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13 साल के लो पर Nike का शेयर, एक फैसला...और कंपनी के खाक हो गए 230 अरब डॉलर; 82% गिरी वैल्यूएशन

Nike Share Price: दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्स ब्रांड नाइकी का मार्केट कैप अपने ऑला टाइम हाई से 230 बिलियन डॉलर घट गया है. बिक्री में गिरावट, चीन के मार्केट में झटका और D2C मॉडल के फ्लॉप होने से कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी और रीस्ट्रक्चरिंग कर रही है. अब कंपनी को भारत के बेंगलुरु शहर से ज्यसादा उम्मीद है.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Oct 03, 2026, 12:07 PM IST | Updated: Oct 03, 2026, 12:08 PM IST
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Nike Restructuring Plan: 'Just Do It' स्लोगन के जरिये दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाला स्पोर्ट्स ब्रांड नाइकी (Nike) आज बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है. कंपनी की मार्केट वैल्यूएशन से 230 बिलियन डॉलर खाक हो गए. घटती बिक्री, गिरता प्रॉफिट, चीन के बाजार में करारी शिकस्त और गलत पॉलिसी के कारण इस दिग्गज ब्रांड की चमक फीकी पड़ती जा रही है. असर यह हो रहा है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी, रीस्ट्रक्चरिंग और बेंगलुरु में नया कैंपस बनाकर इस संकट से बाहर निकालने की कोशिश में जुटी है.

दशकों तक स्पोर्ट्स और फैशन मार्केट की शहंशाह बनी रही नाइकी (Nike) आज एक अलग मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है. कंपनी की ऑल आई से मार्केट वैल्यूएशन 230 बिलियन डॉलर नीचे आ गई है. 31 अगस्त को खत्म हुई तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 4 प्रतिशत घटकर 11.2 बिलियन डॉलर रह गया और प्रॉफिट 712 मिलियन डॉलर रह गया. निवेशकों को बड़ा झटका तब लगा जब कंपनी की तरफ से चेतावनी दी गई कि FY 2027 में भी उसकी बिक्री में गिरावट आ सकती है. इस घोषणा के बाद कंपनी के शेयर में गिरावट देखी जा रही है.

नाइकी में कौन सा संकट आया?

बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े स्पोर्ट्स ब्रांड को अचानक क्या हो गया? समस्या यह नहीं है कि लोगों ने स्पोर्ट्सवियर या जूते खरीदना बंद कर दिया. समस्या यह है कि नाइकी (Nike) की तरफ से ऐसे प्रोडक्ट कम बनाए जा रहे हैं, जिन्हें देखकर कस्टमर हर हाल खरीदने के लिए मजबूर हो जाएं. नाइकी का कहना है कि उसका कोर स्पोर्ट्स और रनिंग सेगमेंट सुधर रहा है. कंपनी के लाइफस्टाइल बिजनेस पर असर देखा जा रहा है.

चीन के बाजार में मिला झटका

नाइकी को सबसे ज्यादा नुकसान चीन में हुआ है. तिमाही आंकड़ों के अनुसार ग्रेटर चाइना से नाइकी के रेवेन्यू में 22 फीसदी की भारी गिरावट आई है. करेंसी-न्यूट्रल बेस पर देखें तो यह गिरावट 26 फीसदी तक पहुंच जाती है. चीन में पिछले एक क्वार्टर से नाइकी की बिक्री लगातार गिर रही है. इसका अहम कारण यह है कि चीन के लोकल स्पोर्ट्स ब्रांड्स अब काफी आगे बढ़ चुके हैं. इतना ही नहीं वे चाइनीज कस्टमर की बदलती पसंद को इंटरनेशनल ब्रांड्स से बेहतर समझ रहे हैं. नाइकी की डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटजी भी चीन में फ्लॉप साबित हुई है. नाइकी अब चीन में अपने ऑनलाइन सेल्स मॉडल को बदलने की तैयारी कर रहा है.

D2C सेल्स मॉडल भी फेल!

नाइकी ने पिछले कुछ सालों के दौरान डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल पर जबरदस्त काम किया. कंपनी ने होलसेल रिटेलर्स पर निर्भरता कम करके सीधे अपने ऐप और स्टोर्स से सामान बेचने की पॉलिसी तैयार की. लेकिन कंपनी के लिए यह फैसला गलत साबित हुआ. होलसेल स्टोर्स से हटने के कारण नाइकी के प्रोडक्ट उन दुकानों से गायब हो गए जहां आम कस्टमर खरीदारी के लिए जाता था. बिक्री गिरने पर नाइकी को गलती का अहसास हुआ और अब कंपनी फिर से होलसेल रिटेलर्स के साथ रिलेशन सुधारने पर काम कर रही है.

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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