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प्रतिबंधों के बीच 'मास्टरस्ट्रोक', रूसी तेल से भारत की बंपर कमाई, यूरोप के साथ 43% बढ़ा ईंधन का कारोबार

CREA (सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में भारतीय रिफाइनरियों द्वारा उत्पादित ईंधन के निर्यात में जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया है.

Written By Gaurav Singh
Published: Oct 18, 2026, 06:13 PM IST | Updated: Oct 18, 2026, 06:36 PM IST
Image Credit: रूसी कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करती हैं भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनरी | सोशल मीडिया/X
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सितंबर में रूसी कच्चे तेल (क्रूड) को रिफाइन करने वाली रिफाइनरियों से पश्चिमी देशों को होने वाला ईंधन निर्यात, पिछले महीने की तुलना में 43% बढ़कर 1 अरब यूरो (1.2 अरब डॉलर) हो गया है. ये जानकारी 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (CERA) की रिपोर्ट में सामने आयी है. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत, रूस से कच्चा तेल लगातार खरीद रहा है और तेल को रिफाइनरियों में प्रोसेस करके तैयार पेट्रोलियम प्रोडक्ट पश्चिमी देशों को बेच रहा है.

इन शिपमेंट में भारत, तुर्की और ब्रुनेई शामिल थे. इसमें यूरोपीय संघ (EU) ने 667 मिलियन यूरो के तेल उत्पादों का आयात किया है. ऑस्ट्रेलिया ने 168 मिलियन यूरो, अमेरिका ने 154 मिलियन यूरो और न्यूजीलैंड ने 19 मिलियन यूरो के उत्पादों का आयात किया है. CREA का अनुमान है कि 295 मिलियन यूरो के प्रोडक्ट्स रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किए गए थे.

गुजरात की जामनगर रिफाइनरी ने इसमें अहम भूमिका निभाई. इस महीने EU बंदरगाहों पर उतारे गए सात कार्गो में से छह इसी रिफाइनरी से आए थे. अमेरिका को होने वाले निर्यात में भी इसी रिफाइनरी का हिस्सा सबसे बड़ा रहा. ये 122 मिलियन यूरो का था. जुलाई से सितंबर के बीच जामनगर के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 32% थी.

EU ने जनवरी 2026 से रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किए गए तेल उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. हालांकि, 'नेट क्रूड एक्सपोर्टर्स' (शुद्ध कच्चा तेल निर्यातक) को दी गई छूट के कारण, भारत जैसे देशों में रिफाइन किए गए उत्पाद यूरोपीय बाजारों तक पहुंच पा रहे हैं.

रूसी कच्चे तेल का आयात 13% गिरा

CREA ने सुझाव दिया है कि ये प्रतिबंध उन रिफाइनरियों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए, जिन्होंने पिछले छह महीनों में रूसी कच्चे तेल को रिफाइन किया है. ये अभी केवल इस समूह का एक सुझाव है, जिसे EU की नीति के रूप में नहीं अपनाया गया है. 

सितंबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 13% गिर गया है. ये लगातार दूसरा महीना है जब इसमें गिरावट आई है और ये अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है.

तेल खरीद में गिरावट

जामनगर में आयात 27%, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की पारादीप रिफाइनरी में 21% और नायरा एनर्जी की वाडिनार फैसिलिटी में 8% कम हुआ है. रूसी कच्चे तेल के आयात के मामले में वाडिनार ने जामनगर को पीछे छोड़ दिया और भारत का सबसे बड़ा आयातक बन गया. गिरावट के बावजूद भारत रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बना रहा. सितंबर में भारत ने रूस से 4.1 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे. इसमें से 3.6 अरब यूरो (कुल खरीद का 88%) कच्चे तेल का था, जबकि बाकी हिस्सा कोयले और तेल उत्पादों का था.

क्या है केप्लर (Kpler) का अनुमान?

भारत की खरीद में आई इस गिरावट के पीछे सप्लाई में कमी, चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पश्चिमी देशों का दबाव जैसे कारण बताए गए हैं. केप्लर का अनुमान है कि अक्टूबर में भारत का रूस से तेल आयात लगभग 18 लाख से 19 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर पर बना रहेगा.

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जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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