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UPI पर 0.4% फीस से किसे फायदा, QR स्कैन करते ही 'पर्दे के पीछे' क्या कुछ चलता है, कहां-कहां घूमता है आपका पैसा ? UPI पेमेंट की पूरी कहानी

UPI MDR Charge: यूपीआई पेमेंट पर लगे MDR चार्ज से क्या लोगों के बीच कैश का चलन बढ़ेगा? अब तक फ्री, तो फिर 10 साल बाद क्यों लगानी पड़ी फीस ? कैसे UPI का पूरा सिस्टम काम करता है?

UPI पर 0.4% फीस से किसे फायदा, QR स्कैन करते ही 'पर्दे के पीछे' क्या कुछ चलता है, कहां-कहां घूमता है आपका पैसा ? UPI पेमेंट की पूरी कहानी

UPI MDR Charge Explainer: चाय पीनी हो या मॉल में शॉपिंग करनी हो,सब्जी-भाजी खरीदना हो या फ्लाइट टिकट, बिजली बिल भरने से लेकर स्कूल और अस्पताल का बिल ..सब UPI से हो जाता है. अब तक बिना किसी चार्ज के फंड ट्रांजैक्शन करना वाला ये रियल टाइम पेमेंट सिस्टम अब फ्री नहीं रहा है. केंद्र सरकार ने UPI पेमेंट पर 0.4% MDR चार्ज लगाने का फैसला किया है. यूपीआई पर चार्ज लगाने के फैसले के बाद से सियासत शुरू हो गई, आरोप लगने लगे कि विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ये चार्ज लगाया जा रहा है, लेकिन हम आपसे सियासत की नहीं, बल्कि हम सिर्फ फैक्ट्स की बात करेंगे.


आपको ये खबर क्यों पढ़नी चाहिए?

  1. इस आर्टिकल में समझने की कोशिश करेंगे कि UPI पेमेंट का पूरा सिस्टम कैसे काम करता है. मतलब जब आप जब आप QR कोड स्कैन करके या फोन नंबर पर यूपीआई ऐप से पेमेंट करते हैं, तो उसके पीछे कौन-कौन काम करता है ? 
  2. एक बार UPI पेमेंट करने पर कितना खर्च होता है और उस खर्च का बोझ कौन उठाता है ? 
  3. 2000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर लगने वाले 0.4% के MDR चार्ज में से किसे-कितना मिलेगा ?  
  4. 10 साल बाद सरकार ने MDR चार्ज लगाने का फैसला क्यों किया? 
  5. UPI ऐप चलाने वाली कंपनियों के पीछे कौन हैं? 
  6. चीन और ब्राजील में चलने वाले पेमेंट ऐप कैसे काम करते हैं ? 
  7. फोनपे, गूगलपे, पेटीएम जैसे UPI पेमेंट ऐप कमाई करते करते हैं ?          

 UPI पेमेंट पर चार्ज  का पूरा हिसाब-किताब  

यूपीआई भारत की सबसे बड़ी कामयाबी है, जिसने केवल भारत में ही नहीं, बल्कि करीब 11 देशों में भी डिजिटल पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदल दिया. अब तक ज्यादातर यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR नहीं लिया जाता था, लेकिन 15 अक्टूबर 2026 से 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% का MDR लगेगा. यानी अगर आप किसी दुकानदार या स्कूल , हॉस्पिटल आदि जगहों पर यूपीआई से पेमेंट करेंगे, तो आपको नहीं बल्कि उस दुकानदार को ये MDR चार्ज देना होगा.  

0.4% को कम समझने की भूल ना करें

कहने के लिए ये सिर्फ 0.4% या अधिकतम 300 रुपये, पेट्रोल-डीजल या रेल टिकट पर 5 रुपये की मामूली फीस लगती है, लेकिन जब कारोबार करोड़ों रुपये में हो रहा हो, लेन-देन अरबों रुपये का हो, तो ये 0.4% की रकम भी बड़ा फंड तैयार कर देती है. सरकारी डेटा के मुताबिक FY26 में 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. इन ट्रांजैक्शन की वैल्यू 314 लाख करोड़ रुपये रही. हर दिन करीब 66 करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ, जिसकी वैल्यू करीब 0.86 लाख करोड़ रुपये है.

