EV का बढ़ता क्रेज...5300 अरब का व्यापार घाटा, चीन से भरकर आ रहे कंटेनर पर सरकार ने जताई चिंता; अब क्या होगा?
भारतीय बाजार में लगातार बढ़ रही इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड के कारण चीन से बैटरी और ऑटो पार्ट्स का आयात रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है. लगातार बढ़ रहे व्यापार घाटे और चीन पर बढ़ती डिपेंडेंसी पर सरकार की तरफ से चिंता जाहिर की गई है.
भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का दबदबा लगातार बढ़ रहा है और इनकी बिक्री में लगातार बढ़ रही है. लेकिन ईवी की बढ़ी बिक्री के बीच देश की निर्भरता चीन पर बढ़ रही है. जब-जब आप सड़क पर दौड़ते किसी ई-व्हीकल को देखकर खुश होते हैं तब-तब समझ जाएइए चीन से बैटरी का इम्पोर्ट बढ़ रहा है. बैटरी के ग्लोबल मार्केट पर चीन का दबदबा है और लगातार आयात बढ़ने की वजह से मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती 5 महीने में ही चीन के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट 5300 अरब रुपये (56 अरब डॉलर) पर पहुंच गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल बढ़ते आयात और व्यापार घाटे पर चिंता जाहिर की है. बैटरी से लेकर ऑटोमोबाइल सेक्टर तक चीन की भारतीय बाजार पर पकड़ मजबूत हो रही है.
इस सब के बीच यह तो साफ है कि देश में बढ़ रहे ईवी मार्केट का सीधा फायदा चीन की कंपनियों को मिल रहा है. आंकड़ों के अनुसार मौजदूा वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती पांच महीने में (अप्रैल-अगस्त) चीन से बैटरी का इम्पोर्ट दोगुना होकर 2.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. आपको बता दें देश में कुछ स्थानीय कंपनियां बैटरियां बना रही हैं लेकिन हकीकत यह है कि वे महज चीन से रेडीमेड सेल्स (Cells) इम्पोर्ट करके यहां असेंबल करने का काम कर रही हैं. बैटरी के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर के दूसरे सेगमेंट में भी चीन का एक्सपोर्ट मजबूत हो रहा है.
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पैसेंजर व्हीकल का आयात ढाई गुना हुआ
टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर का इम्पोर्ट बढ़कर 107 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया. पिछले साल इसी समय पर यह महज दो मिलियन डॉलर के आसपास था. पैसेंजर व्हीकल का आयात भी ढाई गुने से ज्यादा बढ़कर 226 मिलियन डॉलर (2,150 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया. इसमें BYD जैसे प्रमुख चीनी ब्रांड का लगातार बढ़ता योगदान माना जा रहा है. BYD की कारों को देश में पसंद किया जा रहा है. इसके अलावा भी दूसरे प्रोडक्ट के आयात में भी भारी इजाफा देखने को मिला है.
व्यापार घाटे ने बढ़ाई चिंता
भारतीय बाजार में 'मेक इन इंडिया' के तहत मोबाइल और कंप्यूटर का प्रोडक्शन बढ़ा है. लेकिन उन प्रोडक्ट के अंदर लगने वाले कंपोनेंट्स का बड़ा हिस्सा चीन से ही आयात होकर आ रहा है. टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के आयात में 40% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई. यही कारण है कि अप्रैल-अगस्त के बीच चीन के साथ देश का व्यापार घाटा बढ़कर 5300 अरब रुपये (56 अरब डॉलर) पर पहुंच गया है. पिछले साल इसी दौरान यही आंकड़ा 44.7 अरब डॉलर पर था.
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भारतीय निर्यात बस 40% बढ़ा
चीन से लगातार बढ़ रहे आयात और बिगड़ते व्यापार संतुलन पर केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल ने चिंता जाहिर की है. इसके साथ ही उन्होंने 'फेयर डील' की जरूरत पर बल दिया. भारतीय निर्यात में महज 40% का इजाफा देखा गया. लेकिन इसका कुल साइज बहुत छोटा है और एवरेज मंथली एक्सपोर्ट 2 अरब डॉलर से भी कम है.
चीन का विकल्प तैयार करना मुश्किल?
जानकारों का कहना है कि चीन का भारी प्रोडक्शन और वहां की सरकार की तरफ से दी जा रही सब्सिडी की वजह से वहां पर लागत काफी कम होती है. इस कारण कोई दूसरा देश आसानी से चीन को टक्कर नहीं दे पाता. थिंक टैंक GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव का कहना है कि यदि चीन सप्लाई बंद कर दें तो भारत के फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ सकता है. जब भी सरकार आयात पर बैन लगाती है तो भारतीय इंडर्स्टी की तरफ से यह अर्जी दी जाने लगती है कि उनके पास तुरंत कोई ऑप्शन मौजूद नहीं है.