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Russia Oil Import: भारत ऊर्जा जरूरतों को आयात से पूरा करता है. जरूरत का 85 से 90 फीसदी तक कच्चे तेल का आयात करता है. खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद से भारत 40 से अधिक देशों से ऑयल इंपोर्ट कर रहा है, लेकिन रूस भारत का सबसे बड़ा पार्टनर बना रहा. अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद पर भारत पर 25 फीसदी टैरिफ तक लगाया, लेकिन भारत ने फिर भी रूस से तेल की खरीद बंद नहीं की. खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद रूस से होने वाला तेल आयात बढ़ गया, लेकिन अब इस इंपोर्ट में गिरावट का ग्राफ दिख रहा है.
भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने रूस से तेल की खरीद घटा दी है. नवंबर 2026 में रूसी तेल की खरीद में गिरावट आई है. दरअसल रूसी तेस पर मिलने वाला डिस्काउंट तो खत्म हुआ ही है, साथ ही साथ शिपिंग कॉस्ट बढ़ रहा है. जिसके चलते तेल कंपनियां रूसी तेल से दूरी बना रही है.
भारत कई बार ये कह चुका है कि कच्चे तेल को लेकर उसकी रणनीति तय है कि जहां से सस्ता तेल मिलेगा, भारत वहां से तेल खरीदेगा. बीपीसीएल के डायरेक्टर (फाइनेंस) वेत्सा रामकृष्ण गुप्ता ने कहा कि रूस से तेल खरीद में माल झुलाई की ऊंची लागत बड़ी चुनौती बनी हुई है. रूस से तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट भी खत्म कर दिया है. ऐसे में कंपनी ने नवंबर में रूस से तेल की खेप में कमी कर दी है. BPCLने जुलाई-सितंबर 2026 में अपनी कुल खरीद में करीब 37% तेल मॉस्को से खरीदा था. अब वो इसमें कटौती कर रहा है.

भारत ने तेल पर अपनी रणनीति बदल दी है. अब भारत ने रूस से क्रूड की खरीद कम कर मिडिल ईस्ट से खरीद बढ़ा दी है,
दरअसल चीन ने ईरानी तेल की उपलब्धता कम होने पर रूस से तेल की खरीद बढ़ा दी है. ऐसे में रूसी तेल की सप्लाई के लिए भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. ऐसे में डिस्काउंट कम हुआ है और भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर खाड़ी देशों से खेप बढ़ा दी है.
कच्चे तेल की कीमत ऊंची बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब है. महंगा तेल और ऊपर से माल ढुलाई की ऊंची लागत के कारण रूसी कच्चे तेल की खेप में कमी आई है. छूट के बजाए अक्टूबर में रूसी कच्चे तेल की कीमत स्टैंडर्ड कीमत से 12-13 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा थी.ऊंची कीमत ने रूसी तेल से दूरी बढ़ा दी है.
वहीं खाड़ी देशों से भारत को रूस के मुकाबले सस्ता तेल मिल रहा है. इराक के कार्गो स्टैंडर्ड बेंचमार्क से 25 डॉलर प्रति बैरल तक के डिस्काउंट मिल रहा है. सऊदी अरब, ईरान, कतर के अलावा वेनेजुएला जैसे देशों से तेल किफायती तेल खरीद रहा है. पश्चिम एशिया से मिलने वाला कच्चा तेल अब भारत के लिए व्यावसायिक रूप से ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है.
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका के 100 फीसदी टैरिफ का खतरा भी बना हुआ है. अमेरिका ने लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पास किया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. भारत भी इस लिस्ट में शामिल है. हालांकि रूस के साथ डीजल डील के बाद अमेरिका ने अप्रैल 2027 तक के लिए रूसी तेल के निर्यात पर अस्थायी छूट दी है. भारत को अगर प्रतिबंधित तेल की खरीदना है, तो उसके पास रूस और ईरान दो विकल्प है. अब किससे खरीद बढ़ानी है ये किफायती लागत पर निर्भर करेगा. 
भारत और रूस के बीच दशकों के तेल का व्यापार हो रहा है. अगर सिर्फ 2026 की बात करें, तो रूस से भारत के तेल आयात में भारी उतार-चढ़ाव दिखा है, लेकिन मॉस्को हमेशा से भारत का भरोसेमंद साथी बना रहा है.
सितंबर 2026 में रूसी तेल में 14% का फॉल आया और ये गिरकर 1.8 मिलियन डॉलर प्रति बैरल रोजाना पर पहुंच गया.