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₹8415 करोड़ के AT1 बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, Yes Bank के निवेशकों को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने 8,415 करोड़ रुपये के AT1 बॉन्ड को राइट-ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने यस बैंक, आरबीआई और केंद्र सरकार की अपीलें खारिज कर दी हैं.

Written ByGaurav Singh
Published: Oct 15, 2026, 04:36 PM IST|Updated: Oct 15, 2026, 05:01 PM IST
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₹8415 करोड़ के AT1 बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, Yes Bank के निवेशकों को मिली राहत

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    Gaurav Singh

    Gaurav Singh

    जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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    Big Relief for Yes Bank Investors: YES बैंक को एक बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया गया था. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि वो फैसला बॉन्डधारकों के पक्ष में था. इससे अब निवेशकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. आज यानी 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद YES बैंक का शेयर करीब 15 फीसदी गिरावट के साथ 16.98 रुपये पर आ गया है. वहीं,  पिछले सेशन में बैंक का शेयर 21.21 रुपये पर बंद हुआ था.

    'विवादित फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है'

    बेंच ने कहा कि हमारे फैसले में बताए गए कारणों के आधार पर हमारा मानना ​​है कि विवादित फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है. इसलिए अपीलें खारिज की जाती हैं.

    अदालत ने कहा कि उसने इस बात की जांच की कि क्या यस बैंक के प्रशासक, पुनर्गठन योजना (रीकंस्ट्रक्शन स्कीम) में किसी विशेष प्रावधान के बिना बॉन्ड को राइट-ऑफ कर सकते थे और क्या ये फैसला भारतीय रिजर्व बैंक के मास्टर सर्कुलर और बॉन्ड की शर्तों के अनुरूप था.

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?

    बेंच ने ये भी स्पष्ट किया कि बॉन्ड पर मिलने वाले सालाना कूपन भुगतान पर इन अपीलों के नतीजों का कोई असर नहीं पड़ेगा और इनका भुगतान 'इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम' के अनुसार ही किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जनवरी 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए यस बैंक, RBI और केंद्र सरकार की अपीलें खारिज कर दी हैं.

    क्या थी विवाद की जड़?

    बढ़ते बैड लोन, गवर्नेंस से जुड़ी समस्यायों और भारी लिक्विडिटी दबाव के बीच 2018 से 2020 की शुरुआत के दौरान यस बैंक का संकट और गहरा गया था. मार्च 2020 में RBI ने बैंक पर मोरेटोरियम (रोक) लगा दिया और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया  और अन्य लेंडर्स के नेतृत्व में एक बचाव योजना शुरू की. पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत 14 मार्च 2020 को 8,415 करोड़ रुपये मूल्य के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ कर दिया गया था. लेकिन, बॉन्ड धारकों ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसने जनवरी 2023 में इस राइट-ऑफ को रद्द कर दिया. इसके बाद यस बैंक और RBI ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

    AT-1 बॉन्ड क्या हैं?

    AT1 बॉन्ड बैंक की कैपिटल जुटाने का एक जरिया है. AT-1 बॉन्ड एक प्रकार के फाइनेंशियल डेट इंस्ट्रूमेंट हैं, जिन्हें बैंक अपने कैपिटल बेस को मजबूत करने के लिए जारी करते हैं. इन्हें पारंपरिक बॉन्ड की तुलना में अधिक जोखिम भरा बनाया गया है और इस अतिरिक्त जोखिम के बदले निवेशकों को अधिक ब्याज दर दी जाती है. 

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    TAGS:
    Indian Economy