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बैंक ऑफ अमेरिका को लगा तगड़ा झटका, जानिए आखिर क्यों US रेगुलेटर्स ने लगाया है जुर्माना?

अमेरिकी रेगुलेटर ने बैंक ऑफ अमेरिका पर मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी नियमों और प्रतिबंधों के उल्लंघन के लिए $1.21 बिलियन (लगभग 1.21 अरब डॉलर) का भारी जुर्माना लगाया है.

Written ByGaurav Singh
Published: Oct 14, 2026, 09:50 PM IST|Updated: Oct 14, 2026, 11:39 PM IST
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बैंक ऑफ अमेरिका को लगा तगड़ा झटका, जानिए आखिर क्यों US रेगुलेटर्स ने लगाया है जुर्माना?

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    Gaurav Singh

    Gaurav Singh

    जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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    Bank of America : US रेगुलेटर्स ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और प्रतिबंधों के नियमों का पालन करने में बड़े पैमाने पर नाकाम रहने के लिए बैंक ऑफ अमेरिका पर $1.21 बिलियन का जुर्माना लगाया है. इस जुर्माने से तीसरी तिमाही की नेट इनकम कम हो जाएगी और इसके तहत पिछले ट्रांजैक्शन की स्वतंत्र समीक्षा की जरूरत होगी. 

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, US रेगुलेटर्स ने बैंक ऑफ अमेरिका पर अरबों डॉलर के संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का पता लगाने और उनकी रिपोर्ट करने में नाकाम रहने के लिए $1.21 बिलियन का जुर्माना लगाया है. इस जुर्माने का असर बैंक की तीसरी तिमाही की कमाई पर भी पड़ेगा.

    तीसरा सबसे बड़ा जुर्माना

    US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने कहा कि बैंक $5 बिलियन से ज्यादा की संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करने में नाकाम रहा. इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े और अन्य अहम गैर-कानूनी फाइनेंस जोखिमों से जुड़े $1 बिलियन शामिल हैं. ये जुर्माना डिपार्टमेंट के इतिहास में तीसरा सबसे बड़ा जुर्माना है. 

    US रेगुलेटर्स को क्या पता चला?

    ऑफिस ऑफ द कम्पट्रोलर ऑफ द करेंसी (OCC) ने बैंक ऑफ अमेरिका पर $750 मिलियन का सिविल जुर्माना लगाया. ये रेगुलेटर द्वारा लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है. ये कार्रवाई बैंक के मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी प्रोग्राम में कमियों से जुड़ी थी. इनकी पहचान 2024 के 'सीज-एंड-डेसिस्ट' ऑर्डर के तहत की गई थी. रेगुलेटर ने बैंक के कंप्लायंस प्रोग्राम को 'कमजोर और बेअसर' बताया है. इसके ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम ने अरबों डॉलर के ट्रांजैक्शन से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट दाखिल करने में देरी की थी.

    ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ये भी कहा कि बैंक ने अपने कंप्लायंस प्रोग्राम बनाते समय रेवेन्यू को प्राथमिकता दी और अपने इंटरनल कंट्रोल के बजाय कानून लागू करने वाली एजेंसियों और अन्य फाइनेंशियल संस्थानों की बाहरी पूछताछ पर बहुत ज्यादा निर्भर रहा है. 

    इसके अलावा, बैंक ने प्रतिबंध प्रोग्राम के 400 से ज्यादा कथित उल्लंघनों के लिए ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल को $11.6 मिलियन का जुर्माना चुकाया है. ट्रेजरी ने कहा कि बैंक ने गलती से ऐसे पेमेंट प्रोसेस किए जो रूस और ईरान जैसे देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करते थे.

    बैंक ऑफ अमेरिका को पिछले ट्रांजैक्शन की समीक्षा करने, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने (जिन्हें बैंक उस समय नहीं पकड़ पाया था) और उन ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क (FinCEN) को देने के लिए एक स्वतंत्र थर्ड पार्टी को नियुक्त करना होगा. बैंक ने कहा कि उसने फाइनेंशियल क्राइम से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी में अरबों डॉलर का निवेश किया है और हजारों लोगों को काम पर रखा है. एक प्रवक्ता ने कहा कि बैंक रेगुलेटर की जरूरतों के अनुसार काम पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

    बैंक ऑफ अमेरिका पर क्या असर पड़ेगा?

    1.2 बिलियन डॉलर के इस चार्ज से बैंक की तीसरी तिमाही की नेट इनकम में प्रति शेयर लगभग 17 सेंट की कमी आने की उम्मीद है. LSEG द्वारा सर्वे किए गए एनालिस्ट ने प्रति शेयर 1.10 डॉलर की एडजस्टेड कमाई का अनुमान लगाया था. हालांकि, इस अनुमान में जुर्माने जैसी एक बार होने वाली चीजें शामिल नहीं थीं. ये जुर्माना बड़े फाइनेंशियल संस्थानों में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और प्रतिबंधों के कम्प्लायंस में विफलताओं के फाइनेंशियल और रेगुलेटरी नतीजों को उजागर करता है. 

    बैंकों को संदिग्ध ट्रांजैक्शन की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट करने की जरूरत होती है, ताकि अधिकारियों को अवैध फाइनेंस का पता लगाने और प्रतिबंधों को लागू करने में मदद मिल सके. ये कार्रवाई अमेरिकन एक्सप्रेस पर इसी तरह की एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कमियों के लिए 350 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाए जाने के कुछ दिनों बाद हुई है. इससे प्रमुख अमेरिकी फाइनेंशियल संस्थानों में कम्प्लायंस नियंत्रणों की जांच और बढ़ गई है.

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    WORLD NEWS