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TCS ने दिया बड़ा झटका! कंपनी ने होल्ड किया सीनियर कर्मचारियों का वेरिएबल अलाउंस; जूनियर्स की बल्ले-बल्ले

TCS News: टीसीएस ने इंटरनल परफॉर्मेंस टारगेट पूरा नहीं होने पर सीनियर कर्मचारियों के वेरिएबल अलाउंस को रोक दिया है. हालांकि, कंपनी ने जूनियर लेवल पर काम करने वाले लाखों कर्मचारियों का वेरिएबल अलाउंस नहीं रोका है. कंपनी ने यह फैसला क्यों लिया? आइए जानते हैं-

TCS ने दिया बड़ा झटका! कंपनी ने होल्ड किया सीनियर कर्मचारियों का वेरिएबल अलाउंस; जूनियर्स की बल्ले-बल्ले

TCS Quarterly Bonus: दिग्गज आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी टीसीएस (TCS) को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. रिपोर्ट में बताया गया कि टीसीएस ने इंटरनल परफॉर्मेंस टारगेट पूरा नहीं कर पाने के कारण सीनियर कर्मचारियों का क्वार्टरली वेरिएबल पे (Variable Pay) रोक दिया है. इस बीच राहत की बात यह है कि जूनियर लेवल के कर्मचारियों को उनकी पूरी 100 प्रतिशत वेरिएबल पे मिलेगी. पिछले दो साल के दौरान यह पहला मौका है जब टीसीएस ने अपने कर्मचारियों के पूरी तिमाही के वेरिएबल अलाउंस को होल्ड कर दिया है. कंपनी की तरफ से लिये गए इस फैसले का असली कारण क्या है और इसका असर किन कर्मचारियों पर पड़ेगा?

किन कर्मचारियों पर पड़ेगा असर?

टीसीएस कर्मचारियों को जारी किये गए इंटरनल मेमो (Internal Memo) के अनुसार टीसीएस के सीएचआरओ (CHRO) सुदीप कुन्नुमल ने इस बारे में जानकारी दी है. मेमो में बताया गया कि C3A ग्रेड और उससे ऊपर के लेवल के एसोसिएट्स को इस तिमाही किसी तरह का क्वार्टरली वेरिएबल अलाउंस (QVA) नहीं दिया जाएगा. C3A कैटेगरी या उससे ऊपर वाले कर्मचारियों के पास आमतौर पर 7 से 10 साल या इससे ज्यादा का अनुभव होता है. इसी ग्रेड में सीनियर मैनेजमेंट के पद भी होते हैं.

तीन साल में सबसे कम रेवेन्यू ग्रोथ

कंपनी की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में आया है जब टीसीएस ने सितंबर में पिछले तीन साल में सबसे कम रेवेन्यू ग्रोथ (Sequential Revenue Growth) दर्ज की है. आईटी सर्विस की डिमांड पर लगातार बन रहे दबाव के कारण कंपनी की तरफ से यह कदम उठाया गया है. हालांकि, एआई (AI) से जुड़े बिजनेस में कंपनी को अच्छी तेजी देखने को मिल रही है. एआई से आने वाला रेवेन्यू करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है.

अमेरिकी पॉलिसी और चुनौतियां

देश की करीब 315 अरब डॉलर वाली आईटी इंडस्ट्री तमाम तरह की परेशानियों से जूझ रही है। इसमें कंपनियों की तरफ से कम खर्च किया जाना, बदलती टेक्नोलॉजी और यूएस की इमिग्रेशन पॉलिसी (US Immigration Policies) अहम है। कुछ दिन पहले ही अमेरिकी प्रशासन ने टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल जैसे दिग्गज भारतीय कंपनियों को आईटी आउटसोर्सिंग ग्रीन-कार्ड प्रोग्राम से हटा दिया. इस कदम का मकसद अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षित जॉब ऑप्शन देना बताया जा रहा है.

टीसीएस की तरफ से सीनियर कर्मचारियों का वेरिएबल पे रोके जाने से यह साफ है कि बिजनेस के प्रदर्शन और रेवेन्यू पर आने वाला दबाव सैलरी पैकेज के फैसलों को प्रभावित कर सकता है. कंपनियां भले ही आने वाले समय में ग्रोथ के लिए एआई पर फोकस कर रही हैं. लेकिन मौजूदा बिजनेस की सुस्ती का असर सीनियर मैनेजमेंट के इंसेंटिव पर साफ देखा जा रहा है.
 

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About the Author

Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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