भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /बिज़नेस
  • /IDBI के बाद इन 4 बैंकों में हिस्सेदारी क्यों बेचने जा रही सरकार, क्या है प्लान, कस्टमर्स पर क्या होगा असर?

IDBI के बाद इन 4 बैंकों में हिस्सेदारी क्यों बेचने जा रही सरकार, क्या है प्लान, कस्टमर्स पर क्या होगा असर?

सरकार की तरफ से देश के चार बड़े बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 75 फीसदी पर लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इन चार बैंकों में सेंट्रल बैंक, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक का नाम शामिल है. इस बड़े कदम से बैंकिंग सेक्टर पर क्या असर पड़ने वाला है?

Written ByKriyanshu Saraswat
Published: Oct 23, 2026, 10:25 AM IST|Updated: Oct 23, 2026, 01:02 PM IST
joinshare
IDBI के बाद इन 4 बैंकों में हिस्सेदारी क्यों बेचने जा रही सरकार, क्या है प्लान, कस्टमर्स पर क्या होगा असर?
Image Credit: (AI / प्रतीकात्मक फोटो) सरकार इन बैंकों में पब्लिक शेयर बढ़ाने के लिए एक्टिव हो गई है.

About the Author

Kriyanshu Saraswat

Kriyanshu Saraswat

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
'ब्लैक डे' से 'जश्न के उत्सव' तक... BJP ने कैसे विलय की वर्षगांठ को 'नए कश्मीर' के जश्न में बदला?

'ब्लैक डे' से 'जश्न के उत्सव' तक... BJP ने कैसे विलय की वर्षगांठ को 'नए कश्मीर' के जश्न में बदला?

2

कल से बदल जाएगा रेलवे का नियम, लाइन में लगकर ट्रेप टिकट लेने वालों को मिलेगी यह खुशखबरी

3

कोटा में 16 साल के JEE स्टूडेंट ने किया सुसाइड, 6 महीने पहले करने आया था तैयारी

4

धनबाद में जमीन विवाद में दौलतराम की धारदार हथियार से हत्या, गांव के ही लोगों पर आरोप

5

अनंत सिंह की भविष्यवाणी पर JDU का करारा पलटवार, श्याम रजक बोले, पहले अपना भविष्य तो देख लेते

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के करीब 61 प्रतिशत शेयर कनाडा की कंपनी को बेचने की मंजूरी दिये जाने के बाद सरकार इसी तरह की एक और बड़ी तैयारी कर रही है. सरकार चार और पीएसयू बैंकों में हिस्सेदारी कम करने का प्लान कर रही है. जिन बैंकों में हिस्सेदारी कम करने की प्लानिंग पर काम चल रहा है, उनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक का नाम बताया जा रहा है. ऐसा सरकार की तरफ से सेबी के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम के तहत किये जाने का प्लान है. लेकिन सरकार ऐसा क्यों कर रही है, इससे क्या बदल जाएगा? ऐसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब आपको जानना जरूरी है.

इन चारों ही बैंकों में सरकार ने अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 75 फीसदी करने का प्रोसेस शुरू कर दिया है. अगले एक साल के दौरान ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत सरकार अपनी हिस्सेदारी को शेयर बाजार में बेचने का प्लान कर रही है. ईटी में प्रकाशित खबर के अनुसार सरकार पब्लिक सेक्टर बैंकों के इंटीग्रेशन पर भी काम कर रही है. इसके तहत दो और सरकारी बैंकों का प्राइवेटाइजेशन किया जा सकता है. यह प्राइवेटाइजेशन उसी तरह से हो सकता है, जिस तरह आईडीबीआई बैंक को लेकर कदम उठाया गया है. लेकिन इससे पहले इन बैंकों में हिस्सेदारी को घटाकर 75 फीसदी पर लाया जाएगा. यानी प्राइवेटाइजेशन के कदम  पर आगे बढ़ने में अभी समय लगेगा.

दिवाली पर युवाओं को मिलेगा तोहफा? सरकारी बैंक लाएंगे नई इन्वेस्टमेंट स्कीम; कैसे होगा फायदा?

सरकार की बैंकों में कितनी हिस्सेदारी?

