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100% टैरिफ का हंटर लेकर भी शी के सामने क्यों बैकफुट पर हैं ट्रंप ? अमेरिका-चीन की डील से भारत के लिए क्या बदलेगा?

China-US Meeting: शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका में रहने वाले हैं, ट्रंप और शी के बीच व्हाइट हाउस में क्लोज डोर मीटिंग होने वाली है. दो महाशक्तियों के बीच होने वाली इस मीटिंग पर दुनिया की नजर है.

100% टैरिफ का हंटर लेकर भी शी के सामने क्यों बैकफुट पर हैं ट्रंप ? अमेरिका-चीन की डील से भारत के लिए क्या बदलेगा?

Xi Jinping USA Visit: अमेरिका और चीन धुर विरोधी हैं. दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच का टशन सबने देखा है. सुपरपावर बनने की होड़ में ये दोनों एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने से गुरेज नहीं करते. ऐसे में अगर इन दो शक्तिशाली देशों के नेताओं के बीच मुलाकात हो, तो जाहिर है कि उसपर दुनियाभर की निगाहें होगी. ट्रेड, टैरिफ और टशन के टेंशन के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 1 दशक बाद अमेरिका पहुंच रहे हैं. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति उन्हें रिसीव करने खुद एयरपोर्ट पहुंचेंगे.  

शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा, ट्रंप बिछाएंगे रेड कार्पेट

शी जिपनिंग अपने 479 अधिकारियों, B-2 बॉम्बर, F-22 के साथ 23 सितंबर को अमेरिका पहुंच रहे हैं. चीनी राष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर अमेरिका की तैयारियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्रंप खुद उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचने वाले हैं. ये अमेरिका के इतिहास में 64 साल बाद पहली बार होगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति एयरपोर्ट पर गेस्ट को रिसीव करने पहुंचेंगे. शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन (Peng Liyuan) के लिए व्हाइट हाउस में खास डिनर का आयोजन है, जिसकी कमान खुद अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप संभाल रही है.

क्यों इतना अहम है शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा  ?  

मई में बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. 4 महीने बाद दोनों फिर से मिल रहे हैं. 23 से 25 सितंबर के बीच दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में क्लोज डोर मीटिंग होने वाली है. शी-ट्रंप की ये मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर जारी है. ट्रंप ने ईरान-रूसी तेल की खरीद पर 100 फीसदी टैरिफ की तलवार लटकाई है और पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर संकट मंडरा रहा है.  

अमेरिका और चीन बड़े ट्रेड पार्टनर्स हैं, दोनों के बीच 500 से 585 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है.दोनों के बीच ट्रेड डील नवंबर 2026 में खत्म होने वाली है. दोनों देशों के बीच भले ही मतभेद हो, लेकिन दोनों जानते हैं कि बिना व्यापार अर्थव्यवस्था नहीं चलती.  

चीन के सामने इस बार क्यों बैकफुट पर नजर आ रहे हैं ट्रंप ?  

ट्रंप भले ही टैरिफ की धौंस दिखा रहे हैं, इस बार वो शी जिनपिंग के सामने बैकफुट पर नजर आने वाले हैं. दरअसल ट्रंप चीन के साथ संबंध सुधारना चाहते हैं. ईरान के साथ जंग में उलझने और अरबों डॉलर लुटाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप चीन और शी जिनपिंग के प्रति काफी नरम पड़ चुके हैं. अमेरिका को डर है कि ईरान युद्ध में चीन बैकडोर से मदद कर रहा है. ऐसे में ट्रंप चीन को मनाने की हर संभव कोशिश करेंगे,ताकि वो इस जंग से बाहर निकल सके.  

ट्रंप की नजर चीन के साथ डील पर

चीन से रिश्ते सुधारने के लिए वो इससे पहले 13 से 15 मई तक बीजिंग का दौरा कर चुके हैं.  ट्रंप चीन से बड़ी ट्रेड डील चाहते हैं.  ट्रंप जानते हैं कि चीन जब चाहे, उनकी इकोनॉमी का पहिया रोक सकता है. रेअर अर्थ की सप्लाई रोककर चीन ने कई बार इसका ट्रेलर अमेरिका का दिखाया है.  ट्रंप की कोशिश होगी कि वो इस दौरे पर चीन के साथ रेअर अर्थ से जुड़ा डील फाइनल कर लें . चीन की प्रमुख वेबसाइट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने भी अपने आर्टिकल में लिखा है कि दोनों नेताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रेअर अर्थ और अमेरिकी कार बाजार तक चीनी कारों की पहुंच प्रमुख एजेंटा होगा. ईवी सेक्टर में जिस रफ्तार से चीन भाग रहा है, उसे बड़े बाजार की जरूरत है.  

चीन के सहारे रूस पर कंट्रोल की कोशिश  

चीन और रूस के बीच बढ़ती नजदीकी अमेरिका के लिए खतरा है. ट्रंप इस एलायंस को तोड़ना चाहते हैं.  ब्रिक्स समिट के दौरान उन्होंने भारत, चीन और रूस के बीच मजबूत साझेदारी देखी है. ट्रंप चीन को अपने पाले में करना चाहते हैं, ताकि इस तिगड़ी को कमजोर किया जा सके.  हालांकि उनकी ये मंशा पूरी हो, इसकी संभावना बेहद कम दिखती है.  

ट्रंप के सामने शी जिनपिंग दबाएंगे ताइवान का बटन

ट्रंप राष्ट्रपति से ज्यादा बिजनेसमैन के तौर पर सोचते हैं. चीन के साथ फायदे की डील के लिए उन्होंने पहले से ही 100% टैरिफ वाला मोलभाव का हथियार तैयार रखा है. शी इस मुलाकात के दौरान ताइवान के मुद्दे को उठा सकते हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक चीन अमेरिका को ताइवान मुद्दे से बाहर रखना चाहते हैं. शी ट्रंप के सामने ये दावा करेंगे कि ताइवान ही अमेरिका-चीन रिश्तों में अस्थिरता की असली वजह है. शी इस मीटिंग में 1982 के उस दस्तावेज का जिक्र कर सकते हैं, जिसमें अमेरिका ने ताइवान को हथियारों की बिक्री धीरे-धीरे कम करने पर सहमति जताई थी और इसी की बदौलत वो ताइवान के मसले पर ट्रंप को घेर सकते हैं. 

ट्रंप-शी की मुलाकात से भारत के लिए क्या बदलेगा ?  

जब दो शक्तिशाली देशों के बीच डील होगी, तो जाहिर है कि उसका असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा. भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता है.  अगर दोनों देशों के बीच ट्रे़ड डील हो गई, रेयर अर्थ पर सुलह हो गई या कोई समझौता हो गया, तो भारत को झटका लग सकता है. दरअसल अमेरिका सहित दुनिया की बड़ी कंपनियों ने भारत को चीन के विकल्प के तौर पर देखती है. 

चीनी सरकार के दखल के चलते अमेरिकी कंपनियां चीन से निकलकर भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही है. अगर अमेरिका-चीन के बीच तनाव कम हुआ, तो कंपनियों को नए विकल्प की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, जिसके भारत को नुकसान होगा.  

चीन और अमेरिका के बीच संबंध सुधरने, ट्रेड डील होने से अमेरिकी बाजार में चीनी सामानों की उपलब्धता आसान हो जाएगी. भारत के लिए सस्ते चीनी सामानों का मुकाबला करना आसान नहीं है.

 

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About the Author

Bavita Jha

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बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
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