सरकार का दावा है कि 96% ट्रांजैक्शन P2P यानी पर्सन टू पर्सन मतलब जैसे आपने अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार को यूपीआई से पैसे भेजे हों. इस हिसाब से देखें तो FY26 में करीब 23,195 करोड़ ट्रांजैक्शन (96%)  ऐसे हुए, जिसपर MDR चार्ज नहीं लगेगा, जबकि 967 करोड़ ट्रांजैक्शन P2M में हुए, जिनपर 15 अक्टूबर के बाद 0.4% MDR लगेगा. ये कैलकुलेशन सिर्फ इस बात को समझाने के लिए है कि 0.4% MDR से कितनी बड़ी रकम तैयार होगी.  

इस पैसे का फायदा किसे मिलेगा?

  • 0.4% के MDR चार्ज से होने वाली कमाई का फायदा किसे मिलेगा? 
  • क्या ये सरकारी खजाने में जाने वाला है? 
  • क्या NPCI, जो UPI को रन करती है, उसे मिलेगा?  
  • बैंक, यूपीआई ऐप, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर या किसी और को?


UPI पेमेंट पर लगने वाला MDR मर्चेंट और कारोबारी की ओर से प्रोसेसिंग फीस के तौर पर पे किया जाएगा. इस फीस में से 40% हिस्सा इश्यू करने वाले बैंक (जिसके अकाउंट से पैसे दिए जाएंगे) को 40%, एक्वायरिंग बैंक (यानी जिस बैंक में पैसे क्रेडिट होंगे) को 30%, T-PAP यानी Payment App यानी फोनपे, पेटीएम, गूगलपे को 20% और बाकी का 10% PSP यानी ऐप के लिए प्रोसेसिंग करने वाले बैंक को मिलेगा.  

यानी इस पूरे MDR सिस्टम से सबसे ज्यादा पैसा बैंकों को मिलने वाला है. करीब 80 % हिस्सा बैंकों के पास होगा. बाकी के 20% में पेमेंट ऐप्स शामिल हैं. एक बात साफ है कि इस MDR से सरकार को कुछ नहीं मिलने वाला है. बैंक और पेमेंट ऐप कंपनियों के बीच ये बंटवारा होगा.

0.4% MDR से मिलने वाला पैसा आखिर कहां जाएगा?

इसे 10000 रुपये के उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं. मान लेते हैं कि आप शॉपिंग मॉल में  10000 रुपये की खरीदारी करते हैं  दुकानदार को अपने UPI ऐप से ये पेमेंट करते हैं. चूंकि रकम 2000 से अधिक है, तो दुकानदार को इसपर 0.4% का MDR पे करना होगा.  

0.4% के हिसाब से 10000 रुपये पर करीब 40 रुपये का MDR लगेगा. 

  • इश्यू करने वाले बैंक (जिसमें आपका बैंक खाता है) को 16 रुपये 
  • मर्चेंट बैंक (जिसमें दुकानदार का खाता है) को 12 रुपये 
  • UPI ऐप (फोनपे, गूगलपे, जिससे भी आपने पेमेंट किया) को 8 रुपये
  • प्रोसेसिंग बैंक को 4 रुपये  


 

पैसा आपका, पेमेंट दुकानदार को, फिर NPCI  पिक्चर में कैसे आया? 

NPCI UPI Network का सबसे अहम किरदार है, जो डिजिटल पेमेंट की दुनिया में ट्रैफिक कंट्रोलर की तरह काम करता है. ये आपका पैसा अपनी जेब में नहीं रखता, बल्कि आपके पैसे को दुकानदार तक पहुंचाने के लिए का काम करता है.  UPI के पूरे पेमेंट नेटवर्क को coordinate और operate करने की जिम्मेदारी NPCI की है.

