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Explainer: क्यों क्रेडिट कार्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे Gen Z? नए यूजर्स में 50% युवा, जानिए खर्च और कर्ज लेने का क्या है ट्रेंड?

एक स्टडी के मुताबिक, 2024 में पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले 24 से 30 साल की उम्र के Gen Z यूजर्स में से 31% के पास पहले से ही कम से कम दो एक्टिव क्रेडिट एकाउंट थे.

Explainer: क्यों क्रेडिट कार्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे Gen Z? नए यूजर्स में 50% युवा, जानिए खर्च और कर्ज लेने का क्या है ट्रेंड?
Image Credit: Gen Z यूजर्स ने अपना पहला क्रेडिट कार्ड मिलने के तुरंत बाद अधिक खर्च किया और कर्ज लिया है. (Photo: AI)

Gen Z Credit Card Users : भारत का क्रेडिट कार्ड मार्केट अब केवल बड़े शहरों के उन लोगों तक सीमित नहीं है जो पहले से ही लोन ले चुके हैं. अब युवा यूजर्स, छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग भी बड़ी संख्या में इस बाजार से जुड़ रहे हैं. इनमें से कई लोगों के नाम पर पहले से ही अन्य लोन मौजूद हैं.

ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की एक नई स्टडी, जिसका शीर्षक ('बियॉन्ड द स्वाइप 2026: भारत क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट के रूप में कार्ड का इस्तेमाल कैसे करता है' (Beyond the Swipe 2026: How India Uses Card as a Credit Instrument) के अनुसार मार्च 2026 तक क्रेडिट कार्ड लेने वाले नए यूजर्स में से आधे लोग 30 साल या उससे कम उम्र के थे.

ग्रामीण क्षेत्रों से कितने हैं यूजर्स?

वहीं, 46% यूजर्स शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से थे. ये नतीजे बताते हैं कि भारतीयों के फॉर्मल क्रेडिट तक पहुंचने और उसके इस्तेमाल के तरीके में बदलाव आया है. पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वाले कई लोगों के पास पहले से ही लोन लेने का अनुभव मौजूद है.

पिछले एक दशक में हुआ क्रेडिट कार्ड मार्केट का विस्तार

पिछले एक दशक में भारत के क्रेडिट कार्ड मार्केट में काफी विस्तार हुआ है. क्रेडिट कार्ड धारकों की संख्या 3.6 गुना बढ़कर मार्च 2016 के 1.4 करोड़ से मार्च 2026 में 5.2 करोड़ हो गई है. इसी अवधि में क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि और भी तेजी से बढ़ी. ये 40,000 करोड़ रुपये से 8.3 गुना बढ़कर 3.1 लाख करोड़ रुपये हो गई है. एक्टिव क्रेडिट कार्डों की संख्या भी 5 गुना बढ़कर 2.1 करोड़ से 10.7 करोड़ हो गई है. इस दशक में हर कार्ड होल्डर पर औसत बकाया राशि लगभग दोगुनी होकर 31,000 रुपये से 65,000 रुपये हो गई है.

स्टडी में ये भी पाया गया कि मार्च 2026 तक भारत में क्रेडिट-एक्टिव कंज्यूमर के बीच क्रेडिट कार्ड की पहुंच (पेनेट्रेशन) 25% थी. ये आंकड़ा UK (70%), कोलंबिया (62%) और हांगकांग (98%) की तुलना में कम है. ये दर्शाता है कि यहां अभी और विकास की काफी गुंजाइश है.

18% के पास 'कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन' 

कई युवा भारतीय पहले से ही अन्य तरह के लोन लेने के बाद अब क्रेडिट कार्ड मार्केट में कदम रख रहे हैं. 2024 में अपना पहला क्रेडिट कार्ड लेने वाले 24 से 30 साल की उम्र के 'जेन Z' (Gen Z) यूजर्स में से 31% के पास पहले से ही कम से कम दो क्रेडिट खाते मौजूद थे. इनमें से केवल 30% लोगों का ही पहले कोई क्रेडिट अनुभव नहीं था. इसकी तुलना में 2018 में जब इसी उम्र के 'मिलेनियल्स' ने क्रेडिट कार्ड बाजार में प्रवेश किया था, तो उनमें से 56% लोगों का कोई पिछला क्रेडिट अनुभव नहीं था.

