E20 पर पंगा, E25-E30 पर ब्रेक...700 करोड़ लीटर इथेनॉल बना सरकार के लिए संकट,खपाने के लिए खोज रहे खरीदार
Ethenol Blending: E20 विवाद के बाद E25, E30 की प्लानिंग अटक गई है. जरूरत से ज्यादा प्रोडक्शन ने इथेनॉल की ओवर सप्लाई कर दी है, जिसकी खपत सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है.
Ethenol : E20 ब्लेडिंग के बाद से ही विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. पहले पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट का विवाद, फिर E25, E30 प्रोग्राम पर संकट, अब इथेनॉल की ओवर सप्लाई सरकार की ब्लेंडिंग फ्यूल नीति पर संकट के बादल मंडरा रही है. सरकार ने ब्लेंडिंग प्रोग्राम को खूब बढ़ावा दिया, जिसके बाद भारत में इथेनॉल का प्रोडक्शन बहुत तेजी से बढ़ा, लेकिन अब यही इथेनॉल चुनौती बना हुआ है.
700 करोड़ लीटर इथेनॉल की ओवर सप्लाई
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इथेनॉल इंडस्ट्री ओवर सप्लाई से जूझ रही हैय मैन्युफैक्चरर्स के पास 700 करोड़ लीटर से अधिक इथेनॉल के स्टॉक्स हैं. E20 विवाद के बाद E25, E30 पेट्रोल ब्लेंडिंग खटास में पड़ गई है , जिसके बाद इन इथेनॉल के खपत के लिए नए बाजार की तलाश की जा रही है.
इथेनॉल की ओवर सप्लाई , 700 करोड़ लीटर का कहां होगा इस्तेमाल
भारत के पास अभी 700 करोड़ लीटर इथेनॉल का ओवर स्टॉक है, जिसके लिए घरेलू, विदेशी बाजारों की तलाश की जा रही है. E20 प्रोग्राम पर अनिश्चितता , E25 और E30 पर फिलहाल ब्रेक लगने से इसके खपत को लेकर चुनौती बन रही है.
भारत में इथेनॉल का कहां कितना इस्तेमाल हो रहा ?
भारत में इथेनॉल प्रोडक्शन बहुत तेजी से बढ़ा है, जो अब लगभग 20 अरब लीटर तक पहुंच गया है, साल 2026 में इसमें 4 अरब लीटर की और बढ़ोतरी की उम्मीद है.
E20 में सिर्फ 11 अरब लीटर की जरूरत होती है.
शराब, फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स में 3.5 अरब लीटर का इस्तेमाल.
7 अरब लीटर इथेनॉल के पास कोई बाजार नहीं है.
सरकार क्या करेगी इतने इथेनॉल का
सरकार की योजना इथेनॉल ब्लेडिंग बढ़ाने की थी. E20 के बाद E25, E30, E80 लेवल को हासिल करना था, लेकिन ई20 पर ही विवाद फंस गया. ई25, ई30 ब्लेंडिंग प्लान में सुस्ती के बाद 700 करोड़ लीटर के इथेनॉल की खपत के लिए नए बाजार की तलाश की जा रही है. भारतीय मैन्युफैक्चर्स नेपाल के साथ बातचीत कर इथेनॉल के निर्यात की कोशिश कर रहे हैं.
क्या पेट्रोल के बाद डीजल में भी होगी इथेनॉल की ब्लेडिंग
पेट्रोल के बाद सरकार डीजल में भी इथेनॉल की ब्लेडिंग की संभावना तलाश रही हैं. चूंकि पेट्रोल के मुकाबले डीजल की मांग बहुत ज्यादा है, ऐसे में यहां अगर इथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी मिलती है, तो ओवर सप्लाई की खपत आसान हो जाएगी. हालांकि ये इतना आसान नहीं है. डीजल में इथेनॉल मिलाने का प्रयोग पहले ही फेल हो चुका है. ये ब्लेडिंग सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर सका.
LPG गैस का विकल्प बनाने की तैयारी
डीजल में इथेनॉल की मिलावट के कारण फ्लैश पॉइंट घटने लगा. नए प्रयोग के जरिए और ट्रायल किए जा सकते है. इतना ही नहीं सरकार इथेनॉल को खाना पकाने के फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावना तलाश रही है.जिससे LPG के आयात पर निर्भरता को कम किया जा सके. फिलहाल तो कोशिश ओवर सप्लाई इथेनॉल के इस्तेमाल पर टिकी हुई है.