शी जिसके लिए अमेरिका तक गए: भारत की एक 'चेतावनी' ने वो काम कर दिया! रूसी तेल पर 100% का हंटर नहीं चला पाएंगे ट्रंप
India Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति ने भले ही 100 फीसदी टैरिफ का अधिकार हासिल कर लिया हो, लेकिन वो भारत पर इसका इस्तेमाल करने से पहले सौ बार सोचेंगे. चीनी राष्ट्रपति ने जो काम अमेरिका जाकर किया, भारत ने वो बिना कुछ किये ही पूरा कर लिया है.
US Tariff on India : अमेरिका में 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पास हो गया है. ये बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार देता है. अमेरिका की इस लिस्ट में भारत, चीन समेत 5 देश शामिल है. भारत अमेरिका के साथ 140.79 अरब डॉलर का व्यापार करता है और चीन 494.6 अरब डॉलर का. अगर ये टैरिफ लगता है, तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. चीन ने इस टैरिफ पर अमेरिका के साथ बड़ा दांव खेला.
चीन ने अमेरिका के साथ 30 अरब डॉलर का टैरिफ फ्री ट्रेड डील किया
शी जिनपिंग अमेरिका पहुंचे, डोनाल्ड ट्रंप खुद उन्हें लेने एयरपोर्ट पहुंचे थे. दोनों राष्ट्रपतियों के बीच व्हाइट हाउस में बंद कमरे में मीटिंग हुई. दोनों के बीच 30 अरब डॉलर के रेसिप्रोकल टैरिफ कटौती पर सहमति बनी है. ट्रंप और शी की मुलाकात के बाद चीन ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे पर लगाए गए टैरिफ में 30 अरब डॉलर की कटौती करेंगे. इसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 60 अरब डॉलर और फिर और बढ़ाने की तैयारी है. बता दें कि दोनों देशों के बीच बड़ा व्यापारिक आंकड़ा है, जिसके प्रभावित होने से दोनों का ही नुकसान हुआ है.
अमेरिका-चीन के बीच 494.6 अरब डॉलर का व्यापार है
अमेरिका से चीन को निर्यात करीब 106 अरब डॉलर का है
चीन से अमेरिका को आयात करीब 308.7 अरब डॉलर है.
रूसी तेल पर 100 फीसदी टैरिफ पर भारत की चेतावनी
अमेरिका के 100 फीसदी टैरिफ वाले कानून पर भारत ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी. अमेरिकी अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग में चिंता जाहिर करते हुए साफ किया कि इससे ना केवल दोनों देशों के बीच व्यापार पर असर होगा, बल्कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट में और अस्थिरता आ जाएगी.
भारत के एनर्जी गेम में उलझा अमेरिका
खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद से ही अमेरिका भारत के लिए बड़ा एनर्जी पार्टनर बनने की होड़ में लगा है. एनर्जी और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी कहते हैं कि खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका भारत के लिए बड़ा एनर्जी पार्टनर बनने की होड़ में है. वेनेजुएला पर कब्जे के बाद से उसके पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार भी है. भारत जैसे बड़े बाजार की उसे आवश्यकता है. अप्रैल-मई के बीच LNG एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी में 227% का उछाल आया है. LPG एक्सपोर्ट में 63% का इजाफा हुआ है. जुलाई 2026 में भारत ने अमेरिका से 21.9 लाख टन (2.19 MT) एलएनजी का आयात किया, जबकि LPG इम्पोर्ट 8.9 लाख टन रहा.
भारत के बाजार पर सबकी नजर
भारत की रणनीति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है. दोनों देशों के बीच ट्रेड डील होने वाली है, जो इस टैरिफ की वजह से अटकी हुई है. भारत कई बार से साफ कर चुका है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए वो किसी भी देश के दबाव में नहीं आएगा. रूस उसका सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर है. अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 47 फीसदी की रही है, ऐसे में इससे दूरी बनाना आसान फैसला नहीं होगा. इसके बजाए भारत अमेरिका का विकल्प तलाश सकता है.
एक के बाद एक ट्रेड डील
बीते छह सालों में भारत ने 9 फ्री ट्रेड डील साइन कर 38 देशों तक भारतीय प्रोडक्ट्स के लिए नए बाजार तैयार किए हैं. इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2026 में प्रधानमंत्री अमेरिका, कनाडा, दो यूरोपीय देशों का दौरा कर सकते हैं, जिनके साथ ट्रेड डील फाइनल होने की स्थिति बन रही है.
भारत को दूसरा चीन नहीं बनने देना चाहता है अमेरिका
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने कहा कि भारत जिस रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है, उसे देखकर अमेरिका भी घबराया हुआ है. अमेरिका भारत को दूसरा चीन नहीं बनने देना चाहता है. एक निजी न्यूज चैनल के डिस्कशन कार्यक्रम के दौरान रूसी राजदूत ने कहा कि जैसे-जैसे भारत महाशक्ति बनने की ओर बढ़ेगा, अमेरिका उसे रोकने के लिए अपने दबाव की रणनीति को बढ़ा रहा है. भले ही ये दावा रूसी राजदूत ने की हो, लेकिन इसकी सच्चाई अमेरिका के हालिया बयान में झलकता है. अमेरिका के लिए एक चीन ही काफी है, जिसके आगे डोनाल्ड ट्रंपकी मनमानी धरी की धरी रह जाती है , वो भारत के बढ़ते दबदबे और ग्लोबल लीडर के तौर पर उसकी छवि को भांप चुके हैं.
भारत की चेतावनी और अमेरिका का बदलता लहजा
शनिवार को अमेरिका के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बयान जारी किया कि वो भारत की भारी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका की मंशा भारत के बड़े एनर्जी पार्टनर के तौर पर खुद को स्थापित करने की है. ये बयान तब आया है, जब कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर 100 फीसदी टैरिफ को मंजूरी दी है.
अमेरिकी अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग में भारत ने टैरिफ का मुद्दा उठाते हुए साफ किया है कि इस तरह के कानून का दोनों देशों के रिश्तों और बड़े एनर्जी मार्केट को प्रभावित करेंगे.
भारत का एनर्जी पार्टनर बनने की कोशिश
जब वॉशिंगटन खुद को भारत का वैकल्पिक सप्लायर बनाना चाहता है, तो इस तरह के टैरिफ का प्रस्ताव उसके रास्ते को रोक सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ भारत अपने ऊर्जा सप्लाई में विविधता रखना चाहता है, ताकि किसी एक पर निर्भरता कम हो सके. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि चीन के राष्ट्रपति ने जो काम अमेरिका जाकर किया, भारत ने दिल्ली में बैठे-बैठे उस टैरिफ का इलाज खोल लिया.
ट्रेड डील पर फंसे पेच को खोलना चाहता है अमेरिका
अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील अटकी हुई है. 26 सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सीनियर अधिकारी ने जानकारी साझा की है कि डील पर 90 फीसदी काम हो चुका है और जल्द ही इसे फाइनल किया जाएगा. अगर दोनों देशों के बीच ट्रेड डील होता है, तो टैरिफ का बड़ा खतरा खत्म हो जाएगा. अमेरिका भारत जैसे उभरते बाजार को छोड़ना नहीं चाहता है. जिस भारत के साथ EU, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड जैसे देश FTA साइन कर रहे हैं, अमेरिका उस बाजार से खुद को दूर रखने की गलती नहीं करेगा.