जब एक भी रुपया इसकी जेब में नहीं, तो NPCI की कमाई कैसे होती है ?  

UPI फ्री होने के बाद भी NPCI ने 2025-26 में 3,969 करोड़ रुपये की कमाई की. UPI पर MDR लगने के बाद भी उसे 0.4% में कुछ नहीं मिलना है, फिर 55.49 करोड़ यूपीआई यूजर की पूरी जिम्मेदारी संभालने वाले NPCI का बिजनेस मॉडल समझना भी जरूरी है. दरअसल 
NPCI केवल UPI ही नहीं चलाता. उसके पास RuPay, IMPS, NACH, AEPS, BBPS जैसी सर्विसेस हैं, जहां से उसकी कमाई होती है. उसकी कमाई में नेटवर्क आय, सर्टिफिकेशन फीस, लाइसेंस फीस, जैसे इनकम सोर्स जुड़े हैं, इसके अलावा ब्याज से भी उसकी कमाई होती है.  


मोबाइल के UPI पेमेंट ऐप से कैसे पैसा आपके खाते से कटकर दुकानदार के बैंक में पहुंचता है ?  

क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप PhonePe, Google Pay, Paytm या किसी दूसरे यूपीआई ऐप से भुगतान करते हैं, तो कैसे आपके मोबाइल फोन से पैसा दूसरे के बैंक अकाउंट में पैसा पहुंचता है ? दरअसल इसके पीछे पूरा इकोसिस्टम काम करता है. आप सिर्फ UPI ऐप और QR कोड को देख पाते हैं, लेकिन एक पेमेंट के पीछेबैंक, NPCI, सिक्योर सर्वर्स, इंक्रिक्शन, मोबाइल नेटवर्क, रियल टाइम राउटिंग की पूरी एक अदृश्य दुनिया काम करती है.

मोबाइल फोन में मौजूद UPI ऐप्स जैसे फोनपे, गूगलपे, पेटीएम फ्रंट डोर की तरह काम करते हैं. ये ऐप आपके फोन नंबर की मदद से आपके बैंक खाते से लिंक होते हैं. आप QR कोड स्कैन करते हैं, अपना UPI PIN डालते है, जिसके पास पर्दे के पीछे एक पूरा नेटवर्क काम करता है. इसे स्टेप बाय स्टेप समझते हैं...

Step 1: QR कोड स्कैन के जरिए आपका यूपीआई ऐप रिसीवर का नाम, उसके बैंक खाते का एड्रेस हासिल कर लेता है.  
Step 2: जैसे ही आप UPI पिन डालते है, ऐप को परमिशन मिल जाती है, जिसे वो इंक्रीप्टेड फॉर्म में आपके बैंक को भेज देता है.  
Step 3:आपका बैक ट्रांजैक्शन रिक्वेट बनाता है, जिसमें पमेंट करने वाले, पेमेंट रिसीवर, भुगतान की रकम, ट्रांजैक्शन रेफरेंस, डिवाइस डिटेल और सिक्योरिटी डेटा NPCI को भेजा जाता है.
Step 4: NPCI पूरे UPI इकोसिस्टम में ट्रैफिक कंट्रोलर की भूमिका निभाता है और पेमेंट की पूरी डिटेल को चेक करने के बाद उसे  आपके बैंक से रिसीवर के बैंक तक राउट करता है.
Step 5: NPCI से हरी झंडी मिलने के बाद आपका बैंक अकाउंट से पैसे डेबिट को अप्रूबल देकर रिसीवर बैंक को क्रेडिट इंस्ट्रक्शन भेजता है और दुकानदार या रिसीवर के ऐप में फंड हासिल करने का मैसेज आ जाता है. ये सब कुछ सेंकेंड में पूरा होता है.  

