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Israel Election: नेतन्याहू के खिलाफ किंगमेकर बनेंगी अरब पार्टियां, मुस्लिम नेताओं के हाथ आएगी सत्ता की चाबी?

Arab Parties Winning In Exit Polls: इजरायल में चुनाव को लेकर हुई वोटिंग के बाद सामने आए एग्जिट पोल के अनुमान में अरब पार्टियां अच्छा प्रदर्शन करती दिख रही हैं. अनुमान के मुताबिक, अरब नेतृत्व वाली प्रमुख पार्टियां संसद में 19 सीटें हासिल कर सकती हैं.

Israel Election: नेतन्याहू के खिलाफ किंगमेकर बनेंगी अरब पार्टियां, मुस्लिम नेताओं के हाथ आएगी सत्ता की चाबी?

Israel Arab Parties: इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव के बाद सामने आए एग्जिट पोल के अनुमानों से साफ संकेत मिलता है कि न तो मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और न ही उनके प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट की पार्टी को संसद में बहुमत मिलता दिख रहा है. ऐसे में कहा जा रहा है कि इनमें से किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों के समर्थन की जरूरत होगी. एग्जिट पोल के मुताबिक, इजरायल की अरब पार्टियां संसद में 19 सीटें जीत सकती हैं. 

एग्जिट पोल के आंकड़ों के मुताबिक, अरब नेतृत्व वाली प्रमुख पार्टियां जॉइंट लिस्ट और राआम 120 सदस्यों वाली इजरायली संसद (नेसेट) में 19 सीटें हासिल कर सकती हैं. हालांकि, चुनाव में अरब पार्टियों का प्रभाव इस बात पर निर्भर है कि विपक्षी नेताओं की ओर से उनकी भागीदारी या सरकार से बाहर रहकर उनके समर्थन को स्वीकार किया जाता है या नहीं. चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के सहयोग पर आपत्ति भी जताई गई थीं.  

एग्जिट पोल में अरब पार्टियों की स्थिति 


एग्जिट पोल के आंकड़ों के मुताबिक मुख्य अरब पार्टियों में से जॉइंट लिस्ट को 11 और यूनाइटेड अरब लिस्ट यानी राअम को 7 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, इजरायल के 'चैनल 13' के मुताबिक, नेतन्याहू की पार्टी को 50 और  यहूदी विपक्ष को 53 समेत अरब पार्टियों को 17 सीटें मिल सकती हैं. 

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गठबंधन बना पाएंगी अरब पार्टियां? 


राआम के नेता मंसूर अब्बास ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अंतिम चुनाव परिणाम नेतन्याहू विरोधी गुट को सरकार बनाने के लिए अहम 61 सीटें जीतने में सक्षम बनाएंगे. वहीं, शुरुआती वोटों के नतीजे आने से पहले अब्बास ने इजरायल के 'चैनल 12' को बताया,' हमारे पास जो संख्या है, उसके आधार पर कोई सरकार नहीं बन सकती. 

मंसूर

राआम पार्टी के पास वर्तमान में नेसेट में 5 सीटें है. यह साल 2021-2022 तक इजरायल की सत्ताधारी गठबंधन में शामिल थी. अब्बास ने कहा कि चुनाव से पहले और बाद में दोनों मुख्य गुटों ने उनकी पार्टी से संपर्क किया था. नेतन्याहू की विरोधी पार्टियों के बीच इस बात पर मतभेद चल रहा है कि वे अरब प्रतिनिधियों के साथ एकजुट होकर काम करेंगे या नहीं.

सरकार में शामिल होना चाहती हैं अरब पार्टियां? 


राअम पार्टी सरकार में शामिल होना चाहती है. वह नेतन्याहू को सत्ता से हटाने वाली नेफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाले गठबंधन में भी शामिल हुई थी. हालांकि, 'चैनल 12' के अनुमान के मुताबिक, राअम की 7 सीटों और यहूदी विपक्ष की 52 सीटों को मिलाकर कुल 59 सीटे ही होंगी. ऐसे में 61 सीटों का बहुमत दिलाने के लिए राअम अकेले काफी नहीं होगी. इसके लिए अन्य पार्टियों का समर्थन भी जरूरी है. 

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अरब राजनीतिक दलों का प्रमुख चुनावी गठबंधन जॉइंट लिस्ट ने भी नेतन्याहू की पार्टी छोड़ अन्य विपक्षी दलों को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की इच्छा जाहिर की है. हालांकि, यह समर्थन शर्तों और बातचीत पर ही निर्भर रहेगी. इस अरब पार्टी का समर्थन मिलने से विपक्षी नेतृत्व वाली अल्पमत सरकार को कामकाज में मदद मिल सकती है.  

सरकार बनाने में अरब पार्टियों की भूमिका 


बता दें कि इजरायल में जून 2021 में पहली बार कोई स्वतंत्र अरब पार्टी सरकार का हिस्सा बनी थी. यह तब हुआ था जब नेतन्याहू की सत्ता छीनने के लिए राअम पार्टी नेफ्ताली बेनेट और यैर लैपिड के गठबंधन में शामिल हुई थी. उस समय नेसेट में 4 सीटों वाली राअम ने 8 पार्टियों वाले गठबंधन को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

मंसूर

राअम ने भले ही गठबंधन में मुख्य भूमिका निभाई, लेकिन पार्टी का एक भी नेता मंत्री नहीं बना. अगले साल 2022 में यह गठबंधन टूट गया. 1990 के दशक में भी अरब पार्टियों ने बिना गठबंधन के यित्जाक राबिन सरकार को अपना समर्थन दिया था, जिससे सरकार को बहुमत बरकरार रखने में काफी मदद मिली थी.  

इजरायल में कौन हैं अरब लोग? 


इजरायल में रहने वाले अरबी उन लोगों के वंशज हैं, जो 1948 में अरब-इजरायल जंग के बाद इजरायल की ओर से बनाए गए बॉर्डर के अंदर ही रह गए थे. उस समय यहां की आबादी लगभग 12 लाख के बराबर थी. यहूदियों को छोड़ इजरायल की ये अरब आबादी साल 1966 तक मिलिट्री रूल के अंदर ही थी. 

israeli

1 साल बाद पूर्वी यरुशलम को अपने में मिलाने के बाद इजरायल ने वहां रहने वाले लाखों अरब लोगों को इजरायली नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे अधिकतर लोगों ने नहीं स्वीकारा. UN इसी इलाके को कब्जे वाला फलीस्तीनी क्षेत्र कहता है. यहां रहने वाले लोगों की जनगणना इजरायल-फलस्तीन दोनों में होती है. इजरायल में आज के समय में 21 प्रतिशत यानी तकरीबन 20 लाख अरब लोग रहते हैं, जिनमें पूर्वी यरुशलम में रहने वाले कुछ लाख लोगों को छोड़ बाकी सभी इजरायली नागरिक हैं. इजरायली अरब नागरिकों में अधिकतर सुन्नी मुसलमान हैं.  

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About the Author

Shruti Kaul

Shruti Kaul

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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