इन चारों बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी काफी है और इनमें हिस्सेदारी को घटाकर 75 फीसदी पर लाने के लिए बड़ी मात्रा में शेयर की बिक्री करनी होगी.

banks

अभी तक सरकार ने बैंकों को सेबी के 25 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम से छूट दे रखी थी. लेकिन इस समयसीमा के निकलने के बाद सरकार की तरफ से अगला नोटिफिकेशन जारी किये जाने की उम्मीद की जा रही है. ऐसे में सरकार इन बैंकों में पब्लिक शेयर बढ़ाने के लिए एक्टिव हो गई है. पब्लिक फ्लोट बढ़ने से बैंकों की वैल्यूएशन में भी सुधार होने की उम्मीद है.

हिस्सेदारी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

सरकार का प्लान आने वाले समय में देश के अंदर 3 से 4 बड़े सरकारी बैंकों को ही रखना है. सरकार देश के बैंकों को दुनिया के टॉप 10 बैंकों में शामिल करना चाहती है. अभी देश का एक भी बैंक टॉप 10 में शामिल नहीं है. इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनो एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड का मर्जर किया गया था. अपने इस कदम में कामयाबी के लिए सरकार मर्जर और कंसोलिडेशन पर भी काम कर रही है. इस प्रोसेस के दौरान निजीकरण के लिए दो और बैंकों की पहचान किये जाने की उम्मीद है. आईडीबीआई बैंक से जुड़ी डील सामने आने के बाद सरकार बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है.

सरकारी बैंकों में विदेशी निवेश बढ़ाने की तैयारी, 20 से बढ़ाकर 49% करने का प्लान; RBI भी है रेडी

दुनिया के टॉप 10 बैंक

दुनिया के शीर्ष 10 बैंकों में चीन के पांच बैंक शामिल हैं. पहले नंबर से लेकर चौथे नंबर तक लिस्ट में चीन के बैंकों का कब्जा है.

  • इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना
  • चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक
  • एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना
  • बैंक ऑफ चाइना
  • जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी
  • बैंक ऑफ अमेरिका
  • बीएनपी पारिबा
  • एचएसबीसी होल्डिंग्स
  • क्रेडिट एग्रीकोल ग्रुप
  • पोस्टल सेविंग्स बैंक ऑफ चाइना

दो बैंकों को नाम किया गया सजेस्ट

नीति आयोग तरफ की तरफ से पहले भी प्राइवेटाइजेशन के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को शॉर्टलिस्ट किया गया था. अभी ऊपर बताए गए चारों बैंकों में हिस्सेदारी बेचने का फैसला सीधे तौर पर प्राइवेटाइजेशन का नहीं है. यह भी शुरुआती तौर पर सेबी के नियमों को पूरा करने की कोशिश है. यदि आने वाले समय में बैंकों के प्राइवेटाइजेशन पर आगे बढ़ा जाता है तो मौजूदा कानून में बदलाव करने की जरूरत होगी. बैंकों का प्राइवेटाइजेशन करने के लिए बैंकिंग अधिनियम में बदलाव करना होगा. बैंकों को 25% मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम से पहले ही छूट मिली हुई थी, इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है.

आईडीबीआई डील के बाद चर्चा तेज

आईडीबीआई बैंक की डील के बाद बैंकों के प्राइवेटाइजेशन को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कनाडाई बिलेनियम प्रेम वत्स ने आईडीबीआई में 60.72 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का करार किया है. यह डील करीब 52878 करोड़ रुपये की है. सरकार बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम करके प्राइवेट बैंकों को बढ़ावा देने के लिए लगातार इस तरह के कदम उठा रही है.

निवेशकों पर क्या होगा असर?

चारों सरकारी बैंकों में यदि सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाकर पब्लिक शेयरहोल्डिंग को बढ़ावा देती है, तो निवेशकों को संबंधित शेयरों में ज्यादा लिक्विडिटी और टांसपेरेंसी देखने को मिलेगी. इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में कॉम्पिटीशन बढ़ेगा और सर्विस में भी सुधार आएगा. सरकार के कदम से आने वाले महीनों में बैंकिंग सेक्टर में हलचल देखने को मिल सकती है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
IDBI Bank