UPI की दुनिया में किसका दबदबा  

भारत में PhonePe, Google Pay, Paytm, BHIM, Navi, Amazon Pay, WhatsApp Pay जैसे दर्जनों पेमेंट ऐप्स है. 2016 में जब यूपीआई की शुरुआत की गई, तो एक-दो ऐप ही मौजूद थे, बढ़ते मार्केट और बढ़ती डिमांड के बीच पेमेंट ऐप्स के ऑप्शन बढ़ते गए. भारतीय बाजार में अगर बात करें, तो फोनपे का दबदबा है, जिसकी हिस्सेदारी 45.89% से अधिक की है. वहीं गूगलपे की हिस्सेदारी 32.33 % की है, पेटीएम की हिस्सेदारी 8.05% की है. बाकी BHIM, Navi, super.money WhatsApp Pay जैसे ऐप्स इस बाजार के हिस्से हैं.  

Google Pay: गूगल पे की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक (Alphabet Inc.) है, जो गूगल (Google LLC) की भी पेरेंट कंपनी है. 
PhonePe:   भारतीय डिजिटल पेमेंट और फिनटेक कंपनी है, जिसे 2015 में समीर निगम, राहुल चारी और बुर्जिन इंजीनियर ने मिलकर शुरू किया था. इस कंपनी में अमेरिकी रिटेल दिग्गज Walmart का भारी भरकम निवेश है. 2023 में वॉलमार्ट ने फोनपे में 1649 करोड़ का निवेश किया था, जिसे बाद में बढ़ाया गया.  

Paytm :  Paytm भारतीय फिनटेक कंपनी है, जिसकी नींव विजय शेखर शर्मा ने रखी.  वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड में मार्च, 2026 के अंत तक घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 50.3%  घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 23.1 %  पर पहुंच गई है. चीन की एंट ग्रुप, जापान के सॉफ्टबैंक की पेटीएम में बड़ी हिस्सेदारी थी, जिसे वो बेचकर निकल गए.  


UPI पेमेंट करने पर कितना खर्च आता है और कौन उसका भार उठाता है ?  

15 अक्टूबर 2026 से पहले तक UPI सबके लिए फ्री है, लेकिन पेमेंट इकोसिस्टम को चलाने में भारी भरकम खर्च आता है. UPI का इन्फ्रास्ट्रक्चर फ्री में नहीं चलता. RBI 2022 Discussion Paper के मुताबिक 100 रुपये से यूपीआई पेमेंट पर 0.25 रुपये यानी 25 पैसे का इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट आता है.  जिसका भार बैंक से लेकर पेमेंट ऐप उठाते हैं. 25 पैसे का ब्रेकअप देखें, तो

  • 10 पैसा--पेमेंट करने वाले बैंक का खर्च
  • 6 पैसा PSP लेयर
  • 7 पैसा: मर्चेंट साइड बैंक ऐप लेयर
  • 2 पैसा - NPCI कॉस्ट

पेमेंट ऐप्स विज्ञापन, लोन, वॉयस-ऑपरेटिंग स्पीकर सर्विस, स्क्रेच कार्डस, सॉफ्टवेयर, बीमा जैसी सर्विसेस के जरिए कमाई करती है. अब सरकार ने 0.4% MDR के जरिए उनके लिए कमाई का एक और विकल्प खोल दिया है.  


भारत में 10 साल बाद UPI पेमेंट पर लगा चार्ज, विदेशों में कैसे काम करते हैं पेमेंट ऐप  

भारत में यूपीआई की तरह ही कई दूसरे देशों के पास भी अपना पेमेंट सिस्टम है. जैसे...

