UPI पेमेंट पर MDR लगा तो क्या दुकानदार लेना बंद कर देंगे डिजिटल पेमेंट? स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के एक अध्ययन के मुताबिक, MDR फ्रेमवर्क लागू होने पर टियर-1 शहरों के 53% और टियर-2 व टियर-3 शहरों के 45% दुकानदार UPI पेमेंट लेना कम कर सकते हैं.
MDR on UPI Payment: टियर 1 शहरों के लगभग 53 प्रतिशत और टियर 2 और टियर 3 शहरों के 45-45 प्रतिशत दुकानदारों ने कहा है कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क लागू होता है, तो वे UPI पेमेंट लेना कम कर देंगे. इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस अध्ययन में ये बात सामने आयी है.
चार्ज ग्राहकों से वसूलेंगे दुकानदार
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के इस अध्ययन में ये भी पता चला है कि दुकानदार इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के बारे में सोच सकते हैं. सर्वे में शामिल टियर 1 शहरों के 30 प्रतिशत दुकानदारों ने कहा कि वे यह चार्ज ग्राहकों से वसूलेंगे, जबकि टियर 2 शहरों में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत और टियर 3 शहरों में 19 प्रतिशत रहा है.
ISB के सेंटर फॉर एनालिटिकल फाइनेंस (CAF) द्वारा किए गए इस अध्ययन के मुताबिक, ये जवाब बताते हैं कि मौजूदा नियमों के बारे में और अधिक जागरूकता फैलाने की जरूरत है. इन नियमों के तहत, दुकानदारों को ग्राहकों के बिल में MDR चार्ज जोड़ने की मनाही है.
अध्ययन में पाया गया कि सर्वे में शामिल सड़क किनारे सामान बेचने वाले दुकानदारों में से 67 प्रतिशत UPI पेमेंट स्वीकार करते हैं. लेकिन, इनमें से केवल 52 प्रतिशत लोगों ने ही प्रस्तावित MDR फ्रेमवर्क के बारे में सुना है.
सितंबर 2026 में घोषित MDR फ्रेमवर्क के तहत, 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने का प्रस्ताव है. वहीं, QR-आधारित पेमेंट के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक की कमाई करने वाले छोटे दुकानदारों को इससे छूट दी गई है.
15 अक्टूबर को लागू किया जाना था MDR
इसे मूल रूप से 15 अक्टूबर को लागू किया जाना था, लेकिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 13 अक्टूबर को इसे दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया. अभी तक इसे लागू करने की नई तारीख की घोषणा नहीं की गई है.
सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि अलग-अलग शहरों में UPI अपनाने की दर अलग-अलग है. टियर 1 शहरों में 82 प्रतिशत दुकानदार डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं, जबकि टियर 2 शहरों में ये आंकड़ा 66 प्रतिशत और टियर 3 शहरों में 64 प्रतिशत है. लेकिन, जागरूकता होने का मतलब ये नहीं है कि उन्हें ये भी समझ हो कि यह फ्रेमवर्क कहां लागू होता है.
MDR के बारे में जानने वाले वेंडरों में से टियर 1 के 48 प्रतिशत, टियर 2 के 46 प्रतिशत और टियर 3 के 33 प्रतिशत वेंडरों का मानना था कि ये शुल्क उन पर भी लागू होगा.
70% वेंडर करते हैं 2000 रुपये से अधिक का भुगतान
सर्वे में शामिल लगभग 70 प्रतिशत वेंडर अपने सप्लायरों को एक बार में 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करते हैं. इस तरह ये लेन-देन प्रस्तावित फ्रेमवर्क के दायरे में आते हैं. इसके अलावा, 10.4 प्रतिशत वेंडरों ने बताया कि सर्वे से पहले के 10 दिनों में उनके सप्लायरों ने उनसे UPI लेन-देन के लिए अतिरिक्त फीस देने को कहा था.