कमजोर रुपये और महंगे पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाई भारत की कमाई, एक्सपोर्ट गिरा फिर भी 50% बढ़ी इनकम
दुनियाभर में चल रही जियो पॉलिटिकल टेंशन और महंगे क्रूड ऑयल के बीच भारत के एनर्जी मार्केट से राहत देने वाली खबर सामने आ रही है. भारत का निर्यात घटने के बावजूद देश के पास आने वाला पैसा 50 फीसदी बढ़ गया है.
मिडिल ईस्ट में चल रही टेंशन से क्रूड ऑयल के दाम इंटरनेशनल लेवल पर तेज बने हुए हैं. पिछले एक हफ्ते के दौरान इसमें रिकॉर्ड तेजी आई और ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा है. तेल की कीमत यह तेजी क्रूड की सप्लाई घटने और होर्मुज स्ट्रेट में हमलों के कारण देखी जा रही है. तेल सप्लाई कम होने का असर भारत की तरफ से निर्यात किये जाने वाले पेट्रोल-डीजल पर भी पड़ा है. हालांकि, इस सबके बीच राहत की बात यह है कि एक्सपोर्ट में गिरावट के बावजूद देश में भारी विदेशी मुद्रा आई है. मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) के दौरान पेट्रोलियम प्रोडक्ट के निर्यात से होने वाली कमाई में जबरदस्त उछाल देखा गया.
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार इस दौरान देश का फ्यूल एक्सपोर्ट 16 फीसदी गिर गया. लेकिन इससे होने वाली कमाई पहले के मुकाबले बढ़ गई है. एक्सपोर्ट में गिरावट के बावजूद देश की कमाई रुपये में बात करें तो पिछले साल के मुकाबले 50 फीसदी बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये के लेवल पर पहुंच गई. देश को होने वाली भारी-भरकम कमाई के पीछे दो कारण हैं. पहला कारण इंटरनेशनल लेवल पर एनर्जी मार्केट में आई भारी तेजी है. इन छह महीने के दौरान डीजल का रीजनल बेंचमार्क प्राइस 83 फीसदी और पेट्रोल का दाम 54 फीसदी चढ़ गया.
यूएस डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा रुपया
पेट्रोल-डीजल के एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई बढ़ने का दूसरा कारण यूएस डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना रहा है. एक साल पहले जहां रुपया एवरेज 86.44 प्रति डॉलर था. वहीं, इस साल इसका औसत गिरकर 95.17 के लेवल पर आ गया. इससे विदेशी मुद्रा के एक्सचेंज में देश को सीधा फायदा हुआ है. भारतीय रिफाइनरियों की तरफ से खासतौर पर डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल और नेफ्था आदि का निर्यात किया जाता है.
डीजल ने सबसे ज्यादा बढ़ाई कमाई
भारतीय रिफाइनरियों की तरफ से निर्यात किये जाने वाले पेट्रोलियम प्रोडक्ट में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी डीजल की रही. हालांकि, डीजल के एक्सपोर्ट वॉल्यूम में 19 फीसदी की गिरावट आई. लेकिन रुपये के लिहाज से देखें तो इससे होने वाली कमाई 58 फीसदी बढ़कर 1.2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. इंटरनेशनल मार्केट में डीजल का एवरेज प्राइस 151 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. इसके अलावा पेट्रोल के एक्सपोर्ट से होने वाली इनकम 21 फीसदी के उछाल के साथ 58,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
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बढ़ती घरेलू डिमांड और घटता एक्सपोर्ट वॉल्यूम
कुल एक्सपोर्ट की बात करें तो इसमें 16 फीसदी की कमी आई है और देश के अंदर फ्यूल की खपत तेजी से बढ़ी है. भारत में इस दौरान डीजल की खपत 5 फीसदी और पेट्रोल की खपत 7 फीसदी बढ़ गई है. हालांकि, रिफाइनरी प्रोडक्शन में मामूली गिरावट दर्ज की गई. घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी करने के बाद रिफाइनरियों के पास विदेशों में बेचने के लिए तेल कम बचा है. देश के कुल तेल निर्यात में से करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज की है. बाकी हिस्सा नायरा एनर्जी और एमआरपीएल का है.
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दाम में तेजी से रुपये पर दबाव
इजरायल-अमेरिका और ईरान में जंग छिड़ने के बाद से कच्चे तेल की कीमत में तेजी बनी हुई है. इस कारण क्रूड ऑयल के आयात के लिए पहले से ज्यादा डॉलर का भुगतान करना पड़ रहा है. विदेशी पूंजी का निकास बढ़ने के कारण भारतीय रुपये डॉलर के मुकाबले दबाव में है. तेल के दाम बढ़ने से घरेलू रिफाइनरियों की तरफ से डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है क्योंकि कच्चे तेल का भुगतान डॉलर में करना होता है.