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India Export to Europe: एक तरफ रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा था और दूसरी ओर भारत से भर भरकर हथियार, गोला-बारूद यूरोप पहुंच रहे थे. युद्ध के एक ओर भारत का दशकों पुराना मित्र राष्ट्र रूस है तो दूसरी ओर यूक्रेन, जिसकी मदद अमेरिका और यूरोपीय यूनियन कर रहे हैं. इस वॉर के शुरू होने के बाद भारत से यूरोप पहुंचने वाली हथियारों की खेप में 1600% की बढ़ोतरी हुई है. ये दावा ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में की है.
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 'मदर ऑफ ऑल डील' फाइनल हो चुकी है, दिसंबर 2026 में ये डील साइन होने वाली है. मार्च-अप्रैल 2027 से ये डील प्रभावी हो जाएगा. 27 देशों के समूह के साथ भारत के लिए एक विशाल बाजार तैयार हो जाएगा. India-EU Trade डील से पहले एक और बड़ी रिपोर्ट सामने आई है. ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 2022 में रूस-यूक्रेन वॉर शुरू होने के बाद भारत से यूरोप को हथियार सप्लाई में 1600% का उछाल आया है.
युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है. जो भारत कभी हथियार और डिफेंस का आयातक था, आज वो दुनिया के बड़े डिफेंस सप्लायर के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है. भारत के डिफेंड एक्सपोर्ट की डिटेल जानने से पहले ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट समझते हैं...
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने यूरोपीय देशों को करीब 8271 करोड़ रुपये के गोला-बारूद एक्सपोर्ट किए.
मार्च 2026 से लेकर अब तक भारत ने इजरायल को करीब 639 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया है. यह भारत के पिछले 6 साल के निर्यात के बराबर है. भारत ने इजराइल को विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन पार्ट्स, आर्टिलरी शेल, मोर्टार राउंड आदि की सप्लाई की है और तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है.

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय गोला-बारूदों की डिमांड यूरोप समेत दुनियाभर में बढ़ी है. युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय देशों में सेल्फ डिफेंस और हथियारों के स्टॉक भरने की होड़ मची हुई है. इन देशों ने 'रीआर्म यूरोप’ मिशन की शुरुआत कर दी. यूक्रेन की जरूरत और अपनी रक्षा डिमांड को पूरा करने के लिए यूरोप में डिमांड बढ़ी और भारत ने इस जरूरत को बेस्ट क्वालिटी, ऑन टाइम डिलीवरी और किफायती कीमत के रक्षा उत्पादों से भरा.
भारत सरकार के रक्षा सचिव, राजेश कुमार सिंह कहते हैं...
भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है. भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है.पिछले 10 सालों में भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में भारी बढ़ोतरी की हुई है.
भारत के पास विशाल रक्षा उद्योग है . निजी और सरकारी कंपनियां मिलकर यहां छोटे हथियार से लेकर बड़ी मिसाइलें, तोपखाने के सिस्टम, मिसाइल सिस्टम , डिफेंस अप्लायंस, गोला-बारूद, छोटे हथियार, हेलमेट और बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार कर घरेलू जरूरत के साथ-साथ निर्यात को बढ़ावा दे रही है.
भारत के डिफेंस इंडस्ट्री में 16 सरकारी कंपनियां (DPSU), करीब 840 बड़ी और मीडियम साइज प्राइवेट कंपनियां (MSMEs) और लगभग 17000 छोटी कंपनियां और हाई-टेक डिफेंस स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं.
भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण बेच रहा है. यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका, इजरायल समेत भारत के रक्षा निर्यात का दायरा बढ़ता जा रहा है. वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया, जो पिछले साल से 15.2% अधिक था. जिसमें 1.39 लाख करोड़ रुपये घरेलू डिफेंस इंडस्ट्रीज के लिए अलॉट किया गया. घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता खत्म हो सके.
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रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट

रक्षा क्षेत्र में भारच आत्मनिर्भर बन रहा है. मेक इन इंडिया की बदौलत स्वदेशी हथियार बन रहे हैं. 80 देशों को निर्यात किया जा रहा है. भारत के घातक 'मेड इन इंडिया' हथियारों में...

भारत धीरे-धीरे आयात पर अपनी निर्भरता को कम कर रहा है. उसने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा आयात रणनीति में बदलाव किया है. सोवियत संघ और रूस से अपनी निर्भरता को कम कर भारत पश्चिमी देशों की हिस्सेदारी को बढ़ा रहा है. भारत के रक्षा आयात में फ्रांस की हिस्सेदारी 15 % , इजरायल की हिस्सेदारी 15% पर पहुंच चुकी है.