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10 साल तक फ्री, फिर अचानक क्यों लगा UPI पर चार्ज? किसके लिए मुफ्त, कौन भरेगा फीस, कैसे होगा MDR का बंटवारा? 'झटपट लेनदेन' का पूरा हिसाब-किताब

UPI Payment: सरकार ने यूपीआई पेमेंट पर MDR चार्ज क्यों लगाया, इस फीस का पैसा किसे मिलेगा. किसके लिए ये फीस फ्री होगी और किन-किन पेमेंट पर चार्ज लगेगा. समझिए सबकुछ

Written By Bavita Jha
Published: Sep 16, 2026, 02:38 PM IST | Updated: Sep 16, 2026, 02:49 PM IST
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UPI Payment fees: सुबह चाय पीनी हो या रात का डिनर. रेलवे की टिकट बुक करनी हो या बिजली बिल का पेमेंट करना हो. जेब से मोबाइल निकाली और खट से QR कोड स्कैन कर फट से पेमेंट कर लिया. UPI का बढ़ते चलन का क्रेज ऐसा है कि 10 सालों में इसके लेनदेन की संख्या में करीब 12,000 गुना और पेमेंट की रकम 4,000 गुना से ज्यादा बढ़ी है. आज यूपीआई पेमेंट का दायरा इतना बढ़ चुका है कि वित्त वर्ष 2025-26 में हर दिन करीब 66 करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ. रोजाना करीब 0.86 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन यूपीआई के जरिए होता है. PhonePe, GooglePe, Paytm जैसे ऐप्स आपको हर फोन में मिल जाएंगे. दुनिया के सबसे बड़े रियल टाइम पेमेंट सिस्टम में 10 साल बाद बड़ा बदलाव होने जा रहा है.  

UPI पेमेंट में बड़ा बदलाव  

यूपीआई के 10 साल बाद अब सरकार ने इस पर फीस लगाने का ऐलान किया है. 15 अक्टूबर 2026 से सरकार ने UPI पेमेंट पर MDR शुल्क लगाने का ऐलान किया है. सरकार के इस ऐलान के साथ कई सवाल उठते हैं. UPI पेमेंट पर फीस लगाने का फैसला क्यों लिया गया? फीस किसे मिलेगी? 0.4% MDR फीस का बंटवारा कैसे होगा? ग्राहकों पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा, लेकिन क्या मर्चेंट ये बोझ खुद उठाने के लिए तैयार होगा ? क्या यूपीआई फीस लगाने से एक बार फिर से कैश को बढ़ावा मिलेगा?  

सवाल: UPI पेमेंट में क्या नया बदलाव हुआ है?  

जवाब: 15 अक्टूबर से UPI पर MDR चार्ज लगेगा
0.4 % MDR चार्ज लगेगा
2000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर फीस लगेगी.
P2P फ्री है, P2M के लिए 2000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर फीस लगेगी
अधिकतम फीस 300 रुपये 

सवाल: क्या सभी UPI पेमेंट पर MDR शुल्क सबको देना होगा ?  

जवाब:  नहीं, आम ग्राहकों के लिए यूपीआई पेमेंट अभी भी फ्री है, पर्सन टू पर्सन (P2P) पेमेंट फ्री है, चाहे कितना भी पेमेंट करें. UPI पेमेंट पर्सन टू मर्चेंट (P2M) पर लगेगा. 2000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर 0.4% का चार्ज लगेगा, जिसका भुगतान मर्चेंट और बैंकों के बीच होना है, ग्राहकों तक इस फीस का कोई असर नहीं होगा.  छोटे कारोबारी अगर UPI QR कोड से महीने में 1 लाख रुपये तक का पेमेंट राप्त करते हैं, तो उन पर भी MDR लागू नहीं होगा.

सवाल: Paytm, गूगलपे, फोनपे...कौन हैं सबसे बड़ा पेमेंट ऐप

जवाब: यूपीआई पेमेंट के डेटा को देखें, तो फोनपे, गूगलपे इस सेक्टर के बादशाह है. फोनपे की हिस्सेदारी 45.89% से अधिक की है. वहीं गूगलपे की हिस्सेदारी 32.33 % की है, पेटीएम की हिस्सेदारी 8.05% की है. बाकी BHIM, Navi, super.money  WhatsApp Pay जैसे ऐप्स इस बाजार के हिस्से हैं.  


सवाल: Paytm, गूगलपे, NPCI सब मुनाफे में, तो फिर सरकार फीस क्यों लगा रही है?

