भारतीय रुपये और देश की इकोनॉमी को मजबूती देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है. पिछले साल के मुकाबले अगस्त महीने में रिजर्व बैंक की डॉलर खरीद 132% बढ़कर 43.3 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई है. इन आंकड़ों से सामने आया कि रिजर्व बैंक ने अगस्त में डॉलर की बंपर खरीद की है. आरबीआई की कुल नेट डॉलर खरीद 132% उछाल के साथ 43.3 अरब डॉलर पर पहुंच गई. जुलाई में यह आंकड़ा महज 18.7 अरब डॉलर का था.
कुल मिलाकर देखें तो अगस्त 2026 में रिजर्व बैंक ने 74.5 अरब डॉलर की खरीद की और 31.2 अरब डॉलर की बिक्री की. पिछले साल अगस्त 2025 में आरबीआई ने एक भी डॉलर नहीं खरीदा था, उस समय केंद्रीय बैंक रुपये को संभालने के लिए डॉलर की बिक्री कर रहा था. डॉलर खरीद में ऐतिहासिक उछाल का अहम कारण FCNR (B) स्वैप सुविधा है. आरबीआई ने एनआरआई (NRI) से योजना के तहत करीब 127 अरब डॉलर जुटाए थे. इसके बाद बैंकों ने इन डॉलर को आरबीआई (RBI) को सौंप दिया और बदले में रुपये ले लिये. इस कारण बाजार में डॉलर की आवक तेजी से बढ़ी और आरबीआई को इतनी बड़ी मात्रा में डॉलर कम करने पड़े.
एक तरफ रिजर्व बैंक की तरफ से डॉलर खरीद में रिकॉर्ड बना हुआ है. दूसरी तरफ, देश के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट भी दर्ज की जा रही है. पिछले कुछ हफ्ते से फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट का सिलसिला जारी है. 16 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में देश का फॉरेक्स रिजर्व 5.01 अरब डॉलर घटकर 721.02 अरब डॉलर रह गया. सितंबर महीने की शुरुआत में यह 785.71 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई पर था. इससे साफ है कुछ ही हफ्ते में इसमें करीब 65 अरब डॉलर की गिरावट आई. रुपये को भारी गिरावट से बचाने के लिए भी आरबीआई को बाजार में डॉलर की बिक्री करनी पड़ी.
रुपये की उतार-चढ़ाव और सिस्टम में नकदी को कंट्रोल करने के लिए आरबीआई ने बड़े लेवल पर फॉरवर्ड स्वैप का सहारा लिया. इस कारण रिजर्व बैंक की नेट फॉरवर्ड शॉर्ट पोजीशन पहली बार 200 अरब डॉलर के पार पहुंच गई. केवल एक महीने में ही इसमें 46.3% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. आरबीआई रुपये को स्थिर रखने के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ है.
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती के लिए आरबीआई की तरफ से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. पिछले दिनों डॉलर के मुकाबले गिरकर करीब 97 रुपये पर पहुंचने वाले रुपये का एक्सचेंज रेट 94.95 रुपये के करीब चल रहा है. रुपये को ज्यादा उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए आरबीआई (RBI) लगातार फॉरेक्स रिजर्व में हस्क्षेप कर रहा है, जिसके चलते देश का फॉरेक्स रिजर्व प्रभावित हुआ है.