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Cabinet Meeting Outcome : प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आज यानी 30 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट मीटिंग में तीन बड़े फैसले हुए हैं. रबी फसल के लिए MSP में बढ़ोतरी की गयी है केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि MSP के लिए कॉस्ट के ऊपर 50 परसेंट का मार्जिन रखा गया है. 2014 के बाद से एग्रीकल्चर में 4 प्रतिशत से ज्यादा कि ग्रोथ रही है.
देशभर के किसानों के हितों की रक्षा के साथ ही उनकी आय में बढ़ोतरी के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी दिशा में हमारी सरकार ने 2027-28 के मार्केटिंग सीजन के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी में वृद्धि को मंजूरी दी है। इससे देश के करोड़ों किसान भाई-बहनों को…
— Narendra Modi (@narendramodi) September 30, 2026
किसानों को अनुमानित तौर पर 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा. गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम (सैफ़्लावर) समेत छह रबी फसलों के MSP में बदलाव किया गया है. मंत्रिमंडल ने PM DHARA के लिए 1,86,405 करोड़ रुपये और दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के लिए 1,790 करोड़ रुपये को भी मंजूरी दी है.
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के MSP में ₹675 प्रति क्विंटल की ग्रोथ हुई है. नया MSP ₹7,215 है, जबकि सरसों-राई के MSP में ₹413 की बढ़ोतरी हुई है. नया MSP ₹6,613 प्रति क्विंटल है.
गेहूं के MSP में ₹25 की बढ़ोतरी हुई है. नया MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल हो गया है. सरकार के मुताबिक, सभी रबी फसलों के MSP को प्रोडक्शन लागत के कम से कम 1.5 गुना रखने की नीति के अनुरूप बढ़ाया गया है. लागत पर सबसे ज्यादा अनुमानित मार्जिन गेहूं में 106%, सरसों में 96%, मसूर में 92%, चने में 59%, जौ में 58% और कुसुम में 50% है. सरकार के मुताबिक MSP बढ़ाने का उद्देश्य किसानों को लाभकारी मूल्य देना और दलहन-तिलहन जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा देना है.

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, गेहूं की सरकारी खरीद 2014-15 से 2025-26 के दौरान बढ़कर 3715 LMT हुई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान ये 2254 LMT थी. छह रबी फसलों की कुल खरीद 2014-15 से 2025-26 में 3921 LMT हुई, जबकि 2004-05 से 2013-14 में 2302 LMT थी.
6 रबी फसलों के किसानों को MSP के तहत भुगतान भी बढ़ा है. अब ये ₹8.36 लाख करोड़ हो गया है, जबकि 2004-05 से 2013-14 में ये ₹2.65 लाख करोड़ था.
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा है कि समर्थन मूल्य के साथ किसानों के खर्च और बढ़ी महगाई का भी आंकड़ा जारी करना चाहिए. पश्चिम एशिया में तनाव के चलते किसानों को खरपतवारनाशक ,कीटनाशक डेढ़ गुना मूल्य पर मिल रहा है. डीजल के दाम में वृद्धि हुई है. इसके साथ ही सल्फर अन्य पोषक तत्त्वों के मूल्य में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है. लेकिन, भारत सरकार द्वारा गेहूँ के मूल्य में 25 रुपये की वृद्धि करते समर्थन मूल्य 2610 घोषित किया है. गेहूं के मूल्य में वृद्धि धोखा है.
कैबिनेट का एक और बड़ा फैसला PM DHARA को मंजूरी देना है. इसके लिए ₹1,86,405 करोड़ आवंटित किए गए हैं. ये जानकारी बैठक के बाद जारी प्रेजेंटेशन में दी गई. ये प्रोग्राम रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) तक पहुंच बढ़ाने और उसे तेज करने पर केंद्रित है. क्लीन-एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में सरकार की व्यापक पहल का हिस्सा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III' (GEC-III) योजना को मंजूरी दी है. इसका मकसद भारत के 'इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम' को मजबूत करना और राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के बीच 135 GW तक रिन्यूएबल एनर्जी के ट्रांसमिशन को आसान बनाना है. इस योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इसका कुल प्रोजेक्ट खर्च 1,86,405 करोड़ रुपये है. इसमें से 1,36,378 करोड़ रुपये GEC-III के तहत इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए तय किए गए हैं, जबकि 50,000 करोड़ रुपये 50 GWh के 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' को लगाने के लिए आवंटित किए जाएंगे.
कैबिनेट ने दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के लिए भी ₹1,790 करोड़ को मंजूरी दी है. इस सिस्टम में टेक्नोलॉजी-आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट टूल्स का इस्तेमाल करके राजधानी में ट्रैफिक मूवमेंट की निगरानी और मैनेजमेंट को बेहतर बनाने की उम्मीद है.