जवाब:  Paytm नेट प्रॉफिट FY2026 में 556 करोड़ रुपये , NPCI का नेट सरप्लस 1,362 करोड़ रहा. अब सवाल ये कि अगर बैंक, यूपीआई ऐप्स, RBI सब मुनाफे में है, तो सरकार यूपीआई पेमेंट पर फीस क्यों लगा रही है ? बता दें कि यूपीआई पेमेंट को लोगों के लिए मुफ्त रखने के लिए सरकार बैंकों और भुगतान कंपनियों को प्रोत्साहन राशि देती है, लेकिन UPI पेमेंट का पूरा इकोसिस्टम चलाने के लिए काफी खर्च किया जाता है, यूपीआई की तकनीक, साइबर सिक्योरिटी, करोड़ों भुगतान संभालने में लगातार खर्च होता है. सरकार MDR चार्ज लगाकर इस बोझ का कुछ हिस्सा कंपनियों और पेमेंट ऐप पर डालना चाहती है.  

सवाल: UPI ट्रांजैक्शन पर मिलने वाला पैसा किसके खाते में जाएगा?

जवाब: यूपीआई पेमेंट पर लगने वाला एमडीआर शुल्क मर्चेंट और कारोबारी की ओर से प्रोसेसिंग फीस के तौर पर पे किया जाएगा.इस फीस में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी, ये भी समझना जरूरी है. 0.4% मर्चेंट फीस में से 40% हिस्सा इश्यू करने वाले बैंक (जिसके अकाउंट से पैसे दिए जाएंगे) को 40%, एक्वायरिंग बैंक (यानी जिस बैंक में पैसे क्रेडिट होंगे) को 30%, T-PAP यानी Payment App यानी फोनपे, पेटीएम, गूगलपे को 20% और बाकी का 10% PSP यानी ऐप के लिए प्रोसेसिंग करने वाले बैंक को मिलेगा.  

इसे उहादरण से समझते हैं . मान लेते हैं कि आपको 10000 रुपये का किसी दुकानदार को अपने UPI ऐप से पेमेंट किया. इसपर 0.4% के हिसाब से 40 रुपये का MDR लगेगा. इसमें से 16 रुपये में इश्यू करने वाले बैंक को, 12 रुपये मर्चेंट के बैंक को, 8 रुपये UPI ऐप को और 4 रुपये ऐप के लिए प्रोसेसिंग करने वाले बैंक को मिलेंगे.    

सवाल:  कौन, कौन-सा UPI ट्रांजेक्शन फ्री होगा?
जवाब: नोटिफिकेशन के अनुसार पर्सन टू पर्सन यानी दो व्यक्ति के बीच दोनों वाला यूपीआई पेमेंट पूरी तरह मुफ्त रहेगा, चाहे रकम कितनी भी बड़ी क्यों ना हो. 
अपने बैंक खातों से सेल्फ ट्रांसफर कर रहे हैं, तो कोई चार्ज नहीं लगेगा.  
2000 रुपये तक का पेमेंट फ्री होगा 
2000 रुपये से ऊपर के यूपीआई पेमेंट पर लगने वाला MDR मर्चेंट को देना होगा. 
MDR 0.4% या अधिकतम 300 रुपये होगा. 
रेलवे, पेट्रोल पेमेंट आदि पर अधिकतम एमडीआर 5 रुपये लगेगा.

सवाल: फिर किसे देना होगा MDR?  

2000 रुपये से अधिक की खरीदारी पर 0.4% MDR लगेगा. 
लेन-देन 75000 या उससे अधिक का है, तो अधिकतम चार्ज 300 रुपये होगा. 
पेट्रोल-डीजल, रेलवे ,टेलीकॉम, बीमा की रकम 2000 से अधिक है, तो फ्लैट 5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन चार्ज लगेगा. 
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड लेन-देन पर 0.02% का MDR लगेगा, अधिकतम रकम 300 रुपये होगी

सवाल; ग्राहकों को नहीं देना होगा चार्ज , तो फिर क्यों डर रहे हैं लोग ? 
10 साल तक UPI पेमेंट फ्री रहा है. अब उसपर MDR चार्ज लगाया जा रहा है. लोगों के मन में डर है कि भले ही सरकार ने ग्राहकों को इस बोझ से बाहर रखा है, लेकिन दुकानदार इस बोझ को उठाने के बदले उनसे अतिरिक्त वसूल सकते हैं.अगर दुकानदारों को  एमडीआर मर्चेंट देगा, तो वो अपना मुनाफा छोड़कर इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं. चीजें महंगी कर सकते हैं. अगर किसी दुकानदार को यूपीआई पेमेंट लेने पर उसपर लागत बढ़ती है, तो वो उसकी वसूली ग्राहकों से कर सकता है.  

क्या UPI पेमेंट पर फीस बढ़ने से कैश का चलन फिर से बढ़ेगा?

भले ही सरकार कह रही हो, कि यूपीआई पेमेंट पर फीस लगने से लोगों पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर दुकानदारों ने उनसे अतिरिक्त वसूलना शुरू किया, तो लोग डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त देने के बजाए कैश का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं. हालांकि सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि मर्चेंट एमडीआर का पैसा ग्राहक से न वसूलें.  

 

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About the Author

बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
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