तेल की कीमत में गिरावट: क्या ट्रंप-पुतिन की नई डील से नीचे आएंगे क्रूड के दाम, रूस से आएगा सस्ता डीजल
Trump Putin Energy Deal: ग्लोबल ऑयल मार्केट में पिछले काफी समय से मची हलचल के बीच क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट देखी गई. सऊदी अरब पर हमलों के बीच अमेरिका की तरफ से रूसी डीजल सप्लाई पर ढील देने से बाजार की कैलकुलेशन बदल गई है.
Crude Oil Price: ग्लोबल एनर्जी मार्केट में पिछले काफी समय से उठापटक चल रही है. एक तरफ मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब के ठिकानों और होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हमले से तेल की आपूर्ति का संकट बना हुआ है. दूसरी तरफ, अमेरिका और रूस के बीच हुई एक डील ने पूरे मार्केट का रुख बदल दिया है. ग्लोबल मार्केट में रूसी डीजल की आवक से क्रूड ऑयल की कीमत पर ब्रेक लगता दिख रहा है. यही कारण है कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत में मामूली नरमी देखी जा रही है. इससे पहले सत्र में तेल की कीमत में 2 डॉलर प्रति बैरल की तेजी देखने को मिली थी.
सऊदी अरब पर हुए हमलों के कारण तेल की सप्लाई रिस्क का आंकलन कारोबारियों की तरफ से किया जा रहा है. दूसरी तरफ रूस से एक्स्ट्रा डीजल सप्लाई मिलने की संभावना का भी कारोबारियों की तरफ से ध्यान रखा जा रहा है. मंगलवार सुबह ब्रेंट क्रूड गिरकर 105.7 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड घटकर 92.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. एक दिन पहले सोमवार को ब्रेंट क्रूड 106.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचकर बंद हुआ था. यह 15 सितंबर के बाद पिछले करीब एक महीने के दौरान इसका सबसे हायर लेवल था.
रूस डीजल की सप्लाई करने के लिए सहमत हुआ
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस ग्लोबल मार्केट में डीजल की आपूर्ति करने के लिए सहमत हो गया है. ट्रंप प्रशासन ने रूस के तेल पर लगाए गए अमेरिकी बैन में अस्थायी ढील भी दे दी है. यह बैन रूस से यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को के रेवेन्यू को रोकने के मकसद से लगाए गए थे. बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि रूस से डीजल की सप्लाई बढ़ने से दुनियाभर के बााजर में बनी किल्लत को दूर किया जा सकेगा. इसका असर आने वाले समय में क्रूड ऑयल के दाम को नीचे लाने में भी दिखाई देगा.
'पुतिन के साथ समझौता, अमेरिकी कानून का उल्लंघन'
हालांकि, ट्रंप के फैसले का अमेरिका में विरोध भी शुरू हो गया. रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों की तरफ से शिकायत की गई कि ट्रंप और पुतिन के बीच का समझौता अमेरिकी कानून का खुलेआम उल्लंघन है. अमेरिकी कानून के अनुसार जब तक मॉस्को यूक्रेन के खिलाफ अपनी हमले कम नहीं करता, तब तक रूसी एनर्जी के आयात पर रोक पूरी तरह लागू रहेगी. इसके बावजूद प्रशासन का फोकस फिलहाल ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बढ़ते दाम को कंट्रोल करने पर टिका है.
जहाजों या पाइपलाइन पर हमला ज्यादा रिस्की
केसीएम ट्रेड के चीफ एनालिस्ट टिम वाटरर ने बाजार के हालिया हालत पर कहा कि रूस से डीजल सप्लाई और सऊदी अरब से तेल का स्थिर फ्लो मिलने से बाजार ने थोड़ी राहत की सांस ली है. हालांकि, ट्रेडर्स का अभी भी यही मानना है कि रूसी डीजल के मुकाबले खाड़ी देशों में जहाजों या पाइपलाइन पर हमला ज्यादा रिस्की है. उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक तनाव कम होने के साफ संकेत नहीं मिलते, तब तक क्रूड ऑयल की कीमत में ऊपर जाने का रुझान बना रहेगा.
सप्लाई में सुधार की कोशिश को झटका दिया
समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है. पिछले दिनों ईरान समर्थित हूतियों ने रियाद के इंटरेशनल एयरपोर्ट पर हमला कर दिया था. होर्मुज के पास तेल टैंकरों पर हमले की भी खबरें आई हैं. इन घटनाओं ने सितंबर में मिडिल ईस्ट की सप्लाई में सुधार की कोशिश को झटका दिया है. ओपेक और नॉन ओपेक देशों की तरफ से जानकारी दी गई कि जहाजों की शिपिंग और इंश्योरेंस खर्च में जबरदस् बढ़ोतरी हुई है.