₹1 करोड़ फंड बनाने के लिए कितनी बचत है जरूरी? जानें 25, 35 और 45 की उम्र में NPS निवेश का पूरा गणित
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) निवेशकों को लंबी अवधि में नियमित कंट्रीब्यूशन के माध्यम से रिटायरमेंट फंड बनाने की अनुमति देती है.
Retirement Planning: आज के दौर में हर इंसान, जो नौकरी करता है वो साथ में रिटायरमेंट की प्लानिंग भी करता है. जब रिटायरमेंट के लिए करोड़ों रुपये जुटाने का लक्ष्य हो, तो ये काम मुश्किल लग सकता है. लेकिन, आप किस उम्र में निवेश शुरू करते हैं. इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ सकता है. नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) निवेशकों को लंबे समय तक नियमित योगदान देकर रिटायरमेंट फंड बनाने की सुविधा देता है.
मान लीजिए कि तीन लोग 25, 35 और 45 साल की उम्र में NPS में निवेश करना शुरू करते हैं. तीनों का लक्ष्य एक ही है. 60 साल की उम्र तक 1 करोड़ रुपये का फंड जमा करना, तो हर व्यक्ति को हर महीने कितना निवेश करना होगा?
इस गणना के लिए हमने 10 प्रतिशत का औसत वार्षिक रिटर्न माना है. NPS का रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है. इसलिए असल रिटर्न इससे कम या ज्यादा हो सकता है. ये गणना सिर्फ एक उदाहरण है, जो दिखाती है कि निवेश की अवधि का मासिक निवेश की रकम पर क्या असर पड़ता है.
25 साल की उम्र में निवेश
जो व्यक्ति 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है. उसके पास अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए 35 साल का समय होता है. 10 प्रतिशत के अनुमानित वार्षिक रिटर्न के साथ, हर महीने लगभग 2,634 रुपये का निवेश करके 60 साल की उम्र तक करीब 1 करोड़ रुपये जमा किए जा सकते हैं.
35 सालों में निवेशक अपनी जेब से कुल 11.06 लाख रुपये का योगदान देगा. बाकी की रकम निवेश पर मिलने वाले रिटर्न से आएगी. यहीं पर जल्दी निवेश शुरू करने का बड़ा फायदा दिखता है. हर महीने किया गया एक छोटा सा निवेश भी कई दशकों तक कंपाउंड (ब्याज पर ब्याज) होकर काफी बढ़ जाता है.
35 साल की उम्र में निवेश
अब मान लीजिए कि कोई व्यक्ति 10 साल बाद यानी 35 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है. इस निवेशक के पास 1 करोड़ रुपये जमा करने के लिए केवल 25 साल हैं. 10 प्रतिशत के उसी अनुमानित रिटर्न के हिसाब से अब हर महीने लगभग 7,537 रुपये का निवेश करना होगा. गणना के मुताबिक, 25 सालों में कुल निवेश की गई रकम लगभग 22.61 लाख रुपये होगी.
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इस तरह, निवेश शुरू करने में 10 साल की देरी करने से हर महीने निवेश की जाने वाली रकम लगभग 2,634 रुपये से बढ़कर 7,500 रुपये से ज्यादा हो जाती है. ये 25 साल की उम्र में शुरुआत करने वाले व्यक्ति के लिए जरूरी मासिक निवेश से लगभग तीन गुना है.
45 साल की उम्र में निवेश
45 साल की उम्र में शुरुआत करने वाले व्यक्ति के लिए यह अंतर और भी बड़ा हो जाता है. 60 साल की उम्र तक पहुंचने में केवल 15 साल बचे होने पर, 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य पाने के लिए जरूरी मासिक निवेश बढ़कर लगभग 24,127 रुपये हो जाता है (यह मानते हुए कि सालाना रिटर्न 10 प्रतिशत मिलता है). गणना के अनुसार, इन 15 वर्षों के दौरान निवेशक को कुल लगभग 43.43 लाख रुपये का निवेश करना होगा.
नौ गुना से भी ज्यादा निवेश
25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले व्यक्ति की तुलना में 45 साल की उम्र में शुरुआत करने वाले व्यक्ति को 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य पाने के लिए हर महीने नौ गुना से भी ज्यादा निवेश करना होगा.
- 25 साल की उम्र में शुरुआत: लगभग 2,634 रुपये प्रति माह
- 35 साल की उम्र में शुरुआत: लगभग 7,537 रुपये प्रति माह
- 45 साल की उम्र में शुरुआत: लगभग 24,127 रुपये प्रति माह
ये आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि लंबे समय के निवेश में 'समय' सबसे बड़े फायदों में से एक क्यों है. जल्दी शुरुआत करने पर हर महीने बहुत बड़ी रकम निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती. जरूरी ये है कि पैसे को बढ़ने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए. निवेशकों को एक और बात ध्यान में रखनी चाहिए. आज के 1 करोड़ रुपये और कई दशकों बाद मिलने वाले 1 करोड़ रुपये की क्रय शक्ति (खरीदने की क्षमता) एक जैसी नहीं होगी, क्योंकि महंगाई (इन्फ्लेशन) बढ़ेगी.
इसलिए, रिटायरमेंट के लक्ष्य की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए और उसे बढ़ाया जाना चाहिए. NPS से मिलने वाला रिटर्न भी तय या गारंटीड नहीं होता है. अंत में मिलने वाली कुल रकम बाजार के परफॉरमेंस, एसेट एलोकेशन (निवेश का बंटवारा) और निवेश की अवधि के दौरान मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करेगी.