नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर उठाया सवाल; शिकायती चिट्ठी में क्या-क्या लिखा?
देश के दिग्गज कारोबारी घराने टाटा ग्रुप के अंदर फिर से घमासान शुरू हो गया है. इस बार नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन का टाटा संस का एक और चेयरमैन नियुक्त किये जाने पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इसको लेकर कंपनी सेक्रेटरी को भी चिट्ठी लिखी है.
देश के सबसे बड़े कारोबारी घराने टाटा ग्रुप के अंदर चल रहा घमासान ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले दिनों खुलकर सामने आए मतभेदों को सुलझाया भी नहीं गया. इससे पहले ही एक बार फिर से नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच की खींचतान सामने आ रही है. टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 के बाद पांच साल के लिए टाटा संस का चेयरमैन एक और टेन्योर के लिए नियुक्त किये जाने के प्रस्ताव को चुनौती दी है. 17 सितंबर 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में यह प्रस्ताव पास किया गया था.
नोएडल टाटा ने एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ कंपनी सेक्रेटरी को एक चिट्ठी लिखी है. उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा कि यह प्रपोजल बिना सही प्रोसेस और एजेंडे के अचानक लाया गया था, इसलिए यह पूरी तरह से अवैध है. इतना ही नहीं नोएल टाटा ने बोर्ड मीटिंग के ड्राफ्ट को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. उनकी तरफ से तर्क दिया गया कि मीटिंग के दौरान वास्तव में क्या हुआ? इसका एकमात्र रिकॉर्ड वीडियो रिकॉर्डिंग है. उन्होंने बतौर डायरेक्टर उस मीटिंग की अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग (बिना काट-छाट वाली वीडियो) को मांगा है. इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा.
टाटा से जुड़े पूरे विवाद में आया नया मोड़
नोएल टाटा ने यह भी तर्क दिया कि टाटा संस के नियमों के अनुसार अहम फैसलों के लिए टाटा ट्रस्ट की तरफ से नॉमिनेटेड निदेशकों की सहमति जरूरी है. टाटा ग्रुप से जुड़े पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब नोएल टाटा ने टीवीएस मोटर कंपनी और एन चंद्रशेखरन की फैमिली से जुड़ी कंपनी हैनो वन वेयरहाउसिंग के बीच बिजनेस एग्रीमेंट का जिक्र किया. मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चंद्रशेखरन के री-एग्जामिनेशन से पहले इस रिश्ते को लेकर जानकारी टाटा संस के बोर्ड को दी जानी चाहिए थी.
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टाटा ग्रुप के विवाद से कॉर्पोरेट जगत में मची हलचल
इसके अलावा नोएल टाटा की तरफ से वेणु श्रीनिवासन की भूमिका को लेकर भी सवाल किये गए, जिन्होंने इस पूरे प्रोसेस में हिस्सा लिया था. टाटा ग्रुप में चल रहे घमासान से कॉर्पोरेट जगत में हलचल मची हुई है. आपको बता दें टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी है, ऐसे में नोएल टाटा और अन्य बोर्ड मेंबर्स के बीच चल रहा मतभेद आने वाले समय में टाटा ग्रुप के बड़े फैसलों और प्रशासनिक ढांचे को किस दिशा में ले जाएगा. इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं.
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क्या है टाटा ग्रुप के अंदर चल रहा विवाद?
टाटा ग्रुप के अंदर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच शीर्ष नेतृत्व को लेकर उपजा मतभेद है. विवाद की जड़ में एन चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 के बाद अगले पांच साल के लिए दोबारा टाटा संस के चेयरमैन पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव है. 17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग के दौरान बहुमत के आधार पर इस प्रस्ताव को पास भी कर दिया गया. लेकिन टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस पूरे प्रोसेस से ही नाराजगी जताई है . नोएल का तर्क है कि इस एजेंडे को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक लाया गया. टाटा संस के नियमानुसार ट्रस्टस के निदेशकों की सहमति इसके लिए जरूरी होती है.