HDFC Bank Issue : मार्केट वैल्यू के हिसाब से भारत के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक की एक आंतरिक जांच में ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बैंक की गोपनीय बिजनेस रणनीतियों और अहम जानकारियों को बाहरी लोगों के साथ साझा किया है. इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने ये बात बताई है.
ET की रिपोर्ट के मुताबिक, ये अधिकारी बैंक के कुछ प्रमुख बिजनेस और कामकाज की देखरेख करते हैं. गोपनीयता बनाए रखने के लिए सूत्रों ने लोगों ने अपना नाम न बताने का अनुरोध किया है.
सूत्रों ने बताया कि HDFC ने एक आंतरिक जांच के दौरान इन अधिकारियों की पहचान की. ये जांच तब शुरू हुई थी जब बैंक के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी लीक होने की आशंका हुई. बैंक अभी भी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इन जानकारियों का गलत इस्तेमाल किया गया है.
HDFC बैंक के एक प्रवक्ता ने आंतरिक समीक्षा की बात तो मानी, लेकिन इसके नतीजों या इसमें शामिल अधिकारियों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है. प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए कहा, 'हमारी नीतियों के अनुसार इस मामले में सभी जरूरी तथ्यों को इकट्ठा करने और उनका मूल्यांकन करने के लिए एक आंतरिक समीक्षा चल रही है. समीक्षा पूरी होने के बाद, जो भी नतीजे सामने आएंगे. उनके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी.'
बैंक ने कहा कि वो नैतिकता और गवर्नेंस के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और नियमों के उल्लंघन की किसी भी रिपोर्ट को गंभीरता से लेता है. ये समीक्षा HDFC बैंक के लिए एक बेहद संवेदनशील समय पर हो रही है. लगभग 115 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू वाले इस बैंक ने पिछले तीन दशकों में अपनी एक ऐसी छवि बनाई है, जो HDFC बैंक प्रबंधन, मजबूत आंतरिक नियंत्रण और लगातार मुनाफा कमाने के लिए जानी जाती है.
इस साल बैंक के शेयरों की कीमत में लगभग 28% की गिरावट आई है. सूत्रों के मुताबिक, इस जांच और इसके नतीजों की जानकारी इस साल की शुरुआत में सीनियर मैनेजमेंट को दी गई थी, जिसमें बोर्ड के कुछ सदस्य भी शामिल थे. दोनों अधिकारियों को इन नतीजों के बारे में औपचारिक रूप से बता दिया गया है. लेकिन, अभी ये साफ नहीं है कि उनके खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
इन नतीजों से अनूप बागची के सामने चुनौतियां और बढ़ गई हैं. बागची पहले ICICI ग्रुप से जुड़े रहे हैं. 27 अक्टूबर को HDFC बैंक के मुख्य कार्यकारी (CEO) का पद संभालने वाले हैं. हाल के महीनों में, HDFC के भीतर के मतभेद सबके सामने आ गए हैं. मार्च में तत्कालीन चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफे का कारण व्यक्तिगत और बैंक के कुछ कामकाज के तरीकों के बीच मतभेद को बताया था, बाद में बैंक द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र कानूनी रिव्यू में कहा गया कि उनकी चिंताएं सही साबित नहीं हुईं.
बागची की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब मौजूदा CEO शशिधर जगदीशन ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए दूसरा कार्यकाल न लेने का निर्णय लिया है. जगदीशन छह साल तक इस पद पर रहने के बाद अब हट रहे हैं. बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और सबसे लंबे समय तक काम करने वाले अधिकारियों में से एक कैजाद भरूचा ने भी पद से इस्तीफा दे दिया है.
HDFC बैंक 1994 से काम कर रहा है. ये बैंक उस समय अस्तित्व में आया जब देश ने अपने वित्तीय क्षेत्र को निजी प्रतिस्पर्धा के लिए खोला था. तब से ये बैंक अंतरराष्ट्रीय फंड मैनेजरों के लिए निवेश का एक पसंदीदा विकल्प बन गया है. ये भारत की बढ़ती आय और उपभोक्ता ऋण (कंज्यूमर क्रेडिट) के विस्तार में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं.