SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

महाराष्ट्र में Ola-Uber-Rapido पर मंडराया संकट! लाइसेंस की डेडलाइन खत्म, क्या अब बंद होंगी कैब सर्विस?

फिलहाल राज्य सरकार ने Ola, Uber और Rapido की सेवाओं को तत्काल बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया है. लाइसेंस की समयसीमा खत्म होने के बाद सरकार अब इन कंपनियों के खिलाफ क्या कदम उठाएगी. इस पर चर्चा तेज हो गई है.

Written By Gaurav Singh
Published: Sep 03, 2026, 09:56 PM IST | Updated: Sep 03, 2026, 10:18 PM IST
Join

Maharashtra Cab Licence: महाराष्ट्र में ऐप-बेस्ड कैब सर्विस को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. Ola, Uber और Rapido ने राज्य सरकार की नई एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत जरूरी लाइसेंस हासिल नहीं किया है. लाइसेंस लेने की आखिरी तारीख 1 सितंबर थी. ये अब बीत चुकी है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महाराष्ट्र में इन कंपनियों की कैब सर्विस अब बंद हो जाएंगी?

4 सितंबर को होगी अहम बैठक

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक 4 सितंबर को Ola, Uber और Rapido के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने वाले हैं. इसके बाद परिवहन विभाग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी चर्चा करेगा. सरकार यह तय करेगी कि लाइसेंस प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाए. परिवहन मंत्री ने सवाल उठाया है कि कंपनियों ने पर्याप्त समय मिलने के बावजूद लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की. उनका कहना है कि नई एग्रीगेटर पॉलिसी पिछले महीने ही लागू की गई थी और कंपनियों के पास नियमों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय था.

अभी तुरंत बंद नहीं होंगी Ola-Uber-Rapido की कैब?

1 सितंबर की डेडलाइन खत्म होने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक Ola, Uber या Rapido की सेवाओं को तत्काल बंद करने का आदेश नहीं दिया है. इसका मतलब है कि फिलहाल इन ऐप्स के जरिए कैब बुकिंग जारी रह सकती है. हालांकि, अगर परिवहन विभाग बिना लाइसेंस चल रही सेवाओं के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देता है, तो इन कंपनियों को अपनी सेवाएं रोकनी पड़ सकती हैं यानी आने वाले दिनों में सरकार का फैसला इन तीनों कंपनियों के लिए काफी अहम रहने वाला है.

पुणे में क्या है स्थिति?

पुणे में भी Ola, Uber और Rapido की स्थिति पर नजर बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, Uber और Rapido ने ई-बाइक टैक्सी चलाने के लिए आवेदन किया था, जबकि Rapido ने कैब संचालन के लिए भी लाइसेंस मांगा है. फिलहाल, इनमें से किसी भी आवेदन को मंजूरी नहीं मिली है. पुणे RTO की अधिकारी अर्चना गायकवाड़ ने बताया कि विभाग राज्य परिवहन विभाग के निर्देशों का इंतजार कर रहा है. अगर राज्य सरकार कार्रवाई का आदेश देती है, तो बिना जरूरी मंजूरी के सेवाएं चला रहे एग्रीगेटर्स को संचालन रोकने के लिए कहा जा सकता है.

फिलहाल पुणे RTO को ऐसा कोई निर्देश नहीं मिला है. अधिकारियों के अनुसार, कंपनियों के आवेदनों की जांच की जा रही है और उन्हें कैब व ई-बाइक टैक्सी संचालन से जुड़े सभी निर्धारित नियमों को पूरा करना होगा. शर्तें पूरी नहीं होने पर आवेदन खारिज भी किए जा सकते हैं.

महाराष्ट्र की नई कैब पॉलिसी में क्या-क्या नियम हैं?

महाराष्ट्र सरकार की नई एग्रीगेटर व्यवस्था का उद्देश्य ऐप-बेस्ड कैब सेवाओं को ज्यादा व्यवस्थित और रेगुलेट करना है. इसके तहत एग्रीगेटर्स के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है. उन्हें यूनिक लाइसेंस आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी ULIN भी दिया जाएगा. यह लाइसेंस तीन साल के लिए वैध होगा. नई व्यवस्था में किराए को लेकर भी नियम तय किए गए हैं. रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) द्वारा मंजूर किराया बेस फेयर माना जाएगा. एग्रीगेटर्स इस बेस फेयर से अधिकतम 25 प्रतिशत कम किराया ले सकते हैं, जबकि तय शर्तों के तहत पीक डिमांड या सर्ज के दौरान बेस फेयर का अधिकतम 1.5 गुना तक किराया लिया जा सकता है.