  1. चीन में मोबाइल पेमेंट ऐप अलीपे (Alipay) और वीचैट पे (WeChat Pay) हैं
  2. जापान में PayPay (पेपे), Rakuten Pay , Merpay (मेरपे) है.  
  3. ब्राजील में  Pix , Mercado Pago  जैसे पेमेंट ऐप हैं. 
  4. अमेरिका में Venmo (वेनमो), Cash App (कैश ऐप), Zelle (जेले), GooglePay जैसे पेमेंट ऐप हैं.  

क्या विदेशों में पेमेंट ऐप्स पर लगता है MDR चार्ज  

चीन, ब्राजील, अमेरिका जैसे देशों में पेमेंट ऐप 'सुपर ऐप' की तरह काम करते हैं, जहां पेमेंट के साथ-साथ आप एक ही ऐप से शॉपिंग, ट्रांजैक्शन सब कर सकते हैं.  इसके अलावा पेमेंट पर MDR चार्ज भी लगता है.

अमेरिका में क्रेडिट कार्ड, डिजिटल वॉलेट से पेमेंट करने पर मर्चेंट (दुकानदार) को 1.5% से 3.5% का MDR लगता है.  
चीन में Alipay और WeChat Pay से पेमेंट करने पर 0.6% का फिक्स MDR लगता है. 

UPI ग्राहकों के लिए फ्री, लेकिन क्या दुकानदार इस बोझ को उठाएंगे ?  

सरकार ने ग्राहकों के लिए यूपीआई को अभी भी फ्री रखा है, लेकिन MDR लगने से दुकानदारों पर पेमेंट की लागत बढ़ेगी. अगर आप यूपीआई से उन्हें पेमेंट करते हैं, तो उन्हें ये फीस भरनी पड़ेगी. ऐसे में इस बात का डर है कि वो इस बोझ को सामान या सेवा की कीमत बढ़ाकर या छूट खत्म कर ग्राहकों पर डाल सकते हैं, हालांकि दिल्ली यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर दिप्ती तनेजा ऐसा नहीं मानती हैं.  वो कहती हैं....


प्रधानमंत्री ने जब लोगों ने सोना नहीं खरीदने की बात कही, तो लोगों ने उनकी बात सुनी और सोने का आयात गिरा. देश के दुकानदार इस बार भी पीएम की बात सुनेंगे, वो एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालेंगे.  

यूपीआई पर MDR लगने से क्या लोग कैश की ओर फिर से बढ़ेंगे ?

प्रोफेसर दिप्ती तनेजा कहती हैं...

 इसकी संभावना बेहद कम है कि लोग UPI पर 0.4% MDR लगाए जाने से कैश की ओर फिर से झुकेंगे. कैश का चलन बढ़ने की संभावना बेहद कम है. कैश निकालने, रखने का झंझट होता है. यूपीआई की वजह से लोगों की ये आदत छूट गई है.    

UPI पेमेंट पर लगे चार्ज पर कुछ जरूरी सवाल और जवाब भी जानिए

सवाल:  कौन-सा UPI ट्रांजेक्शन फ्री होगा?
जवाब: नोटिफिकेशन के अनुसार पर्सन टू पर्सन यानी दो व्यक्ति के बीच होने वाला यूपीआई पेमेंट पूरी तरह मुफ्त रहेगा, चाहे रकम कितनी भी बड़ी क्यों ना हो.  सेल्फ ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगेगा.  
2000 रुपये तक का पेमेंट फ्री होगा .

सवाल: MDR फीस की अधिकतम सीमा क्या होगी? 
जवाब: 2000 रुपये से ऊपर के यूपीआई पेमेंट पर लगने वाला MDR मर्चेंट को देना होगा. 
MDR 0.4% या अधिकतम 300 रुपये होगा. 
रेलवे, पेट्रोल पेमेंट आदि पर अधिकतम एमडीआर 5 रुपये लगेगा.
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड लेन-देन पर 0.02% का MDR लगेगा, अधिकतम रकम 300 रुपये होगी.


 

 


 

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About the Author

Bavita Jha

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बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
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