स्टडी में ये भी पाया गया कि अपना पहला क्रेडिट कार्ड लेते समय इन 'जेन Z' यूजर्स में से 18% के पास 'कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन' (उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के लिए लिया गया लोन) था, जबकि 23% के पास पहले से ही एक छोटा 'पर्सनल लोन' मौजूद था.

युवा कर्जदार तेजी से क्रेडिट ले रहे हैं?

'जेन Z' यूजर्स ने अपना पहला क्रेडिट कार्ड मिलने के तुरंत बाद ही अधिक खर्च करते हैं और कर्ज भी तुरंत लेते हैं. इस पीढ़ी के पहली बार क्रेडिट कार्ड लेने वालों में से लगभग 28% लोगों पर, कार्ड लेने के पहले तीन महीनों के भीतर ही 25,000 रुपये से अधिक का बकाया हो गया था. 2018 में बाजार में आए इसी उम्र के 'मिलेनियल्स' के मामले में ये आंकड़ा लगभग 20% था.

पहला कार्ड लेने के बाद भी कर्ज लेने का सिलसिला जारी रहा. 'जेन Z' यूजर्स में से लगभग 69% ने अपना पहला क्रेडिट कार्ड मिलने के 12 महीनों के भीतर कोई अन्य क्रेडिट प्रोडक्ट (जैसे लोन या दूसरा कार्ड) ले लिया है. इसकी तुलना में पहले के 'मिलेनियल्स' ग्रुप में ये आंकड़ा 55% था. जिन 'जेन Z' उपभोक्ताओं ने कोई अन्य क्रेडिट प्रोडक्ट लिया. 

अपने क्रेडिट पोर्टफोलियो में विविधता ला रहे हैं कर्जदार

स्टडी से ये पता चला है कि एक दशक पहले की तुलना में अब यूजर्स के कुल कर्ज पोर्टफोलियो में क्रेडिट कार्ड का हिस्सा कम हो गया है, क्योंकि कर्जदार अब कई तरह के क्रेडिट प्रोडक्ट्स का उपयोग कर रहे हैं.

38% है एक्टिव क्रेडिट कार्डों की हिस्सेदारी

मार्च 2016 में कंजप्शन से जुड़े कुल क्रेडिट एकाउंट्स में एक्टिव क्रेडिट कार्डों की हिस्सेदारी 56% थी. मार्च 2026 तक ये हिस्सेदारी घटकर 38% रह गई. कुल कंजप्शन-आधारित क्रेडिट बैलेंस में क्रेडिट कार्ड बैलेंस का हिस्सा भी 36% से घटकर 26% रह गया. ऐसे उपभोक्ताओं का हिस्सा जिनके पास अपने कर्ज पोर्टफोलियो में केवल क्रेडिट कार्ड थे. 50% से गिरकर 33% हो गया है. वहीं, ऐसे कर्जदारों का अनुपात जिनके पोर्टफोलियो में अन्य उपभोग-आधारित लोन भी शामिल थे. 16% से बढ़कर 32% हो गया है. तीन या उससे अधिक क्रेडिट कार्ड रखने वाले यूजर्स की संख्या भी बढ़ी है. पिछले एक दशक में इनका हिस्सा 12% से बढ़कर 22% हो गया है.

ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावेश जैन ने कहा कि बाजार का स्वरूप उन कर्जदारों से तय हो रहा है जो क्रेडिट कार्ड के साथ-साथ छोटे पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और अन्य अल्पकालिक क्रेडिट उत्पादों का भी उपयोग कर रहे हैं.

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About the Author

Gaurav Singh

Gaurav Singh

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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