ड्राइवरों को मिलेगा किराए का कम से कम 80% हिस्सा

नई पॉलिसी में ड्राइवरों की कमाई को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है. नियमों के अनुसार, ड्राइवर को यात्री से वसूले गए किराए का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा मिलना चाहिए. इसके अलावा ड्राइवरों के लिए लाइसेंस और बैज जरूरी होंगे. उन्हें अनिवार्य ट्रेनिंग भी पूरी करनी होगी. साथ ही कोई ड्राइवर लगातार 12 घंटे से ज्यादा काम नहीं कर सकेगा. ड्राइवरों को एक ही कंपनी तक सीमित रखने के बजाय उन्हें एक से ज्यादा एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के साथ काम करने की अनुमति होगी. इससे उन्हें अलग-अलग ऐप पर काम करने की ज्यादा आजादी मिल सकती है.

यात्रियों को मिलेगा 5 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस

नई व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है. इसके तहत यात्रियों के लिए 5 लाख रुपये तक के ट्रैवल इंश्योरेंस का प्रावधान किया गया है. कैंसिलेशन को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. अगर ड्राइवर बिना किसी वैध कारण के बुकिंग कैंसिल करता है, तो उस पर किराए का 10 फीसदी या 100 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, यात्री के कैंसिल करने पर किराए का 5 फीसदी या 50 रुपये तक का चार्ज निर्धारित किया गया था.

क्या नई पॉलिसी ओवरचार्जिंग की समस्या रोक पाएगी?

महाराष्ट्र में ऐप-बेस्ड कैब यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत किराए को लेकर रही है. कई यात्रियों का आरोप है कि पीक टाइम, खराब मौसम या ज्यादा डिमांड के दौरान कुछ ड्राइवर उन्हें ऐप पर बुकिंग कैंसिल करने और सीधे ज्यादा पैसे देने के लिए कहते हैं. ये समस्या पिछले करीब दो वर्षों से यात्रियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. ऐसे में सवाल यह है कि सिर्फ किराए की सीमा तय कर देने से क्या जमीन पर ओवरचार्जिंग की समस्या खत्म हो पाएगी?

नई पॉलिसी से अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आधार जरूर मिलेगा. लेकिन यात्रियों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या ऐप पर दिखाए गए किराए से ज्यादा पैसे मांगने की शिकायतों पर वास्तव में कार्रवाई होती है और कंपनियां ऐसे ड्राइवरों के खिलाफ क्या कदम उठाती हैं.

ड्राइवरों के लिए क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था ड्राइवरों के लिए फायदे और नई जिम्मेदारियां दोनों लेकर आई है. किराए का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा मिलने से उनकी प्रति ट्रिप कमाई बेहतर हो सकती है. वहीं, कई एग्रीगेटर के साथ काम करने की अनुमति मिलने से उन्हें ज्यादा विकल्प मिलेंगे. दूसरी तरफ, ड्राइवरों को लाइसेंस, बैज और ट्रेनिंग से जुड़े नियमों का पालन करना होगा. लगातार 12 घंटे से ज्यादा काम करने पर भी रोक होगी. किराए और कैंसिलेशन से जुड़े नियमों के सख्ती से लागू होने पर पीक डिमांड के दौरान ड्राइवरों के काम करने के तरीके में भी बदलाव आ सकता है.

Ola, Uber और Rapido के लिए क्या मायने रखता है?

लाइसेंस हासिल करने के बाद इन कंपनियों को महाराष्ट्र सरकार की ओर से तय कई नियमों का पालन करना होगा. इससे कंपनियों की प्रशासनिक और कंप्लायंस लागत बढ़ सकती है. वहीं, किराए और ड्राइवरों को भुगतान से जुड़े नियमों का असर इनके प्राइसिंग और कमीशन मॉडल पर भी पड़ सकता है. लाइसेंस मिलने के बाद कंपनियों को एक स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मिलेगा. तीन साल की लाइसेंस अवधि भी उन्हें राज्य में लंबे समय तक सेवाएं संचालित करने के लिए ज्यादा निश्चितता देगी.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES