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रिलायंस JIO लाने जा रहा मेगा IPO, Zee मीडिया ने पूछे 14 सीधे सवाल

रिलायंस जियो के 21-23 अक्टूबर तक ओपन होने जा रहे आईपीओ के जरिये कंपनी को 30 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है. आईपीओ जारी होने से पहले आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में जी मीडिया की तरफ से कुछ सवाल किये गए-

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Oct 16, 2026, 11:19 AM IST | Updated: Oct 16, 2026, 11:27 AM IST
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टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है. 21-23 अक्टूबर तक पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने जा रहे इस मेगा आईपीओ के जरिये कंपनी को 30 हजार करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है. आईपीओ जारी किये जाने से पहले एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन गुरुवार को मुंबई में किया गया. प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जी मीडिया ने रिलायंस जियो के आईपीओ को लेकर कुछ सवाल दागे. इस पर रिलायंस जियो के सीईओ ने कहा कि आप इन सवालों को ई-मेल कर दें. जी मीडिया ने इन सवालों को रिलायंस जियो के सीईओ को ई-मेल भी किया है. आइए एक नजर डालते हैं इन सवालों पर-

सवाल नंबर-1
जब IPO से मिलने वाली रकम का 90% से अधिक हिस्सा नई क्षमता विस्तार के बजाय पुराने कर्ज चुकाने में लगाया जा रहा है, तो नए पब्लिक शेयरहोल्डर्स को भविष्य की ग्रोथ में पैसा लगाने के बजाय कंपनी के पुराने कर्जों को चुकाने के लिए क्यों कहा जा रहा है ?

सवाल नंबर-2
बोर्ड ने एक ऐसे नए इश्यू का विकल्प क्यों चुना, जिससे मौजूदा हिस्सेदारी कम हो जाती है और बाहरी पूंजी आती है, जबकि एक डायरेक्ट, टैक्स-न्यूट्रल वर्टिकल डीमर्जर के जरिए Jio के शेयर सीधे RIL शेयरधारकों को दिए जा सकते थे?

सवाल नंबर-3
जब वैश्विक और घरेलू संस्थान जियो प्लेटफॉर्म्स में सीधे एक शुद्ध टेक और टेलीकॉम एसेट के रूप में निवेश कर सकेंगे, तो क्या यह लिस्टिंग RIL पर एक स्ट्रक्चरल होल्डिंग-कंपनी डिस्काउंट थोप कर पैरेंट कंपनी के वैल्यूएशन को हमेशा के लिए सीमित नहीं कर देगी ?

सवाल नंबर-4
RIL के पास Jio Platforms में करीब 66.4% हिस्सेदारी है, यानी IPO के दिन दिया गया हर रुपये का डिस्काउंट लॉन्ग टर्म RIL शेयरधारकों से नए सब्सक्राइबर्स की तरफ वेल्थ ट्रांसफर करता है. क्या यह प्राइस बैंड जानबूझकर कम रखा गया ताकि लिस्टिंग के पहले दिन शेयर की कीमत में उछाल आए, या फिर IPO से पहले हुए इंस्टीट्यूशनल रोडशो के कारण वैल्यूएशन कम करनी पड़ी ?

सवाल नंबर-5
जब कंपनी का 3% से भी कम हिस्सा मार्केट के लिए उपलब्ध है, तो क्या लिस्टिंग-डे प्राइसिंग असली फंडामेंटल प्राइस डिस्कवरी के बजाय कृत्रिम सप्लाई की कमी और पैसिव इंडेक्स-इनक्लूजन की मजबूरियों को ही दिखाएगी ?

सवाल नंबर-6
2020 के प्री-IPO निवेशकों या प्रमोटरों में से कोई भी अपने शेयरों को उस वैल्यूएशन पर क्यों नहीं बेच रहा है जिसे एक 'लैंडमार्क वैल्यूएशन' के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है ? साथ ही, वे कौन सी तारीखें हैं जब 'लॉक-इन' की अवधि खत्म हो जाएगी, जिन पर रिटेल खरीदारों को नज़र रखनी चाहिए ?

सवाल नंबर-7
Jio Platforms के पास खुद 'Jio' मुख्य ट्रेडमार्क का मालिकाना हक नहीं है, इसलिए अगर उसी ब्रांड वाली कोई दूसरी ग्रुप कंपनी किसी बड़ी विफलता का सामना करती है, तो लिस्टेड शेयरधारकों की सुरक्षा के लिए कौन-से कानूनी सुरक्षा उपाय मौजूद हैं ? साथ ही, क्या लिस्टिंग के बाद ब्रांड लाइसेंसिंग फीस लगाई जा सकती है ?

सवाल नंबर-8
जब प्रमोटर मेज के दोनों तरफ बैठे हैं, तो ऐसी कौन-सी स्वतंत्र व्यवस्थाएं हैं जो यह सुनिश्चित करती हैं कि रिलायंस रिटेल के साथ कमीशन,कस्टमर एक्विजिशन फीस और साझा परिचालन लागत को बाजार के उचित और निष्पक्ष नियमों के आधार पर तय किया गया है?

सवाल नंबर-9
जब बाहरी पब्लिक माइनॉरिटी निवेशक Jio Platforms में प्रवेश कर रहे हैं, तो कौन-सी औपचारिक, लिखित कॉर्पोरेट गवर्नेंस पॉलिसी यह तय करती है कि हाई-मार्जिन वाले उद्यम Jio के अंतर्गत रखे जाएंगे या सीधे RIL के स्तर पर ही रखे जाएंगे ?

सवाल नंबर-10
जब एक दशक के भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर के बावजूद रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) लगातार करीब 8% पर अटका हुआ है, तो पब्लिक मार्केट्स यह क्यों मान लें कि इस लिस्टिंग के बाद कैपिटल डिसिप्लिन और शेयरधारकों को मिलने वाला कैश रिटर्न वाकई बेहतर होगा ?

सवाल नंबर-11
पिछले 3 वर्षों में, RIL के शेयर की कीमत लगभग स्थिर रही है, जबकि अकेले 2026 में ही इसके मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग ₹4 लाख करोड़ की कमी आई है. 125 अरब डॉलर से ज्यादा ग्रुप कैपिटल लगाने के बाद शेयरधारकों की वेल्थ में इस लंबे समय से चली आ रही गिरावट को आप कैसे सही ठहराएंगे?

सवाल नंबर-12
2019 की AGM में शेयरधारकों से साफ तौर पर कहा गया था कि Reliance Retail पांच साल के भीतर लिस्ट होगी, लेकिन अब यह मील का पत्थर खिसककर कथित तौर पर 2028 तक पहुंच गया है. पब्लिक मार्केट्स इस संशोधित समयसीमा पर भरोसा क्यों करें ?

सवाल नंबर-13
आकाश, ईशा और अनंत क्रमशः जियो, रिटेल और न्यू एनर्जी का नेतृत्व कर रहे हैं . जब ये तीनों मल्टी-बिलियन डॉलर वाले डिवीज़न पैरेंट कंपनी की बैलेंस शीट के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं, तो उनके बीच इंटरनल कैपिटल एलोकेशन किस फ्रेमवर्क के तहत होता है?

सवाल नंबर-14
क्या एग्ज़िक्यूटिव कंपनसेशन, परफॉर्मेंस इंसेंटिव्स और लीडरशिप सक्सेशन के मानदंड सीधे तौर पर RIL के शेयर प्राइस परफॉर्मेंस और कंसॉलिडेटेड ROCE से जुड़े हैं, या सिर्फ बैलेंस शीट और एसेट के कुल आकार से?

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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