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Bullet Train : तरक्की की ऐसी कोई दुनिया नहीं है जहां भारत की दखल ना हो. भारत के साइंटिस्ट,भारत के इंजीनियर्स की काबिलियत संदेह से परे है. यही वजह है कि भारत चांद पर जा चुका है. भारत के सैटेलाइट्स मंगल ग्रह की सैर कर चुके हैं. लेकिन तेज रफ्तार विकास की इस दौड़ में कुछ ना कुछ हमेशा बचा रह जाता है. इसी में से एक है देश का ट्रांसपोर्ट सिस्टम. आज देश की चमचमाती सड़कें उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश को एक सूत्र में बांधती हैं. लेकिन फिर एक कमी थी जिसके पूरा होने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है.
भारत अगले साल अपने उस सपने को साकार करने जा रहा है जिसकी देश को सालों से प्रतीक्षा थी. 2015 के बाद शुरू हुए देश के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने में अड़चनें कम नहीं थी. लेकिन, इच्छा शक्ति और देश के इंजीनियरों के हुनर ने इस काम को आसान कर दिया. अगले साल देश को मिलने वाली ये सौगात बहुत खास है. ये देश की रफ्तार को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला गिफ्ट होगा.
किसी भी काम को करने की पहली शर्त होती है उसके लिए एक बेहतरीन प्लान. ये प्लान दो चीज़ों की बुनियाद पर खड़ा होता है पहली प्लानिंग और दूसरा पैसा. भारत के पास ये दोनों मौजूद है. लिहाजा थोड़ी देर से ही सही अब भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में नई क्रांति का दौर शुरू होने जा रहा है. इसे आप देश के परिवहन व्यवस्था का टर्निंग प्वाइंट कह सकते हैं.
जब देश का कोई नागरिक चीन, जापान, फ्रांस या स्पेन की यात्रा पर जाता था तो उसे एक अफसोस होता था कि काश हमारे देश में भी ऐसी ट्रेन चलती. हवा से बातें करती. घंटों की दूरिया मिनटों में तय होती. इसी सोच को देश जमीन पर उस ट्रेन के तौर पर पटरियों पर दौड़ाने जा रहा है जिसे बुलेट ट्रेन कहते हैं.
पटरी पर दौड़ाने से पहले पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन को हर इंतिहान से गुजारा जा रहा है. तैयारियां फाइनल राउंड में हैं. भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का नाम है B28 इस ट्रेन की रफ्तार इसके नाम में ही छिपी है. B-28 यानी इस ट्रेन की टॉप स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा होने वाली है.
लेकिन, इसकी शुरुआती गति लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है.
250 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली इस ट्रेन के कोच को किस तकनीक से तैयार किया जा रहा है और इसका निर्माण कार्य किस तेजी से आगे बढ़ रहा है. किसी भी बुलेट ट्रेन की सबसे पहली पहचान होती है. उसका ये अगला हिस्सा जिसे तकनीकी भाषा में 'नोज' कहते हैं. इसे सिर्फ खूबसूरत दिखने के लिए ऐसा नहीं बनाया गया है. जब कोई ट्रेन 280 की रफ्तार से दौड़ती है, तो हवा एक दीवार की तरह उसे पीछे धकेलती है. हवा के इसी प्रतिरोध को चीरने के लिए इसे ये खास 'एयरोडायनामिक' आकार दिया गया है, ताकि तेज गति पर भी ट्रेन स्थिर रहे और यात्रियों को झटके महसूस न हों. रफ्तार के साथ सबसे जरूरी चीज है- सुरक्षा और मजबूती. सामान्य ट्रेनों के मुकाबले बुलेट ट्रेन का मटेरियल बिल्कुल अलग होता है. इसके निर्माण में जिन धातुओं और शीट्स का इस्तेमाल हो रहा है, वो हल्की होने के साथ-साथ फौलाद जैसी मजबूत हैं.
फैक्ट्री में खास 'जिग्स और फिक्स्चर्स' तकनीक की मदद से कोच के अलग-अलग हिस्सों को मिलीमीटर की सटीकता के साथ जोड़ा जा रहा है. अंडरफ्रेम हो, साइडवॉल हो या ट्रेन की छत. हर जॉइंट पर दुनिया के सबसे सख्त गुणवत्ता मानकों यानी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का पालन हो रहा है.
बेंगलुरू के BEML कोच फैक्ट्री में भारत का ये मेगा प्रोजेक्ट आकार ले रहा है. अगले साल तक भारत की अपनी बुलेट ट्रेन पटरियों पर हवा से बातें करेंगी और जब 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से B28 दौड़ेगी तो इसकी गूंज पूरी दुनिया सुनेगी रेलवे की योजना मई-जून 2027 में इसे हाई स्पीड ट्रैक पर दौड़ाने की है. अगस्त 2027 तक कमर्शियल सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य है.
रेलवे मिनिस्ट्री की ओर से बताया गया है कि 508 किलोमीटर के मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के पूरा खुलने से पहले 97 km लंबे सूरत-वापी सेक्शन पर पहली बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी. BEML में अभी सिर्फ बॉडी बन रही है. इसके बाद कई टेस्ट जिनमें स्क्वीज टेस्ट वाइब्रेशन, ब्रेकिंग, HVAC, फिर फैक्ट्री में स्पीड टेस्ट होंगे.