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H-1B से Green Card तक... अमेरिका ने भारतीय IT की ‘जड़’ पर ही चला दिया चाबुक? अब कंपनियों को बदलना पड़ेगा पूरा मॉडल

अमेरिका के इस कदम का असर टाटा, विप्रो, TCS जैसी IT कंपनियों में वहां काम कर रहे भारतीयों पर पड़ेगा.

Written ByGaurav Singh
Published: Oct 08, 2026, 10:23 PM IST|Updated: Oct 08, 2026, 10:55 PM IST
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H-1B से Green Card तक... अमेरिका ने भारतीय IT की ‘जड़’ पर ही चला दिया चाबुक? अब कंपनियों को बदलना पड़ेगा पूरा मॉडल

About the Author

    Gaurav Singh

    Gaurav Singh

    जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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    Green-Card Programme : ट्रंप जब से दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं तब से लगातार एक के बाद एक भारत को नए झटके देते रहते हैं. अब ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने ऐसा फैसला लिया है जिसका सीधा असर अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों और भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा. 

    US के लेबर डिपार्टमेंट ने इन्फोसिस, TCS, विप्रो और HCL जैसी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से सस्पेंड कर दिया है. इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने परमानेंट रेजिडेंसी चाहने वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया है.

    फेडरल जांच के बीच माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी सस्पेंड कर दिया गया, जबकि नौ यूनिवर्सिटीज पर कथित तौर पर कम वेतन देने को लेकर जांच चल रही है.

    परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के तहत एम्प्लॉयर US डिपार्टमेंट ऑफ लेबर से इस बात का सर्टिफिकेशन लेते हैं कि किसी खास नौकरी के लिए कोई योग्य, इच्छुक और उपलब्ध US वर्कर नहीं है. परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) US के रोजगार बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम का एक अहम हिस्सा है. इसे ये पक्का करने के लिए बनाया गया है कि विदेशी वर्करों को काम पर रखने से एक जैसी पोस्ट पर काम करने वाले US वर्करों की सैलरी, काम की स्थितियों या नौकरी के मौकों पर बुरा असर न पड़े.

    किन कंपनियों पर बढ़ा दबाव?

    इस कदम से इंफोसिस , TCS, विप्रो और HCL जैसी IT कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है. ये US में भारतीय प्रोफेशनल्स को बड़े पैमाने पर नौकरी देती हैं. साथ ही, इससे उन कर्मचारियों पर भी असर पड़ सकता है जो अस्थायी वर्क स्टेटस से स्थायी रेजीडेंसी में बदलना चाहते हैं. 

    ये घोषणा US लेबर सेक्रेटरी कीथ सोंडरलिंग ने US एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के प्रमुख और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की मौजूदगी में की. उन्होंने कहा कि दुनिया की कुछ सबसे बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, HCL और कैपजेमिनी को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम' से सस्पेंड कर रहा हूं. लेबर डिपार्टमेंट माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस प्रोग्राम से सस्पेंड कर रहा है.

    हालांकि, इस कार्रवाई से H-1B वीजी रद्द नहीं होते और न ही ये कंपनियां H-1B वर्करों को नौकरी पर रखने से रोकती हैं. इसके बजाय, सस्पेंशन की वजह से कंपनियां नए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम एप्लीकेशन नहीं भर सकतीं और सस्पेंशन लागू रहने तक पेंडिंग एप्लीकेशन होल्ड पर रहेंगे. भारतीय IT कंपनियों को अधिक कानूनी, कंप्लायंस और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च का सामना भी करना पड़ सकता है.

    जेडी वेंस ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने 2025 में 6,000 अमेरिकी वर्करों को नौकरी से निकाल दिया था, जबकि उसने सर्टिफाई किया था कि उसे योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल सके. इसके बावजूद, उसे 6,000 से अधिक H-1B वीजा के लिए मंजूरी मिली और उसने 3,682 परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम एप्लीकेशन दायर किए. उन्होंने कहा कि इनमें से लगभग 1,000 एप्लीकेशन उन्हीं पोस्ट के लिए थे जिनसे अमेरिकी वर्करों को नौकरी से निकाला गया था. उन्होंने आगे कहा, 'दुर्भाग्य से अमेरिका में कोई भी ऐसी कंपनी नहीं है जिसने इस सिस्टम का माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा गलत इस्तेमाल किया हो.'

    भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?

    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस ताजा कदम का अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स पर खास असर पड़ सकता है, क्योंकि FY2023 में ग्रीन कार्ड पाने वाले लगभग 37% भारतीयों ने इसे रोजगार की प्राथमिकता के जरिए हासिल किया था. ये एक ऐसा रास्ता जिसमें परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम एक अहम कदम है. इसलिए, किसी भी तरह का लंबा सस्पेंशन उन भारतीय टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के लिए अनिश्चितता बढ़ा सकता है जो अस्थायी वर्क स्टेटस से स्थायी रेजीडेंसी में बदलना चाहते हैं.

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    TAGS:
    Donald trump