका पूरा फायदा शी जिनपिंग डील की बातचीत के दौरान उठाएंगे.